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Rohtak News: पाकिस्तान, बलूचिस्तान और बांग्लादेश में भी हैं नाथ संप्रदाय के मठ
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अस्थल बोहर स्थित बाबा मस्तनाथ मठ में संवाददाता से बातचीत करते हुए नाथ संप्रदाय के अंतरराष्ट्री
रतन चंदेल
गुरु गोरक्षनाथ की योग साधना परंपरा का पालन कर रहे नाथ संप्रदाय के मठ मंदिर केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हैं। पड़ोसी देश पाकिस्तान और उसके हिस्से बलूचिस्तान सहित बांग्लादेश में भी नाथ संप्रदाय के मठ हैं जिनमें आज भी नाथ परंपरा की योग साधना होती है।
ये बातें हरियाणा के रोहतक जिले में अस्थल बोहर मठ में चल रहे तीन दिवसीय मेले में शामिल होने आए नाथ संप्रदाय के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार के अध्यक्ष डॉ. विलासनाथ योगी ने कहीं। उन्होंने कहा कि नाथों में कुल 12 पंथ हैं जिनमें आई पंथ को प्रधान माना जाता है।
आई पंथ की बड़ी गद्दी है अस्थल बोहर मठ
:
योगी विलासनाथ के अनुसार अस्थल बोहर मठ में नाथ संप्रदाय के आई पंथ की बड़ी और मूल गद्दी है। इसके अलावा देश विदेश में आई पंथ के जितने भी अनुयायी हैं, वे नौवीं के पर यहां आकर जरूर मत्था टेकते हैं। उनके दादा गुरु ब्रह्मलीन महंत श्रयोनाथ भी इस गद्दी को संभाल चुके हैं। अब इस गद्दी पर बाबा बालकनाथ योगी है। जो नाथ सिद्धांत परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
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उन्होंने नाथ योगी की पहचान भी बताई उनके मुताबिक नाथ योगी एक प्रकट चिह्न उसके फटे हुए कान और उसमें पहने जाने वाले कुंडल होते हैं। उन योगियों को आम बोलचाल में कन फटे साधू भी कहा जाता है। यह एक गुप्त विद्या होती है। मठ में आने वाले श्रद्धालु काला कंबल, गुड़ की भेली व देशी घी अर्पित करते हैं।
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गुरु गोरक्षनाथ की योग साधना परंपरा का पालन कर रहे नाथ संप्रदाय के मठ मंदिर केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हैं। पड़ोसी देश पाकिस्तान और उसके हिस्से बलूचिस्तान सहित बांग्लादेश में भी नाथ संप्रदाय के मठ हैं जिनमें आज भी नाथ परंपरा की योग साधना होती है।
ये बातें हरियाणा के रोहतक जिले में अस्थल बोहर मठ में चल रहे तीन दिवसीय मेले में शामिल होने आए नाथ संप्रदाय के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार के अध्यक्ष डॉ. विलासनाथ योगी ने कहीं। उन्होंने कहा कि नाथों में कुल 12 पंथ हैं जिनमें आई पंथ को प्रधान माना जाता है।
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आई पंथ की बड़ी गद्दी है अस्थल बोहर मठ
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योगी विलासनाथ के अनुसार अस्थल बोहर मठ में नाथ संप्रदाय के आई पंथ की बड़ी और मूल गद्दी है। इसके अलावा देश विदेश में आई पंथ के जितने भी अनुयायी हैं, वे नौवीं के पर यहां आकर जरूर मत्था टेकते हैं। उनके दादा गुरु ब्रह्मलीन महंत श्रयोनाथ भी इस गद्दी को संभाल चुके हैं। अब इस गद्दी पर बाबा बालकनाथ योगी है। जो नाथ सिद्धांत परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
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उन्होंने नाथ योगी की पहचान भी बताई उनके मुताबिक नाथ योगी एक प्रकट चिह्न उसके फटे हुए कान और उसमें पहने जाने वाले कुंडल होते हैं। उन योगियों को आम बोलचाल में कन फटे साधू भी कहा जाता है। यह एक गुप्त विद्या होती है। मठ में आने वाले श्रद्धालु काला कंबल, गुड़ की भेली व देशी घी अर्पित करते हैं।