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Rohtak News: खेल-खेल में मासूम के लिए मौत का फंदा बन गया झूला

Sun, 28 Apr 2024 02:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Sun, 28 Apr 2024 02:15 AM IST
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The swing became a death trap for an innocent child while playing.
बहादुरगढ़। गांव छारा के ईंट भट्ठे पर एक सात साल की मासूम बच्ची खेलते खेलते पालने की रस्सी में उलझ गई। गर्दन दबने से उसने तड़फ-तड़फ कर दम तोड़ दिया। काम से लौटे परिजन उसे अस्पताल ले गए, लेकिन जब तक बहुत देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया और परिजनों के पास सिवा पछताने के कोई चारा नहीं था।
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छारा गांव के भट्ठे पर नीतीश कुमार का परिवार मजदूरी करता है। नीतीश मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। शुक्रवार को सुबह नीतीश और उनकी पत्नी भट्ठे पर काम में लगे थे। पीछे से उनके चारों बच्चे झुग्गी में खेल रहे थे। झुग्गी में एक पालना (झूला) बना है। खेल-खेल में सात वर्षीय बच्ची श्रुचि पालने पर चली गई। उसकी गर्दन पालने की रस्सी में उलझ गई। गला दबने से मासूम की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। कुछ समय जब परिवार के लोग तो उनकी बच्ची पर नजर पड़ी। परिजन आनन-फानन में उसे अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने बच्ची की मौत की पुष्टि कर दी। सूचना पाकर मांडोठी चौकी से पुलिस अस्पताल में पहुंची और परिजनों से घटना की जानकारी ली। इसके बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कराई। परिजनों के बयान पर पुलिस ने इसे हादसा मानते हुए धारा 174 के तहत कार्रवाई की।
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कीमती है आपके लाड़लों की जान, रखें उनका ध्यान
परिजनों की छोटी सी चूक मासूमों पर भारी पड़ रही है। जिले में पहले भी इस तरह के हादसे हो चुके हैं जब मासूम बच्चे जान गवा चुके हैं। दो महीने पहले छोटूराम नगर में एक बच्चा खेलते खेलते बाथरूम में चला गया था और बाल्टी में भरे पानी में डूबकर उसकी मौत हो गई थी। श्रुचि चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। मासूम की दर्दनाक मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा था। परिजनों को इस बात का मलाल था कि वह बच्ची को बचा नहीं सके। चिकित्सकों का कहना है कि माता पिता को छोटे बच्चों का ध्यान रखना चाहिए। उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए किसी बड़े जिम्मेदार व्यक्ति को उनका ध्यान रखना चाहिए ताकि इस तरह के हादसे न हों।
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