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Rohtak News: बेटा कहता था पापा मैं देश सेवा करूंगा...अंगदान से बचा गया छह लोगों का जीवन
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36-अंशु। फाइल फोटो
रोहतक। बेटा उठ, तेरा पापा तुझे लेने आया है.. यह कहते हुए अंशु की दादी बिमला बिलख उठी। पीजीआई के ट्राॅमा सेंटर में अंगदान के बाद पौत्र अंशु की पार्थिव देह बाहर आते ही दादी बिमला भावुक होकर बोलीं-तूने कहा था-पापा, मैं देश सेवा करूंगा। आज अंगदान कर छह लोगों का जीवन बचाकर देश के काम आ गया। यह कहते ही वह फफक पड़ी।
परिवार ने बड़ी मुश्किल से उन्हें संभाला। खुद स्वास्थ्य विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने उन्हें गाड़ी में बैठाया व सांत्वना देकर चुप कराया। कुलपति ने रुंधे गले से कहा कि मां जी, आपका बेटा कहीं नहीं गया। इसने छह लोगों में जिंदा है। इन्हें नया जीवन देकर खुद की उम्र बढ़ा ली है।
कुलपति ने कहा कि एक पिता अपने बच्चे को गोद में खिलाता है तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं होता। उसकी तोतली बोली, उसकी किलकारियां, नन्हा हाथ पकड़कर चलना...सब भाता है। जब उसी बाप के सामने लाडला सफेद चादर में लिपटा हो, तो उस पल को शब्दों में बांधना नामुमकिन है।
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अंशु के परिवार की स्थिति भी कुछ यही है। इसके बावजूद इस परिवार ने छह लोगों को नई जिंदगी देने का फैसला लिया। यह परिवार की सराहनीय पहल है।
मेरा बेटा मरा नहीं...वह छह लोगों में जिंदा रहेगा
झज्जर के सोंधी गांव निवासी विकास ने कहा कि अंशु मेरा इकलौता बेटा था। भाई के बगैर छोटी बहन अकेली रह गई। वह इस तरह छोड़कर चला जाएगा, पता नहीं था। वह मरा नहीं, छह लोगों में जिंदा रहेगा। सोटो टीम के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह, ट्रांसपोर्ट को-ऑर्डिनेटर रोहित, दीप्ति, राजेश कुमार ने परिवार को अंगदान का महत्व बताया व समाज के लिए नेक कार्य करने की सलाह दी। कुलपति ने कहा कि अंशु की वजह से किसी की मांग का सिंदूर, किसी का बच्चा बच जाए तो पुण्य का काम होगा इसीलिए अंशु के अंगदान दान किए हैं।
यह दान नहीं, यज्ञ में आहुति है : निदेशक
पीजीआई निदेशक डॉ. एसके सिंघल ने कहा कि यह दान नहीं, यह एक यज्ञ है। इसमें मां-बाप ने ब्रेन स्टेम डेथ हो चुके अपने कलेजे के टुकड़े की आहुति देकर हरियाणा को अंगदान के लिए जगाया है। उनके इस प्रयास से छह परिवारों में खुशी आएगी। इस मौके पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल, डॉ. लव शर्मा, डॉ. जितेंद्र जाखड़, डॉ. पंकज छिक्कारा, डॉ. योगेश, डॉ. अंकुर, डॉ. विवेक ठाकुर, डॉ. गौरव, रोहित, संजय कादयान, दिलबाग आदि उपस्थित रहे।
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परिवार ने बड़ी मुश्किल से उन्हें संभाला। खुद स्वास्थ्य विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने उन्हें गाड़ी में बैठाया व सांत्वना देकर चुप कराया। कुलपति ने रुंधे गले से कहा कि मां जी, आपका बेटा कहीं नहीं गया। इसने छह लोगों में जिंदा है। इन्हें नया जीवन देकर खुद की उम्र बढ़ा ली है।
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कुलपति ने कहा कि एक पिता अपने बच्चे को गोद में खिलाता है तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं होता। उसकी तोतली बोली, उसकी किलकारियां, नन्हा हाथ पकड़कर चलना...सब भाता है। जब उसी बाप के सामने लाडला सफेद चादर में लिपटा हो, तो उस पल को शब्दों में बांधना नामुमकिन है।
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अंशु के परिवार की स्थिति भी कुछ यही है। इसके बावजूद इस परिवार ने छह लोगों को नई जिंदगी देने का फैसला लिया। यह परिवार की सराहनीय पहल है।
मेरा बेटा मरा नहीं...वह छह लोगों में जिंदा रहेगा
झज्जर के सोंधी गांव निवासी विकास ने कहा कि अंशु मेरा इकलौता बेटा था। भाई के बगैर छोटी बहन अकेली रह गई। वह इस तरह छोड़कर चला जाएगा, पता नहीं था। वह मरा नहीं, छह लोगों में जिंदा रहेगा। सोटो टीम के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह, ट्रांसपोर्ट को-ऑर्डिनेटर रोहित, दीप्ति, राजेश कुमार ने परिवार को अंगदान का महत्व बताया व समाज के लिए नेक कार्य करने की सलाह दी। कुलपति ने कहा कि अंशु की वजह से किसी की मांग का सिंदूर, किसी का बच्चा बच जाए तो पुण्य का काम होगा इसीलिए अंशु के अंगदान दान किए हैं।
यह दान नहीं, यज्ञ में आहुति है : निदेशक
पीजीआई निदेशक डॉ. एसके सिंघल ने कहा कि यह दान नहीं, यह एक यज्ञ है। इसमें मां-बाप ने ब्रेन स्टेम डेथ हो चुके अपने कलेजे के टुकड़े की आहुति देकर हरियाणा को अंगदान के लिए जगाया है। उनके इस प्रयास से छह परिवारों में खुशी आएगी। इस मौके पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल, डॉ. लव शर्मा, डॉ. जितेंद्र जाखड़, डॉ. पंकज छिक्कारा, डॉ. योगेश, डॉ. अंकुर, डॉ. विवेक ठाकुर, डॉ. गौरव, रोहित, संजय कादयान, दिलबाग आदि उपस्थित रहे।

36-अंशु। फाइल फोटो

36-अंशु। फाइल फोटो