{"_id":"6931d18cd0cd65a0710efa9e","slug":"the-sarpanch-of-meghot-binja-village-was-suspended-by-the-dc-rohtak-news-c-196-1-nnl1010-133098-2025-12-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: मेघोत बिंजा गांव के सरपंच को डीसी ने किया निलंबित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: मेघोत बिंजा गांव के सरपंच को डीसी ने किया निलंबित
विज्ञापन
नांगल चौधरी। गांव मेघोत बिंजा में जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायत के सरपंच मनोज कुमार को निलंबित कर दिया है। डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने यह कार्रवाई पंचायत की संपत्ति को क्षति पहुंचाने पर लिया गया है। पंचायत कार्यों को नियमित रूप से जारी रखने के लिए बहुमत पक्ष के पंच को अस्थायी रूप से चार्ज सौंपने के निर्देश जारी किए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, पिछली पंचायत के कार्यकाल में गांव की पंचायती जमीन पर अवैध कब्जा हटाने का अभियान चलाया गया था। अभियान के दौरान गांव के ही एक व्यक्ति ने सरकारी जमीन खाली नहीं किया। इस पर उस समय की पंचायत ने सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए सिविल कोर्ट में कब्जाधारी के खिलाफ केस दर्ज किया था जो अभी न्यायालय में विचाराधीन था।
बताया जा रहा है कि वर्तमान सरपंच ने बिना पंचायत की मंजूरी और बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए एकतरफा तौर पर केस को वापस ले लिया जिसके चलते पंचायत की जमीन और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
विज्ञापन
इस कदम के खिलाफ पंचायत सदस्यों और ग्रामीण लोगों ने आपत्ति जताई और इसे जनहित के विरुद्ध व पंचायत की संपत्ति को क्षति पहुंचाने वाला निर्णय बताया। इसी शिकायत के बाद मामला प्रशासन तक पहुंचा।
जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई
शिकायत प्राप्त होने पर जिला प्रशासन ने बीडीपीओ को पूरे मामले की जांच सौंपी गई। जांच में पाया गया कि केस को वापस लेने के लिए न तो पंचायत की आमसभा बुलाई गई और न ही कोई लिखित प्रस्ताव पारित किया गया जबकि यह एक सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ा संवेदनशील मामला था। जांच रिपोर्ट में सरपंच के खिलाफ गंभीर अनियमितताएं दर्ज किए जाने के बाद जिला उपायुक्त ने निलंबन आदेश जारी कर दिए।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार, पिछली पंचायत के कार्यकाल में गांव की पंचायती जमीन पर अवैध कब्जा हटाने का अभियान चलाया गया था। अभियान के दौरान गांव के ही एक व्यक्ति ने सरकारी जमीन खाली नहीं किया। इस पर उस समय की पंचायत ने सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए सिविल कोर्ट में कब्जाधारी के खिलाफ केस दर्ज किया था जो अभी न्यायालय में विचाराधीन था।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि वर्तमान सरपंच ने बिना पंचायत की मंजूरी और बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए एकतरफा तौर पर केस को वापस ले लिया जिसके चलते पंचायत की जमीन और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
विज्ञापन
इस कदम के खिलाफ पंचायत सदस्यों और ग्रामीण लोगों ने आपत्ति जताई और इसे जनहित के विरुद्ध व पंचायत की संपत्ति को क्षति पहुंचाने वाला निर्णय बताया। इसी शिकायत के बाद मामला प्रशासन तक पहुंचा।
जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई
शिकायत प्राप्त होने पर जिला प्रशासन ने बीडीपीओ को पूरे मामले की जांच सौंपी गई। जांच में पाया गया कि केस को वापस लेने के लिए न तो पंचायत की आमसभा बुलाई गई और न ही कोई लिखित प्रस्ताव पारित किया गया जबकि यह एक सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ा संवेदनशील मामला था। जांच रिपोर्ट में सरपंच के खिलाफ गंभीर अनियमितताएं दर्ज किए जाने के बाद जिला उपायुक्त ने निलंबन आदेश जारी कर दिए।