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Rohtak News: देखरेख के अभाव में बिगड़ रही पार्कों की तस्वीर
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रोहतक। शहर के लोगों को सेहतमंद बनाए रखने वाले पार्कों का खुद मिजाज बिगड़ा हुआ है। देखरेख के अभाव में पार्कों की तस्वीर बिगड़ रही है। कहीं बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है, तो कहीं बारिश का पानी जमा है। बच्चों के झूले जर्जर हाल हैं। टूटे झूलों से बच्चों के गिरकर चोटिल होने का डर बना रहता है। पैदल पथ पर घूमने वालों को भी चोट का खतरा है, इसकी वजह ट्रैक का टूटा होना है। अमर उजाला ने रविवार को शहर के मानसरोवर, हुडा सिटी व सेक्टर-1 स्थित देवीलाल पार्क का जायजा लिया।
केस-1
पार्क में सुबह घूमने के लिए आता हूं। दो दिन से बारिश हो रही है। इससे पार्क में पानी भरा हुआ है। बरसाती पानी के कारण घूमना परेशानियों भरा हो गया है। बच्चों के झूले देखरेख के अभाव में टूट गए। बच्चे खेलकूद कर ही वापस लौट रहे हैं।
मनीष शर्मा, मानसरोवर कॉलोनी।
केस-2
शहर के पार्कों की हालत खराब है। लोगों के पास घूमने-फिरने व खुद को सेहतमंद रखने के लिए पार्क ही बेहतर साधन हैं। यहां भी व्यवस्था बनाने पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। झूले लगाने के बाद प्रशासन ने इनकी सुध नहीं ली। ये झूले टूटे हुए व जर्जर हाल हैं।
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राजू, सोनीपत रोड।
केस-3
बारिश के बाद शहर के पार्कों की हालत बिगड़ गई है। शाम को बच्चों के साथ पार्क में घूमने आता हूं। यहां व्यवस्था जर्जर हाल है। झूले टूटे पड़े हैं। बरसाती पानी जमा होने से बच्चों के लिए यहां खेलना मुश्किल हो गया है। कहीं घास खड़ी तो कहीं बैंच टूटे पड़े हैं। ट्रैक भी अनेक जगह से जर्जर हाल है।
सुमित, गोहान रोड।
आरडब्लूए व एनजीओ कर रहे पार्कों की देखभाल
नगर निगम पार्कों की देखभाल की नई व्यवस्था बनाई है। इसके तहत आरडब्ल्यूए व एनजीओ को पार्कों की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बदले उन्हें हर माह चार रुपये प्रति गज के हिसाब भुगतान किया जाता है। निगम प्रशासन ने कर्मचारियों की कमी व काम को बेहतर बनाने के चलते पार्कों को संस्थाओं के सुपुर्द किया गया है। इसके बावजूद पिछले कुछ समय से व्यवस्था चरमराई हुई है।
शहर में 250 से ज्यादा छोटे-बड़े पार्क
नगर निगम ने लोगों के लिए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पार्क विकसित किए हैं। शहर में छोटे-बड़े करीब 250 पार्क हैं। इनमें से कुछ शहर की शान हैं। इनमें मानसरोवर पार्क, देवीलाल पार्क, हुडा सिटी पार्क, गोकर्ण पार्क व अन्य पार्क शामिल हैं।
वर्जन:
पार्कों के सुधार की योजना बनाई गई है। जल्दी ही इस पर काम शुरू किया जाएगा। फिलहाल शहर को साफ बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
भूपेंद्र सिंह, सह आयुक्त, नगर निगम।
केस-1
पार्क में सुबह घूमने के लिए आता हूं। दो दिन से बारिश हो रही है। इससे पार्क में पानी भरा हुआ है। बरसाती पानी के कारण घूमना परेशानियों भरा हो गया है। बच्चों के झूले देखरेख के अभाव में टूट गए। बच्चे खेलकूद कर ही वापस लौट रहे हैं।
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मनीष शर्मा, मानसरोवर कॉलोनी।
केस-2
शहर के पार्कों की हालत खराब है। लोगों के पास घूमने-फिरने व खुद को सेहतमंद रखने के लिए पार्क ही बेहतर साधन हैं। यहां भी व्यवस्था बनाने पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। झूले लगाने के बाद प्रशासन ने इनकी सुध नहीं ली। ये झूले टूटे हुए व जर्जर हाल हैं।
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राजू, सोनीपत रोड।
केस-3
बारिश के बाद शहर के पार्कों की हालत बिगड़ गई है। शाम को बच्चों के साथ पार्क में घूमने आता हूं। यहां व्यवस्था जर्जर हाल है। झूले टूटे पड़े हैं। बरसाती पानी जमा होने से बच्चों के लिए यहां खेलना मुश्किल हो गया है। कहीं घास खड़ी तो कहीं बैंच टूटे पड़े हैं। ट्रैक भी अनेक जगह से जर्जर हाल है।
सुमित, गोहान रोड।
आरडब्लूए व एनजीओ कर रहे पार्कों की देखभाल
नगर निगम पार्कों की देखभाल की नई व्यवस्था बनाई है। इसके तहत आरडब्ल्यूए व एनजीओ को पार्कों की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बदले उन्हें हर माह चार रुपये प्रति गज के हिसाब भुगतान किया जाता है। निगम प्रशासन ने कर्मचारियों की कमी व काम को बेहतर बनाने के चलते पार्कों को संस्थाओं के सुपुर्द किया गया है। इसके बावजूद पिछले कुछ समय से व्यवस्था चरमराई हुई है।
शहर में 250 से ज्यादा छोटे-बड़े पार्क
नगर निगम ने लोगों के लिए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पार्क विकसित किए हैं। शहर में छोटे-बड़े करीब 250 पार्क हैं। इनमें से कुछ शहर की शान हैं। इनमें मानसरोवर पार्क, देवीलाल पार्क, हुडा सिटी पार्क, गोकर्ण पार्क व अन्य पार्क शामिल हैं।
वर्जन:
पार्कों के सुधार की योजना बनाई गई है। जल्दी ही इस पर काम शुरू किया जाएगा। फिलहाल शहर को साफ बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
भूपेंद्र सिंह, सह आयुक्त, नगर निगम।