{"_id":"669459c7e9d6d0f2c1066934","slug":"the-pain-of-loneliness-of-the-elderly-was-seen-in-the-drama-sandhya-chhaya-rohtak-news-c-17-roh1020-463664-2024-07-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: नाटक संध्या छाया में दिखाई दिया बुजुर्गों के अकेलेपन का दर्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: नाटक संध्या छाया में दिखाई दिया बुजुर्गों के अकेलेपन का दर्द
विज्ञापन
रोहतक। राष्ट्रीय नाटक उत्सव के तहत रविवार को हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स रोहतक, पठानिया वर्ल्ड कैंपस, जेड ग्लोबल स्कूल और कला और सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा की ओर से नाटक मंचन किया गया। जेड ग्लोबल स्कूल के सभागार में ड्रामाटर्जी आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी दिल्ली के कलाकारों ने संध्या छाया नाटक का मंचन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अनिल भाटिया, विभांशु वैभव, आशीष नेहरा, विश्वदीपक त्रिखा, शक्ति सरोवर, अविनाश सैनी ने दीप प्रज्वलन से किया।
नाटक संध्या छाया बुजुर्गों के अकेलेपन को दर्शाने व दर्शकों की संवेदना को जगाने में कामयाब रहा। जयवंत दलवी के लिखे नाटक संध्या छाया बूढ़े मां-बाप की वेदना से अनभिज्ञ युवा पीढ़ी पर करारे कटाक्ष करता है। नाटक में ऐसे वृद्ध मां-बाप की कहानी दिखाई गई है जो बेटों के होते हुए भी संतान के अभाव का दंश झेल रहे हैं। इस वृद्ध दंपति के दो बेटे हैं - दीनू और नंदू। इसके बावजूद वे दोनों अकेले रहने को मजबूर हैं। बड़ा बेटा अमेरिका में शादी कर वहीं बस जाता है। दूसरा बेटा कश्मीर में तैनात है। छोटे बेटे के कारगिल में शहीद होने की खबर उन्हें बुरी तरह तोड़ देती है। बड़ा बेटा छोटे भाई की मौत पर आता है तो घर मे न आकर होटल में रुकता है। इस घटना के बाद नाना नानी यह सोच कर खुदखुशी कर ली, कि कम से कम उनका बेटा उन्हें अग्नि तो दे देगा। इस तरह यह मार्मिक प्रस्तुति बड़ी खूबसूरती से युवा पीढ़ी को बूढ़े मां बाप के प्रति अपने कर्तव्य को समझा गई। इस मौके पर संजय भाटिया, नाटककार विभांशु वैभव, आशीष नेहरा, वीडी त्रिखा, नलिनी, तरुणपुष्प, नरेंद्र शर्मा, सुभाष नगाड़ा, गुलाब सिंह, अविनाश सैनी, हरदीप सिंह समेत अनेक नाटक प्रेमी उपस्थित रहे।
विज्ञापन
नाटक संध्या छाया बुजुर्गों के अकेलेपन को दर्शाने व दर्शकों की संवेदना को जगाने में कामयाब रहा। जयवंत दलवी के लिखे नाटक संध्या छाया बूढ़े मां-बाप की वेदना से अनभिज्ञ युवा पीढ़ी पर करारे कटाक्ष करता है। नाटक में ऐसे वृद्ध मां-बाप की कहानी दिखाई गई है जो बेटों के होते हुए भी संतान के अभाव का दंश झेल रहे हैं। इस वृद्ध दंपति के दो बेटे हैं - दीनू और नंदू। इसके बावजूद वे दोनों अकेले रहने को मजबूर हैं। बड़ा बेटा अमेरिका में शादी कर वहीं बस जाता है। दूसरा बेटा कश्मीर में तैनात है। छोटे बेटे के कारगिल में शहीद होने की खबर उन्हें बुरी तरह तोड़ देती है। बड़ा बेटा छोटे भाई की मौत पर आता है तो घर मे न आकर होटल में रुकता है। इस घटना के बाद नाना नानी यह सोच कर खुदखुशी कर ली, कि कम से कम उनका बेटा उन्हें अग्नि तो दे देगा। इस तरह यह मार्मिक प्रस्तुति बड़ी खूबसूरती से युवा पीढ़ी को बूढ़े मां बाप के प्रति अपने कर्तव्य को समझा गई। इस मौके पर संजय भाटिया, नाटककार विभांशु वैभव, आशीष नेहरा, वीडी त्रिखा, नलिनी, तरुणपुष्प, नरेंद्र शर्मा, सुभाष नगाड़ा, गुलाब सिंह, अविनाश सैनी, हरदीप सिंह समेत अनेक नाटक प्रेमी उपस्थित रहे।
विज्ञापन