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Rohtak News: नाटक में नजर आई विभाजन की विभीषिका
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लाल नाथ हिंदू कॉलेज पहुंचे राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय। संवाद
रोहतक।
हमारे देश को आजादी ऐसे ही नहीं मिली है। इसके लिए लाखों-करोड़ों लोगों ने कुर्बानियां दी हैं। हम उन पूर्वजों की कुर्बानियों को किसी भी सूरत में भुला नहीं सकते। पाकिस्तान का हिंदुस्तान से अलग नया देश बनना दर्दनाक ही नहीं, खौफनाक मंजर था। विभाजन के समय 14 अगस्त 1947 को लाखों हिंदू और सिख भाइयों के कत्लेआम के दर्दनाक मंजर को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। यह कहना है राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय का। वे सोमवार रात लाल नाथ हिंदू कॉलेज में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हुए नाटक मंचन में शिकरत करने पहुंचे थे। यहां समाज के सम्मानित बुजुर्गों से भी मुलाकात की।
विभाजन के दर्द को दर्शाते नाटक में कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। नाटक में देश के दो हिस्सों में बंटने, लाखों की संख्या में लोगों के कत्लेआम, लाखों लोगों के पलायन, घर-परिवार से अलगाव समेत अनगिनत दर्द को समेटे बंटवारे या आजादी की रात का मंजर झकझोरने वाला रहा। नाटक ने दर्शकों को आत्मविभोर कर दिया। इसे राज्यपाल ने भी सराहा। यहां विभाजन विभीषिका कमेटी के प्रदेश संयोजक एवं पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, कमेटी के जिला संयोजक अशोक चौधरी, सांसद डॉ. अरविंद शर्मा समेत अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे।
नाटक मंचन से पूर्व राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के बाद से अब तक इतिहास के पन्नों में खोए स्वतंत्रता सेनानियों व क्रांतिकारियों को याद किया है। पूर्व की सरकारों ने हमारे ऐसे लाखों-करोड़ों क्रांतिकारियों को याद करना उचित नहीं समझा। प्रधानमंत्री ने लाल किले से घोषणा की थी कि हर वर्ष 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाएगा। यह दर्द समझने के लिए प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करते हैं।
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हमारे देश को आजादी ऐसे ही नहीं मिली है। इसके लिए लाखों-करोड़ों लोगों ने कुर्बानियां दी हैं। हम उन पूर्वजों की कुर्बानियों को किसी भी सूरत में भुला नहीं सकते। पाकिस्तान का हिंदुस्तान से अलग नया देश बनना दर्दनाक ही नहीं, खौफनाक मंजर था। विभाजन के समय 14 अगस्त 1947 को लाखों हिंदू और सिख भाइयों के कत्लेआम के दर्दनाक मंजर को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। यह कहना है राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय का। वे सोमवार रात लाल नाथ हिंदू कॉलेज में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हुए नाटक मंचन में शिकरत करने पहुंचे थे। यहां समाज के सम्मानित बुजुर्गों से भी मुलाकात की।
विभाजन के दर्द को दर्शाते नाटक में कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। नाटक में देश के दो हिस्सों में बंटने, लाखों की संख्या में लोगों के कत्लेआम, लाखों लोगों के पलायन, घर-परिवार से अलगाव समेत अनगिनत दर्द को समेटे बंटवारे या आजादी की रात का मंजर झकझोरने वाला रहा। नाटक ने दर्शकों को आत्मविभोर कर दिया। इसे राज्यपाल ने भी सराहा। यहां विभाजन विभीषिका कमेटी के प्रदेश संयोजक एवं पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, कमेटी के जिला संयोजक अशोक चौधरी, सांसद डॉ. अरविंद शर्मा समेत अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे।
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नाटक मंचन से पूर्व राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के बाद से अब तक इतिहास के पन्नों में खोए स्वतंत्रता सेनानियों व क्रांतिकारियों को याद किया है। पूर्व की सरकारों ने हमारे ऐसे लाखों-करोड़ों क्रांतिकारियों को याद करना उचित नहीं समझा। प्रधानमंत्री ने लाल किले से घोषणा की थी कि हर वर्ष 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाएगा। यह दर्द समझने के लिए प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करते हैं।
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