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Rohtak News: नर्मदेश्वर महालिंगम में 12 और 26 जुलाई को होगी दिव्य भस्म आरती
Fri, 03 Jul 2026 02:48 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Fri, 03 Jul 2026 02:48 AM IST
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05-शिवाजी कॉलोनी स्थित नर्मदेश्वर महालिंगम मंदिर में भस्म आरती करते बाबा भूषण नाथ । स्रोत : श
- फोटो : Samvad
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। शिवाजी कॉलोनी स्थित नर्मदेश्वर महालिंगम मंदिर में 12 व 26 जुलाई को प्रदोष व्रत के अवसर पर सुबह 7:30 बजे भगवान शिव की दिव्य एवं अलौकिक भस्म आरती की जाएगी। भगवान महादेव का वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्राभिषेक, विशेष पूजन एवं पवित्र भस्म से दिव्य शृंगार शास्त्रोक्त विधि के अनुसार संपन्न होगा।
शिव मंदिर से ज्योतिष आचार्य पंडित संदीप पाठक ने बताया कि हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित कल्याणकारी व्रत माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, त्रयोदशी तिथि की प्रदोष बेला में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से साधक के पापों का क्षय होता है।
जीवन के कष्ट दूर होते हैं व सुख, समृद्धि, आरोग्य, मनोकामना सिद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नर्मदेश्वर महालिंगम में होने वाली भस्म आरती वैदिक परंपरा एवं श्रद्धा के साथ संपन्न की जाएगी। इस दिव्य वातावरण में उपस्थित श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा एवं महादेव की कृपा का अनुभव करेंगे।
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शिव की सनातन परंपरा का अंग
पुजारी पाठक ने बताया कि भस्म आरती भगवान शिव की सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। भस्म हमें यह संदेश देती है कि यह संसार नश्वर है और अंत में सब कुछ पंचतत्व में विलीन हो जाता है इसलिए मनुष्य को अहंकार का त्याग कर धर्म, सेवा, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलना चाहिए। भगवान महादेव का भस्म स्वरूप वैराग्य, आत्मज्ञान और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है।
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रोहतक। शिवाजी कॉलोनी स्थित नर्मदेश्वर महालिंगम मंदिर में 12 व 26 जुलाई को प्रदोष व्रत के अवसर पर सुबह 7:30 बजे भगवान शिव की दिव्य एवं अलौकिक भस्म आरती की जाएगी। भगवान महादेव का वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्राभिषेक, विशेष पूजन एवं पवित्र भस्म से दिव्य शृंगार शास्त्रोक्त विधि के अनुसार संपन्न होगा।
शिव मंदिर से ज्योतिष आचार्य पंडित संदीप पाठक ने बताया कि हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित कल्याणकारी व्रत माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, त्रयोदशी तिथि की प्रदोष बेला में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से साधक के पापों का क्षय होता है।
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जीवन के कष्ट दूर होते हैं व सुख, समृद्धि, आरोग्य, मनोकामना सिद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नर्मदेश्वर महालिंगम में होने वाली भस्म आरती वैदिक परंपरा एवं श्रद्धा के साथ संपन्न की जाएगी। इस दिव्य वातावरण में उपस्थित श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा एवं महादेव की कृपा का अनुभव करेंगे।
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शिव की सनातन परंपरा का अंग
पुजारी पाठक ने बताया कि भस्म आरती भगवान शिव की सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। भस्म हमें यह संदेश देती है कि यह संसार नश्वर है और अंत में सब कुछ पंचतत्व में विलीन हो जाता है इसलिए मनुष्य को अहंकार का त्याग कर धर्म, सेवा, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलना चाहिए। भगवान महादेव का भस्म स्वरूप वैराग्य, आत्मज्ञान और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है।