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आंदोलनकारियों की मांगें जायज, सरकार कर रही अनदेखी : हुड्डा

Sun, 27 Dec 2020 11:42 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 27 Dec 2020 11:42 PM IST
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The demands of the agitators are justified, the government is ignoring: Hooda
पत्रकारों से बातचीत करते पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा। - फोटो : RohtakCity
रोहतक। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसान आंदोलन के दौरान रोजाना हो रही मौतों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि देश का अन्नदाता ठंड में सड़कों पर बैठा है। किसानों की सारी मांगे जायज हैं। इसके बावजूद सरकार आंदोलन की अनदेखी कर रही है, जोकि जानलेवा साबित हो रही है। अबतक करीब 40 किसान अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसे में सरकार को संवेदनशीलता और गंभीरता से किसानों से बात करनी चाहिए और उनकी मांगों को मानते हुए आंदोलन ख़त्म करवाना चाहिए।
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पूर्व सीएम ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि हम किसानों के मुद्दे पर विधानसभा में सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते हैं। क्योंकि ये सरकार जनता और अपने विधायकों का विश्वास खो चुकी है। हर वर्ग आज सरकार के ख़िलाफ सड़कों पर है और कई निर्दलीय विधायक सरकार से समर्थन वापस ले चुके हैं। किसान बनाम सरकार की इस लड़ाई में गठबंधन सहयोगी जेजेपी के कई विधायकों ने भी किसानों के समर्थन की बात कही है। विपक्ष ही नहीं प्रदेश की जनता भी किसानों के मुद्दे पर हर विधायक के बारे में जानना चाहती है कि उनके प्रतिनिधि आज किसानों के साथ खड़े हैं या कुर्सी के साथ। अगर विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव आता है तो ख़ुद सत्ता सहयोगी सरकार के ख़िलाफ मत डालेंगे। फिर भी मुख्यमंत्री का कहना है कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि विपक्ष के पास कोई ख़ास मुद्दा नहीं है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमने राज्यपाल से विशेष सत्र बुलाने की मांग की है, ना कि मुख्यमंत्री से। क्योंकि राज्यपाल के पास ऐसा करने का संवैधानिक अधिकार है। मुख्यमंत्री की तरफ से इस मांग को ख़ारिज करना बताता है कि उन्हें ख़ुद अपनी सरकार और विधायकों पर भरोसा नहीं है। इसलिए मुख्यमंत्री नहीं चाहेंगे कि उसके ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव आए। ऐसे में हमने सीधे राज्यपाल से अपील की थी कि वो प्रदेश के किसानों की स्थिति और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करें और विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं।
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