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भाजपा के पूर्व पार्षद का आरोप निगम ने व्यावसायिक 676 प्रॉपर्टी को बना दिया रिहायशी
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निगम की संपत्ति कर शाखा में ऑनलाइन आवेदनों को पहले रद्द किया जाता है और फिर स्वीकृत। चालू वर्ष में 7213 आवेदन आए, जिनमें से 3107 रद्द हुए, जो बाद में स्वीकार कर लिए गए। 42075 अनअप्रूव्ड प्रॉपर्टी में से 2363 को अप्रूव कर दिया गया। 2021-2022 में गलत नीयत से 676 प्रॉपर्टी को रिहायशी बना दिया गया। इससे निगम को राजस्व का नुकसान हुआ है। ये आरोप भाजपा के पूर्व पार्षद अशोक खुराना ने संयुक्त आयुक्त को दिए प्रार्थना पत्र में लगाए हैं।
पूर्व पार्षद ने आरोप लगाया कि निगम की संपत्ति कर शाखा में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। निगम ने 2010-11 में प्रॉपर्टी टैक्स का सर्वे कराया था, जिसमें काफी गलतियां थीं। निगम ने कभी डाटा अपडेट करने का प्रयास नहीं किया। प्रदेश सरकार ने 1 अप्रैल 2021 से जमीन के क्रय-विक्रय, किरायानामा व नाम परिवर्तन के लिए निगम से अनापत्ति प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया। अनुमान पर आधारित होने के कारण निगम का रिकॉर्ड तहसील के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता है। निगम में संपत्ति कर बिल का रिकॉर्ड दुरुस्त कराने के लिए ऑफलाइन व्यवस्था की गई। दलालों के माध्यम से काम होने की शिकायतों पर निगम ने आवेदन की व्यवस्था ऑनलाइन कर दी, लेकिन हालात नहीं सुधरे। ऑनलाइन आवेदनों को एक से अधिक बार रद्द कर दिया जाता है। कुछ समय बाद उन्हीं कागजात के आधार पर स्वीकृत कर लिया जाता है। इस काम के लिए कार्यालय अथवा बाहर लोग सक्रिय रहते हैं। चालू वर्ष में अब तक संपत्ति कर को ठीक करवाने के लिए 7213 आवेदन आ चुके हैं। इनमें से 3107 रद्द हुए हैं और बाद में स्वीकार हो गए। निगम की 191094 संपत्तियों में से 42075 अनअप्रूव्ड हैं, जिनमें से 2363 प्रॉपर्टी को अप्रूव कर दिया गया है। विसंगतियां इतनी हैं कि एक प्लाट का एक हिस्सा अप्रूव्ड है तो दूसरा अनअप्रूव्ड है। अगस्त 2020 से 31 मार्च 2022 तक 2363 संपत्तियों को अप्रूव किया गया है। शहर में 2018-19 से लगातार व्यवसायिक संपत्तियां बढ़ीं। जिनकी 2020-2021 में संख्या 13686 थी और 2021-2022 में 676 को गलत नीयत से रिहायशी बना दिया गया। इससे निगम को राजस्व का नुकसान हुआ है। उन्होंने संयुक्त आयुक्त से दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग है।
यदि कोई गड़बड़ी हुई है, तो उसकी डिटेल उपलब्ध करवाएं। डिटेल की बिंदुवार जांच करवाई जाएगी। पता करेंगे कि किस अधिकारी के समय में गड़बड़ी हुई है। ऑनलाइन आवेदन में मेकर व चेकर जांच के आगे बढ़ाते हैं। मेरे समय में कहीं गड़बड़ी हुई है तो बताएं। -हरदीप, डीएमसी नगर निगम।
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पूर्व पार्षद ने आरोप लगाया कि निगम की संपत्ति कर शाखा में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। निगम ने 2010-11 में प्रॉपर्टी टैक्स का सर्वे कराया था, जिसमें काफी गलतियां थीं। निगम ने कभी डाटा अपडेट करने का प्रयास नहीं किया। प्रदेश सरकार ने 1 अप्रैल 2021 से जमीन के क्रय-विक्रय, किरायानामा व नाम परिवर्तन के लिए निगम से अनापत्ति प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया। अनुमान पर आधारित होने के कारण निगम का रिकॉर्ड तहसील के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता है। निगम में संपत्ति कर बिल का रिकॉर्ड दुरुस्त कराने के लिए ऑफलाइन व्यवस्था की गई। दलालों के माध्यम से काम होने की शिकायतों पर निगम ने आवेदन की व्यवस्था ऑनलाइन कर दी, लेकिन हालात नहीं सुधरे। ऑनलाइन आवेदनों को एक से अधिक बार रद्द कर दिया जाता है। कुछ समय बाद उन्हीं कागजात के आधार पर स्वीकृत कर लिया जाता है। इस काम के लिए कार्यालय अथवा बाहर लोग सक्रिय रहते हैं। चालू वर्ष में अब तक संपत्ति कर को ठीक करवाने के लिए 7213 आवेदन आ चुके हैं। इनमें से 3107 रद्द हुए हैं और बाद में स्वीकार हो गए। निगम की 191094 संपत्तियों में से 42075 अनअप्रूव्ड हैं, जिनमें से 2363 प्रॉपर्टी को अप्रूव कर दिया गया है। विसंगतियां इतनी हैं कि एक प्लाट का एक हिस्सा अप्रूव्ड है तो दूसरा अनअप्रूव्ड है। अगस्त 2020 से 31 मार्च 2022 तक 2363 संपत्तियों को अप्रूव किया गया है। शहर में 2018-19 से लगातार व्यवसायिक संपत्तियां बढ़ीं। जिनकी 2020-2021 में संख्या 13686 थी और 2021-2022 में 676 को गलत नीयत से रिहायशी बना दिया गया। इससे निगम को राजस्व का नुकसान हुआ है। उन्होंने संयुक्त आयुक्त से दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग है।
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यदि कोई गड़बड़ी हुई है, तो उसकी डिटेल उपलब्ध करवाएं। डिटेल की बिंदुवार जांच करवाई जाएगी। पता करेंगे कि किस अधिकारी के समय में गड़बड़ी हुई है। ऑनलाइन आवेदन में मेकर व चेकर जांच के आगे बढ़ाते हैं। मेरे समय में कहीं गड़बड़ी हुई है तो बताएं। -हरदीप, डीएमसी नगर निगम।
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