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Rohtak News: आयोग का आदेश, उपभोक्ता को नौ प्रतिशत ब्याज सहित लौटाए 12.15 लाख रुपये

Sun, 15 Feb 2026 11:19 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 15 Feb 2026 11:19 PM IST
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The commission ordered the consumer to return Rs 12.15 lakh along with nine per cent interest.
रोहतक। डाक विभाग ने ब्याज रिकवरी के नाम पर उपभोक्ता के 12.15 लाख रुपये काट लिए। पीड़ित की याचिका पर जिला उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन नागेंद्र कादियान ने आदेश दिया है कि डाक विभाग उपभोक्ता को 12.15 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित लौटाए। डाक विभाग को 10 हजार रुपये हर्जाना और पांच हजार रुपये कानूनी खर्च के भी देने होंगे।
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आयोग के मुताबिक, सुभाष नगर निवासी सज्जन सिंह (63) ने फरवरी 2023 में याचिका दायर की थी कि उसने 2001 में मुख्य डाकघर में अविभाजित परिवार (एचयूएफ) खाता खुलवाया था। खाते में 13 मई 2022 को 27,46,413 रुपये बैलेंस था। उसने खाते में ब्याज भी जमा करवाया। साथ ही मैच्योरिटी के बावजूद 5,99,950 रुपये भी खाते में जमा करवाए।
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2022 में पैसे निकालने मुख्य डाकघर में गए तो उन्हें केवल 15,30,739 रुपये दिए गए। बाकी 12,15,674 रुपये ब्याज की रिकवरी के नाम पर काट लिए। उन्होंने डाकघर अधीक्षक से शिकायत की लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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अगस्त 2022 में लीगल नोटिस दिया। उसका भी कोई जवाब नहीं आया। इससे उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। उपभोक्ता का कहना काटी गई राशि ब्याज सहित लौटाई जाए। 50 हजार रुपये मुआजवा और 22 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर दिलवाए जाएं।
पीपीएफ को लेकर नियमों में हुआ था बदलाव : डाक विभाग
डाक विभाग का कहना है कि 2010 में एचयूएफ के नाम पर खोले गए पीपीएफ को लेकर नियमों में बदलाव हुआ था। इसमें स्पष्ट किया गया था कि इस तरह का अकाउंट मैच्योरिटी होने पर 16 साल बाद बंद हो जाएगा। कोई ब्याज नहीं मिलेगा। इसलिए 2016-2017 के समय के लिए क्लोजिंग डेट तक का ब्याज 12,15,674 वसूल किया गया। बाकी राशि 15,30,739 दे दिए गए।

उपभोक्ता ने कहा कि खाते की मैच्योरिटी के बावजूद 2016 से 2022 तक खाते में 5,99,950 रुपये जमा किए गए। आयोग ने कहा कि जब विभाग का मानना है कि 2016-17 में खाता बंद हो गया था तो उसमें नकदी व ब्याज क्यों जमा किया गया। खुद नियमों का पालन न कर विभाग ने नियमों के नाम पर पैसे काट लिए। आदेश दिया कि डाक विभाग एक माह के अंदर काटे गए रुपये ब्याज सहित लौटाए। साथ में हर्जाना व कानूनी खर्च भी दे।
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