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Rohtak News: 'गधे की बरात' देख लोटपोट हुए दर्शक, नोकझोंक ने मोहा मन
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08सीटीक15-पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से आयोजित संध्या रंगशाला में गधे की बारात नाटक
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर की ओर से आयोजित मासिक नाट्य संध्या 'रंगशाला' में हास्य व्यंग्य नाटक 'गधे की बरात' का मंचन किया गया। इस नाटक के माध्यम से अमीरी-गरीबी के अंतर को दर्शाया गया, साथ ही कलाकारों की बेहतरीन प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया।
यह नाटक सप्तक कल्चरल सोसाइटी रोहतक द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसका 345वां मंचन शिल्पग्राम में हुआ। इससे पूर्व इसका लाहौर (पाकिस्तान), लबासना मसूरी, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली में मंचन किया जा चुका है। इस हास्य व्यंग्य नाटक के जरिए दर्शाया गया कि गरीबों की बस्ती से जो भी राजमहल की चौखट तक पहुंचता है, वो फिर कभी नहीं लौटता। वहां पहुंचकर वो अपने सगे गरीब भाइयों को भूल जाता है। इस नाटक के नाटककार हरिभाई वडगांवकर और निर्देशक विश्वदीपक त्रिखा थे।
कला प्रेमियों ने इस नाटक और उसके पात्रों के अभिनय को जमकर सराहा। अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन केंद्र के सहायक निदेशक (वित्तीय व लेखा) दुर्गेश चांदवानी ने किया। इस नाटक में कल्लू का किरदार अविनाश सैनी, गंगी-पारूल, राजा व बाबा-सुरेंद्र, दीवानजी-तरुण पुष्प त्रिखा, इंद्र-शक्ति स्वरूप त्रिखा, चित्रसेन-अमित शर्मा, द्वारपाल-अनिल, राजकुमारी-खुशी, बुआ-प्रेरणा, बराती-नलीनाक्षि, छोटी बाई, वंशिखा ने निभाया। वहीं, हारमोनियम पर विकास रोहिला, नगाड़े पर सुभाष नगाड़ा रहे।
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यह नाटक सप्तक कल्चरल सोसाइटी रोहतक द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसका 345वां मंचन शिल्पग्राम में हुआ। इससे पूर्व इसका लाहौर (पाकिस्तान), लबासना मसूरी, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली में मंचन किया जा चुका है। इस हास्य व्यंग्य नाटक के जरिए दर्शाया गया कि गरीबों की बस्ती से जो भी राजमहल की चौखट तक पहुंचता है, वो फिर कभी नहीं लौटता। वहां पहुंचकर वो अपने सगे गरीब भाइयों को भूल जाता है। इस नाटक के नाटककार हरिभाई वडगांवकर और निर्देशक विश्वदीपक त्रिखा थे।
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कला प्रेमियों ने इस नाटक और उसके पात्रों के अभिनय को जमकर सराहा। अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन केंद्र के सहायक निदेशक (वित्तीय व लेखा) दुर्गेश चांदवानी ने किया। इस नाटक में कल्लू का किरदार अविनाश सैनी, गंगी-पारूल, राजा व बाबा-सुरेंद्र, दीवानजी-तरुण पुष्प त्रिखा, इंद्र-शक्ति स्वरूप त्रिखा, चित्रसेन-अमित शर्मा, द्वारपाल-अनिल, राजकुमारी-खुशी, बुआ-प्रेरणा, बराती-नलीनाक्षि, छोटी बाई, वंशिखा ने निभाया। वहीं, हारमोनियम पर विकास रोहिला, नगाड़े पर सुभाष नगाड़ा रहे।
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