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Rohtak News: बोनमेरो ट्रांसप्लांट से थैलीसीमिया पीड़ितो को मिल सकता है नवजीवन
Mon, 30 Jun 2025 02:22 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Mon, 30 Jun 2025 02:22 AM IST
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डाॅ. एम जाेसेफ जॉन।
रोहतक। बोनमेरो ट्रांसप्लांट थैलीसीमिया पीड़ितो को बड़ी राहत दे सकता है। इस तकनीक के जरिए स्वस्थ व्यक्ति के सेल मरीज के शरीर में डाले जाते हैं। यह सेल शरीर में अंदर जाकर नए सेल बनाते हैं। नए सेल बनने से मरीज स्वस्थ होने लगता है। इस महंगे इलाज में भी सफलता की शत प्रतिशत संभावना नहीं रहती है। इसकी वजह संक्रमण का खतरा है। यह दावा किया है, अब तक 297 सफल बोनमेरो ट्रांसप्लांट कर चुके लुधियाना क्रिश्चन मेडिकल कॉलेज के हेमेटोलॉजी क्लीनिक के हेड डाॅ. एम जाेसेफ जॉन का। रविवार को बाबा लक्ष्मणपुरी डेरे में हुए राष्ट्रीय थैलीसीमिया सेमिनार में हिस्सा लेने आए चिकित्सक ने अमर उजाला से अपना अनुभव साझा किया।
डॉ. जोसेफ ने बताया कि देश के एक लाख से अधिक थैलीसीमिया पीड़ित हैं। इनमें से ज्यादातर मरीज जांच ही नहीं कराते हैं। इस कारण यह बीमारी नासूर बनी हुई है। इसमें थैलीसीमिया पीड़ित बच्चे की उम्र मुश्किल से 20 से 30 वर्ष होती है। इनके शरीर में खून नहीं बनता है। इस कारण इन्हें बार-बार रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
इससे इनके शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है। शरीर के दूसरे अंग प्रभावित होने लगते हैं। पीड़ित बच्चे का विकास रुक जाता है। शरीर में कमजोरी के कारण वह दूसरे बच्चों की तरह दौड़ भाग नहीं कर पाता है। ऐसे में बेहतर है कि थैलीसीमिया प्रभावित परिवार अपने बच्चों की शादी करते समय सावधानी बरतें। वह अपने बेटे या बेटी की जांच अवश्य कराएं। उनके थैलीसीमिया मेजर होने पर उसी ग्रुप के साथी से शादी करने से बचें। इससे नया केस सामने नहीं आएगा।
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डॉ. जोसेफ ने बताया कि देश के एक लाख से अधिक थैलीसीमिया पीड़ित हैं। इनमें से ज्यादातर मरीज जांच ही नहीं कराते हैं। इस कारण यह बीमारी नासूर बनी हुई है। इसमें थैलीसीमिया पीड़ित बच्चे की उम्र मुश्किल से 20 से 30 वर्ष होती है। इनके शरीर में खून नहीं बनता है। इस कारण इन्हें बार-बार रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
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इससे इनके शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है। शरीर के दूसरे अंग प्रभावित होने लगते हैं। पीड़ित बच्चे का विकास रुक जाता है। शरीर में कमजोरी के कारण वह दूसरे बच्चों की तरह दौड़ भाग नहीं कर पाता है। ऐसे में बेहतर है कि थैलीसीमिया प्रभावित परिवार अपने बच्चों की शादी करते समय सावधानी बरतें। वह अपने बेटे या बेटी की जांच अवश्य कराएं। उनके थैलीसीमिया मेजर होने पर उसी ग्रुप के साथी से शादी करने से बचें। इससे नया केस सामने नहीं आएगा।
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