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24 घंटे से ज्यादा बुखार, आंखें, जीभ, होंठ व हाथ-पैर का लाल होना मिस-सी के लक्षण
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कोरोना को हराने वाले बच्चों पर माताओं व परिजनों को दो से छह सप्ताह तक सतत देखरेख करनी होगी। इस अवधि में बच्चों को मिस-सी (मल्टी इनफ्लेमेट्री सिंड्रोम इन चाइल्ड) हो सकता है। यदि 24 घंटे से ज्यादा बुखार, आंख लाल, उल्टी-दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर रेशे, धड़कन बढ़ना, सांस तेज होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। लापरवाही घातक हो सकती है। पीजीआईएमएस का बाल रोग विभाग मिस-सी से निपटने तैयारी में जुटा है ताकि बच्चों को तुरंत हरसंभव उपचार दिया जा सके।
पीजीआईएमएस के वरिष्ठ डॉक्टरों की मानें तो कोरोना संक्रमित बच्चों के निगेटिव होने का काफी संतोषजनक आंकड़ा है मगर दो से छह सप्ताह खतरनाक हो सकते हैं। इसकी वजह बच्चों के मिस-सी की चपेट में आने की आशंका है। ऐसे में पोस्ट कोविड बच्चों की विशेष निगरानी करनी होगी। न सिर्फ सुपाच्य पौष्टिक भोजन बल्कि स्वच्छ वातावरण मिलना जरूरी है। बच्चे की त्वचा, आंख, होंठ व जीभ लगातार चेक करनी होगी। तापमान देखते रहना होगा। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना निगेटिव होने के दो से छह सप्ताह बच्चों के लिए दिक्कत भरे हो सकते हैं। यदि बच्चे को 24 घंटे से ज्यादा बुखार रहे, उल्टी-दस्त व पेट दर्द हो, त्वचा पर रेशे पड़ जाए, बच्चा ज्यादा चिढ़ने लगे, दिल की धड़कन बढ़ जाए, सांस लेने में दिक्कत हो, आंखें लाल हो जाएं, होंठ व जीभ पर लालपन व सूजन दिखे, हाथ-पैर पर लालपन व सूजन दिखे, सिर दर्द की शिकायत हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं। ये लक्षण बच्चे में मिस-सी होने के हैं। इसमें किसी तरह की लापरवाही नुकसानदायक हो सकती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर बच्चे के पेट में तेज दर्द होगा। सांस लेने में दिक्कत होगी और दिल की धड़कन बढ़ जाएगी। शरीर का रंग पीला-नीला पड़ सकता है, जो खतरनाक है। वहीं, पोस्ट कोरोना के बाद बच्चों में होने वाले मिस-सी से निपटने के लिए पीजीआईएमएस का बाल रोग विभाग तैयारी में जुटा है ताकि उपचार में किसी भी तरह की परेशानी पैदा नहीं हो।
पीजीआई में आ चुके हैं मिस-सी के बच्चे, स्वस्थ होकर लौटे
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि कोरोना निगेटिव कुछ बच्चों में मिस-सी हुआ है, जिनका समय पर समुचित उपचार हुआ और स्वस्थ होकर घर गए हैं। देरी से बच्चों को उपचार के लिए लाना खतरनाक हो सकती है।
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कोरोना निगेटिव बच्चों में दो से छह सप्ताह के बीच मिस-सी होने का डर रहता है। अभी तक पोस्ट कोविड बच्चे ही इससे ग्रसित मिले हैं। माताओं व परिजनों को पोस्ट कोविड बच्चे पर सतत नजर रखनी होगी। बच्चे को 24 घंटे से ज्यादा बुखार रहता है, आंख लाल होती है, पेट दर्द, उल्टी-दस्त, त्वचा पर रेशे, दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। क्योंकि जरा सी लापरवाही घातक हो सकती है। पीजीआई में इससे निपटने की तैयारी में जुटा है।
- डॉ. गीता गठवाल, बाल रोग विभागाध्यक्ष, पीजीआईएमएस
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पीजीआईएमएस के वरिष्ठ डॉक्टरों की मानें तो कोरोना संक्रमित बच्चों के निगेटिव होने का काफी संतोषजनक आंकड़ा है मगर दो से छह सप्ताह खतरनाक हो सकते हैं। इसकी वजह बच्चों के मिस-सी की चपेट में आने की आशंका है। ऐसे में पोस्ट कोविड बच्चों की विशेष निगरानी करनी होगी। न सिर्फ सुपाच्य पौष्टिक भोजन बल्कि स्वच्छ वातावरण मिलना जरूरी है। बच्चे की त्वचा, आंख, होंठ व जीभ लगातार चेक करनी होगी। तापमान देखते रहना होगा। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना निगेटिव होने के दो से छह सप्ताह बच्चों के लिए दिक्कत भरे हो सकते हैं। यदि बच्चे को 24 घंटे से ज्यादा बुखार रहे, उल्टी-दस्त व पेट दर्द हो, त्वचा पर रेशे पड़ जाए, बच्चा ज्यादा चिढ़ने लगे, दिल की धड़कन बढ़ जाए, सांस लेने में दिक्कत हो, आंखें लाल हो जाएं, होंठ व जीभ पर लालपन व सूजन दिखे, हाथ-पैर पर लालपन व सूजन दिखे, सिर दर्द की शिकायत हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं। ये लक्षण बच्चे में मिस-सी होने के हैं। इसमें किसी तरह की लापरवाही नुकसानदायक हो सकती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर बच्चे के पेट में तेज दर्द होगा। सांस लेने में दिक्कत होगी और दिल की धड़कन बढ़ जाएगी। शरीर का रंग पीला-नीला पड़ सकता है, जो खतरनाक है। वहीं, पोस्ट कोरोना के बाद बच्चों में होने वाले मिस-सी से निपटने के लिए पीजीआईएमएस का बाल रोग विभाग तैयारी में जुटा है ताकि उपचार में किसी भी तरह की परेशानी पैदा नहीं हो।
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पीजीआई में आ चुके हैं मिस-सी के बच्चे, स्वस्थ होकर लौटे
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि कोरोना निगेटिव कुछ बच्चों में मिस-सी हुआ है, जिनका समय पर समुचित उपचार हुआ और स्वस्थ होकर घर गए हैं। देरी से बच्चों को उपचार के लिए लाना खतरनाक हो सकती है।
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कोरोना निगेटिव बच्चों में दो से छह सप्ताह के बीच मिस-सी होने का डर रहता है। अभी तक पोस्ट कोविड बच्चे ही इससे ग्रसित मिले हैं। माताओं व परिजनों को पोस्ट कोविड बच्चे पर सतत नजर रखनी होगी। बच्चे को 24 घंटे से ज्यादा बुखार रहता है, आंख लाल होती है, पेट दर्द, उल्टी-दस्त, त्वचा पर रेशे, दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। क्योंकि जरा सी लापरवाही घातक हो सकती है। पीजीआई में इससे निपटने की तैयारी में जुटा है।
- डॉ. गीता गठवाल, बाल रोग विभागाध्यक्ष, पीजीआईएमएस