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14 की रात सूर्य मकर राशि में करेंगे प्रवेश, 15 को मनाएं मकर संक्रांति
ब्यूरो/ अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 13 Jan 2016 01:50 AM IST
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अब की बार भी मकर संक्रांति का पर्व 14 और 15 जनवरी को दोनों दिन मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो चंद्र कलाओं द्वारा निर्धारित गणना के अनुसार सूर्य 14 जनवरी की रात एक बजकर 25 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेगा।
इसके बाद 15 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 24 बजे तक रहेंगे। ऐसे में वस्त्र दान, स्नान दान और तिल दान कर पुण्य कमाने का दिन 15 जनवरी को ही माना जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं. संदीप पाठक ने बताया कि 14 जनवरी की रात 1:25 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं
उन्होंने बताया कि मल मास की वजह से साल 2016 लीप वर्ष है। इस वजह से साल भर आने वाले त्योहारों की तिथियों में परिवर्तन रहेगा। यही कारण है कि 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। वहीं, ज्योेतिषाचार्य पं. ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि लीप वर्ष के कारण तिथियों का क्रम हर दो साल में बदलता है
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इस वजह से वर्ष 2017 और 18 में वापस से मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। शर्मा ने बताया कि 14 जनवरी की मध्य रात्रि में सूर्य तुला लग्न में मकर राशि में प्रवेश करेगा। इससे 14 और 15 दोनों दिन मकर संक्रांति मनाई जाएगी।
बसंत ऋतु की होगी शुरुआ
पौष माह में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इसके साथ ही सूर्य उत्तरायण हो जाता है। इस दिन को सूर्य की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
सामाजिक संस्थाएं बाटेंगी कंबल
मकर संक्रांति के दिन रूठे बुजुर्गों को मनाने की परंपरा है। वहीं, गरीबों में वस्त्रदान कर पुण्य भी कमाया जाता है। इस दिन शहर के अनाथालयों के साथ वृद्ध आश्रमों में भी सामाजिक संस्थाओं की ओर से कंबल बांटकर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा।
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इसके बाद 15 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 24 बजे तक रहेंगे। ऐसे में वस्त्र दान, स्नान दान और तिल दान कर पुण्य कमाने का दिन 15 जनवरी को ही माना जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं. संदीप पाठक ने बताया कि 14 जनवरी की रात 1:25 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं
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उन्होंने बताया कि मल मास की वजह से साल 2016 लीप वर्ष है। इस वजह से साल भर आने वाले त्योहारों की तिथियों में परिवर्तन रहेगा। यही कारण है कि 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। वहीं, ज्योेतिषाचार्य पं. ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि लीप वर्ष के कारण तिथियों का क्रम हर दो साल में बदलता है
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इस वजह से वर्ष 2017 और 18 में वापस से मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। शर्मा ने बताया कि 14 जनवरी की मध्य रात्रि में सूर्य तुला लग्न में मकर राशि में प्रवेश करेगा। इससे 14 और 15 दोनों दिन मकर संक्रांति मनाई जाएगी।
बसंत ऋतु की होगी शुरुआ
पौष माह में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इसके साथ ही सूर्य उत्तरायण हो जाता है। इस दिन को सूर्य की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
सामाजिक संस्थाएं बाटेंगी कंबल
मकर संक्रांति के दिन रूठे बुजुर्गों को मनाने की परंपरा है। वहीं, गरीबों में वस्त्रदान कर पुण्य भी कमाया जाता है। इस दिन शहर के अनाथालयों के साथ वृद्ध आश्रमों में भी सामाजिक संस्थाओं की ओर से कंबल बांटकर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा।