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नए सत्र से फिर निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़ाई

Wed, 15 Apr 2020 12:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 15 Apr 2020 12:27 AM IST
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Study from books of private publishers again from new session
लॉक डाउन में सोनीपथ रोड पर स्कूल के अंदर बिक रही है किताब कापियां।। अमर उजाला - फोटो : RohtakCity
कोरोना महामारी और लॉकडाउन की आड़ में नए सत्र की पढ़ाई निजी प्रकाशकों की किताबों से कराई जाने की तैयारी है। शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबों को तवज्जो दी जा रही है। प्रशासन की नाक की नीचे निजी स्कूल संचालकों की ओर से खुले वाहनों में किताब व कापियां लाद कर विद्यार्थियों के घर-घर बेचा जा रहा है। सोमवार को अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की तो यह सच सामने आया।
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निजी स्कूलों की मनमानी एक बार फिर शिक्षा पर भारी पड़ती नजर आ रही है। हर साल की तरह शहर के कुछ नामी स्कूलों में इस बार भी निजी प्रकाशकों की किताबें पाठ्यक्रम में शामिल की गई हैं। लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद हैं और अभिभावकों-बच्चों के बाहर निकलने पर पाबंदी है। इसलिए स्कूल संचालकों ने अपने खुले वाहन किताब-कापियों के साथ सड़कों पर उतार दिए हैं और मनमाने दामों पर किताबें अभिभावकों को दी जा रही हैं।
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तीन से सात हजार में मिल रहा सेट
निजी प्रकाशकों की किताबों के रेट मनमाने हैं। स्कूलों के कमीशन के हिसाब से ये किताबें तीन से सात हजार रुपये में दी जा रही हैं। किताबों के सेट के साथ कापियां भी स्कूल की ही तरफ से दी जा रही हैं। इन पर उनके नाम भी प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा निजी स्कूलों ने बच्चों के रोज के होमवर्क के लिए एलमनेक (होमवर्क डायरी) लगाई है। इसमें हर दिन की गतिविधि दर्ज की जा रही है। इसके दाम 200 से 400 रुपये वसूले जा रहे हैं।
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ठगे जाते हैं अभिभावक, कार्रवाई करे शिक्षा विभाग
निजी स्कूलों का हर साल का खेल है। वे निजी प्रकाशकों की किताबें लगाकर अभिभावकों से मोटी रकम कमाते हैं। जबकि शिक्षा विभाग एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने की बात करता है। यह बड़ा नेटवर्क शिक्षा विभाग पर भारी पड़ रहा है। अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी कुछ नहीं कर रहे हैं। विभाग को इनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
- यशवंत, अध्यक्ष, अभिभावक संघ।
निजी प्रकाशकों की किताबें पूरी तरह बैन हैं। स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई जाएंगी। स्कूल संचालक अपनी मर्जी नहीं चला सकते। यदि कोई स्कूल सड़कों पर किताब बेच रहा है तो इस बारे में उपायुक्त कार्रवाई कर सकते हैं।

- परमेश्वरी हुड्डा, जिला शिक्षा अधिकारी।
लॉकडाउन में बगैर अनुमति कोई वाहन सड़क पर नहीं चलेगा। यदि कोई वाहन बगैर अनुमति सड़क पर मिलता है तो कार्रवाई की जाएगी। किताब बेचने की अनुमति हम नहीं देते हैं।
- आरएस वर्मा, उपायुक्त।

लॉक डाउन में विद्यार्थीयों की आनलाईन पढ़ाई के दौरान किताबों और कापियों की जरूरत पड़ रही है इस लिए

लॉक डाउन में विद्यार्थीयों की आनलाईन पढ़ाई के दौरान किताबों और कापियों की जरूरत पड़ रही है इस लिए- फोटो : RohtakCity

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