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सम्मान भत्ते के लिए बुजुर्ग काट रहे समाज कल्याण विभाग के चक्कर
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कोरोना संक्रमण ने हर वर्ग को प्रभावित किया है। उम्र के आखिरी पड़ाव में सम्मान भत्ते के लिए म्हारे बुजुर्ग इन दिनों समाज कल्याण के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन अधिकारी अब उम्र जांचने के लिए कैंप नहीं लगाते। अधिकारियों का कहना है कि ऊपर से आदेश आने तक कैंप नहीं लगेगा। बुजुर्गों का मामला है कोई संक्रमित हो गया तो जिम्मेदारी कौन लेगा। हालांकि अनलॉक के बाद से सभी सरकारी कार्यालयों में काम शुरू हो चुका है, लेकिन विभाग में अधिकारियों से लेकर सीएमओ की टीम कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि नए साल पर ही दोबारा बुढ़ापा पेंशन यानी सम्मान भत्ते के लिए बुजुर्गों की उम्र जांची जाएगी।
जब तक कोरोना संक्रमण बढ़ेगा और उच्चाधिकारियों की ओर आदेश नहीं आ जाते कैंप नहीं लगाया जाएगा। बुजुर्गों का मामला है इसलिए कोई रिस्क नहीं ले सकते। कुछ बुजुर्ग कागजात जमा कराने आते हैं, उन्हें बता दिया जाता है, कैंप लगेगा तब बुला लेंगे।
- राजेश मलिक, सहायक अधिकारी।
एक साल से पेंशन बनवाने के लिए चक्कर काट रही हूं। पहले अधिकारी बोलते थे कागज पूरे नहीं है, अब बोल रहे हैं ताई दोबारा कैंप लगना शुरू होगा तब आना।
- ओमपति, महम
पिछले डेढ़ साल से विभाग के चक्कर काट रहे हैं। बड़े बेटे की उम्र 47 साल है। ऐसे में उनकी उम्र 60 के पार होना स्वाभाविक है, लेकिन दस्तावेज है नहीं और डॉक्टर उनकी फिजिकल फिटनेस देखकर अंदाजा नहीं लगा पाए। अब यह कोरोना शुरू हो गया पता नहीं कब पेंशन बनेंगी।
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राममेहर, गांव चिड़ी
कई बार विभाग के चक्कर काट चुके हैं। लेकिन पेंशन नहीं बन पाई। ऐसे में कोरोना काल ने उनकी मुश्किलों को ओर बढ़ा दिया है। काम-धंधा भी ठप पड़ा है और गुजारे के लिए पेंशन भी नहीं मिल रही। अधिकारी बोलते हैं बाबा कैंप लगेगा तब आना कागज जमा कर लिए हैं।
- महेंद्र, सीसर
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जब तक कोरोना संक्रमण बढ़ेगा और उच्चाधिकारियों की ओर आदेश नहीं आ जाते कैंप नहीं लगाया जाएगा। बुजुर्गों का मामला है इसलिए कोई रिस्क नहीं ले सकते। कुछ बुजुर्ग कागजात जमा कराने आते हैं, उन्हें बता दिया जाता है, कैंप लगेगा तब बुला लेंगे।
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- राजेश मलिक, सहायक अधिकारी।
एक साल से पेंशन बनवाने के लिए चक्कर काट रही हूं। पहले अधिकारी बोलते थे कागज पूरे नहीं है, अब बोल रहे हैं ताई दोबारा कैंप लगना शुरू होगा तब आना।
- ओमपति, महम
पिछले डेढ़ साल से विभाग के चक्कर काट रहे हैं। बड़े बेटे की उम्र 47 साल है। ऐसे में उनकी उम्र 60 के पार होना स्वाभाविक है, लेकिन दस्तावेज है नहीं और डॉक्टर उनकी फिजिकल फिटनेस देखकर अंदाजा नहीं लगा पाए। अब यह कोरोना शुरू हो गया पता नहीं कब पेंशन बनेंगी।
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राममेहर, गांव चिड़ी
कई बार विभाग के चक्कर काट चुके हैं। लेकिन पेंशन नहीं बन पाई। ऐसे में कोरोना काल ने उनकी मुश्किलों को ओर बढ़ा दिया है। काम-धंधा भी ठप पड़ा है और गुजारे के लिए पेंशन भी नहीं मिल रही। अधिकारी बोलते हैं बाबा कैंप लगेगा तब आना कागज जमा कर लिए हैं।
- महेंद्र, सीसर