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श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से 6 माह सूर्योदय नहीं होने दिया : कथा व्यास
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23सीटीके21..सनातन धर्म हनुमान मंदिर में सोमवार को श्रीमद् भागवत पुराण कथा श्रवण करने पहुंचे श्र
रोहतक। श्रीमद्भागवत पुराण कथा के छठे दिन सुभाष नगर स्थित सनातन धर्म हनुमान मंदिर में काफी संख्या में श्रद्ालु व्यास राधा प्रिया ज्योति के प्रवचन सुनने पहुंचे।
ज्योति ने कहा, माने तो आज ही के दिन भगवान श्री कृष्ण ने महारास लीला रचाई थी। कहते हैं तब भगवान कृष्ण ने अपनी योगमाया से 6 माह तक रात रोके रखी। इस कारण छह माह तक सूर्योदय नहीं हुआ। मथुरा के पंडितों का कहना है कि चंद्र सरोवर कृष्ण की महारास लीला का गवाह है। मथुरा गमन की कथा सुनाते हुए राधा प्रिया ने बताया कि कृष्ण ने बाबा नंद और माता यशोदा से कहा, अब आप अपने गाय-बछड़े संभालो, हमें तो मथुरा जाना है। कंस मामा का निमंत्रण आया है। हमने अब तक यहां बहुत आनंद लिया। मन भर-भर के आपका दही माखन खाया। मथुरा गमन की बात सुनते ही नंदबाबा और यशोदा मैया व्याकुल हो गए, तड़प कर बोले- नहीं लाडले ये सब तुम्हारा ही है। ये गैया, दूध-दही माखन हमारा कुछ नहीं है, सब कुछ तुम्हारा ही है लला। यहीं रहकर इनका उपभोग करो। तुम्हारे बिना हम प्राणहीन हैं।
रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा, रुक्मणी श्रीकृष्ण को पसंद करती थीं और उन्हें मन ही मन अपना पति स्वीकार कर चुकी थीं। श्रीकृष्ण को पता चला कि रुक्मणी का विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध किसी ओर के साथ हो रहा है। तब उन्होंने रुक्मणी से विवाह रचा लिया। कहते हैं कि श्रीकृष्ण ने राधा से इसलिए विवाह नहीं किया, क्योंकि दोनों के बीच आध्यात्मिक प्रेम था। वहीं श्रीकृष्ण भजनों पर श्रद्धालुओं नृत्य किया। भागवत कथा अंतिम दिन मंगलवार को सुबह 9:30 बजे प्रारंभ होगी। हवन के बाद लंगर प्रसाद वितरित किया जाएगा।
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ज्योति ने कहा, माने तो आज ही के दिन भगवान श्री कृष्ण ने महारास लीला रचाई थी। कहते हैं तब भगवान कृष्ण ने अपनी योगमाया से 6 माह तक रात रोके रखी। इस कारण छह माह तक सूर्योदय नहीं हुआ। मथुरा के पंडितों का कहना है कि चंद्र सरोवर कृष्ण की महारास लीला का गवाह है। मथुरा गमन की कथा सुनाते हुए राधा प्रिया ने बताया कि कृष्ण ने बाबा नंद और माता यशोदा से कहा, अब आप अपने गाय-बछड़े संभालो, हमें तो मथुरा जाना है। कंस मामा का निमंत्रण आया है। हमने अब तक यहां बहुत आनंद लिया। मन भर-भर के आपका दही माखन खाया। मथुरा गमन की बात सुनते ही नंदबाबा और यशोदा मैया व्याकुल हो गए, तड़प कर बोले- नहीं लाडले ये सब तुम्हारा ही है। ये गैया, दूध-दही माखन हमारा कुछ नहीं है, सब कुछ तुम्हारा ही है लला। यहीं रहकर इनका उपभोग करो। तुम्हारे बिना हम प्राणहीन हैं।
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रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा, रुक्मणी श्रीकृष्ण को पसंद करती थीं और उन्हें मन ही मन अपना पति स्वीकार कर चुकी थीं। श्रीकृष्ण को पता चला कि रुक्मणी का विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध किसी ओर के साथ हो रहा है। तब उन्होंने रुक्मणी से विवाह रचा लिया। कहते हैं कि श्रीकृष्ण ने राधा से इसलिए विवाह नहीं किया, क्योंकि दोनों के बीच आध्यात्मिक प्रेम था। वहीं श्रीकृष्ण भजनों पर श्रद्धालुओं नृत्य किया। भागवत कथा अंतिम दिन मंगलवार को सुबह 9:30 बजे प्रारंभ होगी। हवन के बाद लंगर प्रसाद वितरित किया जाएगा।
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