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Rohtak News: पीजीआई में शीर्ष अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले डाटा एंट्री ऑपरेटर को कारण बताओ नोटिस

Thu, 24 Jul 2025 02:24 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 24 Jul 2025 02:24 AM IST
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Show cause notice to data entry operator who accused top officials of corruption in PGI
माई सिटी रिपोर्टर
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रोहतक। पीजीआई की परचेज शाखा के डाटा एंट्री ऑपरेटर सोनीपत के गढ़ी सिसाना निवासी राजेश के पीजीआई निदेशक समेत छह शीर्ष अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने का मामला दो दिन बाद भी शांत नहीं हो पाया है। संस्थान ने कर्मचारी को झूठा व तथ्यहीन त्यागपत्र वायरल करने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कर्मचारी की इस हरकत को देखते हुए एक मेडिकल बोर्ड का गठन करने के भी आदेश जारी किए हैं। वहीं, इस मामले में बुधवार को डाटा एंट्री ऑपरेटर राजेश और पीजीआई प्रबंधन ने अपनी-अपनी सफाई दी है।
इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ में तबादले के बाद कार्यभार न संभालने व अधिकारियों के आदेश न मानने के लिए कर्मचारी को चार्जशीट करने के आदेश जारी किए थे। इधर, राजेश का दावा है कि उसने अपने इस्तीफे का पत्र वित्त नियंत्रक के गलत मार्गदर्शन में लिखा था। अब नए विभाग में कार्यभार संभाल लिया है। दो दिन पहले लिखे गए इस्तीफे के पत्र को निरस्त समझा जाए।
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पीजीआई के जनसंपर्क प्रभारी ने बताया कि कर्मचारी ने ट्राॅमा सेंटर के इंचार्ज डॉ. राजेश रोहिल्ला के साथ दुर्व्यवहार किया था। वहां अन्य स्टाफ भी उपस्थित था। इस पर कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा गया तो उसने माफी मांग ली। इसके बाद 8 जुलाई को कर्मचारी का तुरंत प्रभाव से नए विभाग में तबादला कर दिया गया।
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इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ की ओर से 15 जुलाई को पीजीआई निदेशक को सूचित किया गया था कि डाटा एंट्री ऑपरेटर राजेश ने कार्यभार नहीं संभाला है। ऐसे में निदेशक ने 16 जुलाई को कर्मचारी के ड्यूटी ज्वाॅइन न करने के लिए चार्जशीट के भी आदेश जारी कर दिए।
चार्जशीट होने का पता लगने पर राजेश ने 21 जुलाई को त्यागपत्र लिखा और निदेशक कार्यालय में छोड़कर चला गया। अपना आईकार्ड भी साथ नहीं लगाया। शाम को ही कर्मचारी ने व्हाट्सएप ग्रुप में एक पत्र वायरल कर दिया। अब 22 जुलाई को कर्मचारी ने नए विभाग में कार्यभार संभाल लिया है।

जनसंपर्क विभाग के इंचार्ज ने बताया कि यह भी पता चला है कि कर्मचारी 12 मार्च 2025 से 24 मार्च 2025 तक मेडिकल लीव पर रहा। इस दौरान उसने मनोरोग विभाग में अपना इलाज कराया और वहां से फिटनेस मिलने पर उसने ड्यूटी ज्वाॅइन की थी। संस्थान के शीर्ष अधिकारियों पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद व निंदनीय हैं।
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