फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Shitala Mata Temple... Pindi continued to be worshiped in place of the idol for 340 years.

Rohtak News: शीतला माता मंदिर... 340 साल तक मूर्ति की जगह होती रही पिंडी की पूजा

Wed, 09 Oct 2024 12:04 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 09 Oct 2024 12:04 AM IST
विज्ञापन
Shitala Mata Temple... Pindi continued to be worshiped in place of the idol for 340 years.
रोहतक। शीतला माता मंदिर का इतिहास 400 से साल से भी पुराना है। मूर्ति के स्थान पर पहले मां की पिंडी की पूजा होती थी। पिंडी के पास 60 वर्ष पहले ही शीतला मां की प्रतिमा स्थापित की गई है। जहां देशभर से श्रद्धालु मां का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आते हैं। 100 साल से ज्यादा पुराना वट वृक्ष आस्था का केंद्र है। लोग बुधवार के दिन धागा लपेटकर दिया जलाते हैं।
विज्ञापन

शीतला सरोवर की मिट्टी को अत्यंत शुभ माना गया है। श्रद्धालु तालाब की मिट्टी निकालकर घर ले जाते हैं। मान्यता है कि मिट्टी घर में रखने से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें नहीं होती। उदासीन परिवार के नौवें महंत थानेश्वर दास मंदिर के मुख्य पुजारी हैं। उन्होंने बताया कि उदासीन गुरु शरणदास महाराज ने यहां मंढ़ी बनवाई थी। तब से उदासीन परिवार पर ही मंदिर की देखरेख का जिम्मा है। वहीं, मंदिर परिसर में 2014 से अखंड ज्योत जलाई जा रही है।
विज्ञापन




मां शीतला की पिंडी को लेकर यह है किंवदंती


मोहल्ला बाबरा के गोरे-बाहिर जोहड़ के पास कुछ बच्चे खेल रहे थे। वे जोहड़ से गारा (मिट्टी) निकालकर बैलगाड़ी बना रहे थे। गाड़ी और बैल तो बना लिए, लेकिन गाड़ीवान बनाने में उनको दिक्कत आ रही थी। पास ही मिट्टी और फूंस की झोपड़ी में एक शिष्य अपने गुरु के सानिध्य में यह सब देखता रहता है। बच्चों के शोर से महात्मा अपनी तपस्या छोड़कर उन्हें शांत रहने लिए कहते हैं। इस पार बच्चे उन्हें गाड़ीवान बनाने का निवेदन करते हैं। इस पर महात्मा गाड़ीवान बना देते हैं। तिनका नुमा चाबुक लगाकर कुटिया की ओर आते हैं तभी चाबुक जैसे बैलों को छूती है तो बैल चलने लगते हैं। यह दृश्य देखकर बच्चे डरकर भागने लगते हैं। बतलाते हैं कि वहां से कोई स्त्री गोबर व कूड़ा तसले में लेकर गुजर रही थी। उससे वह तसला बैलगाड़ी पर गिर गया और वहां एक पिंडी सी बन गई। यह वही स्थान है, जहां आज भी मां की पिंडी है।
विज्ञापन
विज्ञापन




18 से भी ज्यादा देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित



मंदिर परिसर में 18 से ज्यादा प्रतिमाएं स्थापित हैं। शीतला माता, शेरावाली माता, काली मां, चौगान्न माता, बजरंग बली, श्रीकंडा माता, बसंती माता, गोगा पीर, भगवान शिव, पाथरी वाली मां आदि स्थापित हैं। इसके अलावा नगर खेड़ा स्थापित है। किसी भी कार्य की शुरुआत से पहले इसकी पूजा की जाती है।




सप्तमी को हवन, अष्टमी को नौ कन्या पूजन के बाद भंडारा



महंत ने बताया कि शीतला माता मंदिर में सप्तमी को हवन किया जाता है। अष्टमी के दिन कन्या पूजन के बाद दोपहर 12 बजे से भंडारा लगाया जाता है। यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। यहां मुंडन के लिए भी काफी संख्या में श्रद्धालु नवरात्र लगने के दिन से ही प्रदेश के कोने-कोने से आ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed