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एक माह से घर नहीं आईं शेफाली, सुल्तानपुर में कर रहीं अभ्यास

Sun, 16 May 2021 12:37 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 16 May 2021 12:37 AM IST
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Shefali did not come home for a month, practicing in Sultanpur
शेफाली करीब चार माह से सुल्तानपुर में रह रही हैं। वह बीच में एक-दो बार आई है, जिसमें वह मुश्किल से दो दिन ही रुकी थीं। अब तो करीब एक माह से वह आई ही नहीं हैं। लॉकडाउन के दौरान ग्राउंड में अभ्यास नहीं करने जा पा रही हैं। अब वह एक छोटे से क्षेत्र में रहकर ही अभ्यास कर रही है। यह जानकारी शेफाली के पिता संजीव ने शनिवार को अमर उजाला टीम से फोन पर हुई बात में दी।
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विदित है कि रोहतक की सुनारों वाली गली की रहने वाली हरियाणा व देश की शान शेफाली वर्मा वन डे और टेस्ट टीम में पहली बार अपनी जगह बनाने में कामयाब रही हैं। बीसीसीआई ने शुक्रवार रात इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय महिला क्रिकेट टीम का एलान किया है। इसमें शेफाली वर्मा का भी चयन हुआ है। इस दौरे की शुरुआत 16 जून को खेले जाने वाले एकमात्र टेस्ट मैच से होगी, वहीं इसके बाद तीन टी 20 और तीन ही वन डे मैच की सीरीज खेली जानी है।
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सुबह खबर देखने के बाद लगा पता, तभी किया शेफाली को फोन
पिता संजीव वर्मा ने कहा कि बेटी शेफाली के क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में चयन होने का पता शनिवार सुबह खबर देखने के बाद लगा है। खबर देखते ही पूरा परिवार खुशी से झूम उठा और मैंने तभी शेफाली को फोन किया। फोन पर बातचीत के दौरान बेटी को बहुत शुभकामनाएं दीं। साथ ही मैं बीसीसीआई व हरियाणा क्रिकेट बोर्ड का भी धन्यवाद करूंगा, जिन्होंने शेफाली को यह बड़ा मौका दिया। यह पूरे देश के लिए गौरव का क्षण है।
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9 साल की उम्र में शेफाली ने रोहतक के स्टेडियम में देखा था सचिन का रणजी ट्रॉफी मैच
पिता बताते हैं कि नवंबर 2013 में 9 साल की उम्र में शेफाली उनके साथ रोहतक के स्टेडियम में सचिन तेंदुलकर का आखिरी रणजी ट्रॉफी मैच देखा था। इस मैच में सचिन तेंदुलकर को मुंबई को जीत दिलाते देख वो क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हुईं। शेफाली कई इंटरव्यू में तेंदुलकर को अपना आदर्श बता चुकी हैं। वहीं, शेफाली के मुताबिक उनके भाई जिस स्थानीय क्लब क्रिकेट क्लब में खेलते थे, वो उन्हें खेलने का मौका नहीं देते थे, क्योंकि उन्हें अपनी टीम में कोई लड़की नहीं चाहिए थी। पिता ने इसका बहुत ही रचनात्मक समाधान निकाला। उन्होंने शेफाली के बाल कटवाए, जिससे उनके लड़का होने का भ्रम पैदा किया जा सके। एक दिन शेफाली का भाई बीमार हो गया और उन्होंने स्थानीय क्लब में अपने भाई की जगह ले ली। टीम के लिए खेलते हुए शेफाली पहले मैन ऑफ द मैच, फिर टूर्नामेंट में मैन ऑफ द सीरीज बनी थीं।
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