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राधा संग सेल्फी लेंगे कान्हा तो मूषक पर बैठकर आएंगे बप्पा
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Mon, 22 Aug 2016 02:16 AM IST
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श्रीकृष्ण
- फोटो : file photo
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी चार दिन बाद आ रही है तो बच्चों के फ्रेंड गणेशा 14 दिन बाद आएंगे। दोनों के स्वागत को लेकर शहर के मंदिरों की समितियों और गणेश मंडलों ने भी तैयारियां शुरू कर दी है। कहीं कान्हा अपनी राधा के साथ सेल्फी लेते हुए नजर आएंगे तो कहीं बप्पा अपनी सवारी मूषक पर बैठकर आएंगे। जहां 25 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व के लिए आगरा से झांकियां लाई जा रही है।
वहीं, 5 सितंबर को गणेशोत्सव के लिए कोलकाता और दिल्ली से रोहतक के राजा की मूर्तियां लाई जाएंगी। इस बार 52 साल बाद जन्माष्टमी पर अनूठा संयोग बन रहा है। अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र के साथ विशेष संयोग में प्रभु श्रीकृष्ण का जन्म मनाया जाएगा, जो योग द्वापर युग में उनके जन्म के समय थे। यही नहीं, पिछले साल की तरह भक्ति रस में पीओपी मूर्तियों को लेकर प्रशासन कोई बाधा न डाले, इसलिए पंडालों में इको फ्रैंडली और मिट्टी के देवा विराजमान होंगे।
पहले मंदिर और शिव समितियां सावन माह और शिवरात्रि के प्रबंधन में व्यस्त थी, तो अब जन्माष्टमी और गणेशोत्सव की तैयारियों में जुट गई है। भले ही दोनों त्योहार को आने में अभी समय है, लेकिन इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई है। मंदिरों और गणेश पंडालों में बैठकों का दौर जारी है। जिसमें दोनों पर्व को लेकर आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई जा रही है। कोई मिट्टी की मूर्ति की खोज में दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में घूम रहा है तो कोई फूल बंगला बनाने के लिए बंगाल के कारीगरों को बुला रहा है।
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विशेष संयोग में मनेगा कान्हा का जन्म
ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप पाठक ने बताया कि 25 अगस्त को ही जन्माष्टमी मनाई जाएगी, क्योंकि रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का योग इसी दिन बन रहा है। उन्होंने बताया कि इस बार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व 52 साल बाद अनूठा संयोग लेकर आ रहा है। जब माह, तिथि, वार और चंद्रमा की स्थिति वैसी ही बनी है, जैसी कृष्ण जन्म के समय थी।
पाठक ने बताया कि 25 अगस्त को सूर्योदय के साथ ही अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। अष्टमी तिथि 25 अगस्त को रात 8:13 बजे तक रहेगी। इससे पूरे समय अष्टमी तिथि का प्रभाव रहेगा। साथ ही, मध्य रात्रि भगवान के जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग रहेगा। इसलिए कृष्ण जन्माष्टमी भगावन कान्हा के जन्म के समय बनने वाले संयोगों के साथ विशेष फलदायी रहेगी। 24 अगस्त बुधवार की रात 10:13 बजे से अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ के चंद्रमा की स्थिति में हुआ था। इससे पहले ऐसा योग 1958 में बना था। 52 साल बाद ऐसा संयोग दोबारा आया है।
अमृत और सर्वार्थ योग में मनी जन्माष्टमी
वहीं, ज्योतिषाचार्य पंडित ओम प्रकाश ने बताया कि 25 अगस्त को ही श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाया जाएगा। इस बार की जन्माष्टमी अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग में आ रही है। इस दिन काफी संख्या में भक्त व्रत भी रखते हैं। इस व्रत में न तो कुछ खाना होता है और न ही कुछ पीना। इसलिए विशेष संयोगों में कठोर व्रत का पालन करने वाले भक्तों को कान्हा की असीम कृपा मिलेगी।
हर मंदिर में भक्त झुलाएंगे झूला, दुर्गा मंदिर में लगेगी 21 झांकियां
शहर के हर मंदिर में भक्त भगवान कान्हा को झूला झुलाएंगे। इस बार भी दुर्गा भवन मंदिर में जन्माष्टमी पर्व को लेकर खास तैयारियां शुरू हो गई है। बृहस्पतिवार को शाम 7 बजे कार्यक्रम शुरू होगा। जिसमें 21 झांकियां भक्तों के लिए आर्कषण का केंद्र रहेगी। मंदिर के प्रधान ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि आगरा के कारीगरों द्वारा यह सभी झांकियां तैयार की जाएंगी। वे 22 अगस्त को रोहतक में आ रहे हैं। इस बार भी झांकियों में कान्हा के नए अवतार को शामिल किया गया है। अब की बार नौका विहार, कान्हा का राधा के साथ सेल्फी लेना, कान्हा के 52 अवतार, सूरदास को कुएं से निकालते भगवान श्रीकृष्ण, हाथी को हवा में फेंकते कान्हा, गवालों के साथ माखन चोर चुराते और भगवान राम-लक्ष्मण को नाग से मुक्त कराती आदि झांकियां लगाई जाएगी।
78 संघ लाएगा इको फ्रैंडली लाल बाग के राजा
78 संघ परिवार की ओर से 8वां गणोशोत्सव मनाया जा रहा है। इस बार भी दुर्गा भवन मंदिर में पांच से 15 सितंबर तक बड़े पैमाने पर गणेशोत्सव मनाया जाएगा। इसमें दिल्ली से इको फ्रैंडली लाल बाग के राजा की 11 फीट ऊंची मूर्ति लाई जाएगी। साथ में, पांच फीट मूषक रूप में मन्नत पेटी भी विराजमान होगी। संघ के सदस्य निपिन गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में बंगाल के मूर्तिकार द्वारा इको फ्रैंडली मूर्ति बनाई जा रही है। जिसमें मिट्टी के साथ इको फ्रैंडली पेपर और इको रंग ही लगाए जा रहे हैं। इसके लिए मूर्तिकार सर्टिफिकेट भी देगा। गुप्ता ने बताया कि पहली बार गणेशोत्सव में आ रहे भक्तों के साथ पूरे पंडाल का भी करीब 1 करोड़ का बीमा कराया जा रहा है। भक्तों की सुरक्षा को देखते हुए प्रति भक्त का 50 हजार का बीमा कराया जा रहा है। वहीं, पहली बार दिल्ली के म्यूजिकल ग्रुप द्वारा महाराष्ट्रीयन स्टाइल में 11 सितंबर को बप्पा की महाआरती होगी। इस आरती में सात बड़ी ज्योतों द्वारा देवी की महाआरती की जाएगी। इसके अलावा, भक्तों को रक्तदान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, पौधरोपण आदि के लिए प्रेरित भी किया जाएगा।
हुडा कांप्लेक्स में कोलकाता से आएंगे देवा
वहीं, समर्पण यूथ क्लब की ओर से हुडा कांप्लेक्स में 10 दिवसीय गणेशोत्सव मनाया जा रहा है। क्लब के प्रधान बॉबी ने बताया कि इस बार मिट्टी की मूर्ति लाई जा रही है। जिसे विशेष तौर से कोलकाता में मूर्तिकारों द्वारा तैयार कराया जा रहा है। इस गणेशोत्सव में हर दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। जहां बच्चों के लिए डांस तो महिलाओं के लिए मेहंदी की प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी। वहीं, भजन गायक भी बुलाए जा रहे हैं।
मित्र सेवा मंडल में युवा मनाएंगे गणेशोत्सव
मित्र सेवा मंडल की ओर से महाजन पड़ाव में धूमधाम से गणेशोत्सव मनाया जाएगा। इस बार की गणेशोत्सव की कमान युवाओं और बच्चों के हाथ में होगी। इसके लिए दिल्ली से मिट्टी के ही गणेश की प्रतिमा लाई गई है। अब की बार गणेश की प्रतिमा की ऊंचाई थोड़ी कम रखी गई है, ताकि प्रशासन पिछली बार की तरह समस्या पैदा न करें।
गणेश भक्तों की अपील, विघभनहर्ता के कार्य में प्रशासन न डाले बाधा
उधर, गणेश भक्तों ने प्रशासन से अपील की है कि वे इस बार विघभनहर्ता के कार्य में कोई भी बाधा न डाले। उनका कहना है कि पीओपी मूर्तियों को लेकर कोर्ट की ओर से कोई आदेश नहीं आए हैं। फिर भी, प्रशासन द्वारा बेवजह परेशान किया गया। पिछले साल गौकर्ण धाम के तालाब में बप्पा की मूर्तियों का विसर्जन किया गया। यहां तालाब छोटा और पानी कम होने वजह से भक्तों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। पिछली बार की तरह इस बार प्रशासन कोई परेशानी खड़ी न करे। इसलिए बड़ी मशक्कत करते हुए मिट्टी की मूर्तियां बनवाई जा रही है। उनकी प्रशासन से अपील है कि जिन पंडालों में मिट्टी की मूर्तियां विराजमान है, उन्हें अस्थल बोहर की नहर में विसर्जन कार्य करने दें।
पर्यावरण और भक्तों की भावना का रखेंगे ध्यान
गणपति विसर्जन के स्थल को लेकर डीसी या ज्वाइंट कमिश्नर से अभी कोई बातचीत नहीं हुई है। इस मुद्दे पर बात करके ही कोई हल निकाला जाएगा। इससे पहले शहर में लग रहे पंडालों का निरीक्षण करेंगे कि पीओपी या मिट्टी की मूर्तियां कहां लाई जा रही है। अभी गणेश पंडालों की प्रतिनिधियों ओर से भी विसर्जन स्थल को लेकर कोई मांग नहीं आई है। पर, ऐसा रास्ता जरूर निकाला जाएगा। जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे और भक्तों की भावना को भी ठेस न पहुंचे।
- महेंद्रपाल, सीटीएम रोहतक।
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वहीं, 5 सितंबर को गणेशोत्सव के लिए कोलकाता और दिल्ली से रोहतक के राजा की मूर्तियां लाई जाएंगी। इस बार 52 साल बाद जन्माष्टमी पर अनूठा संयोग बन रहा है। अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र के साथ विशेष संयोग में प्रभु श्रीकृष्ण का जन्म मनाया जाएगा, जो योग द्वापर युग में उनके जन्म के समय थे। यही नहीं, पिछले साल की तरह भक्ति रस में पीओपी मूर्तियों को लेकर प्रशासन कोई बाधा न डाले, इसलिए पंडालों में इको फ्रैंडली और मिट्टी के देवा विराजमान होंगे।
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पहले मंदिर और शिव समितियां सावन माह और शिवरात्रि के प्रबंधन में व्यस्त थी, तो अब जन्माष्टमी और गणेशोत्सव की तैयारियों में जुट गई है। भले ही दोनों त्योहार को आने में अभी समय है, लेकिन इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई है। मंदिरों और गणेश पंडालों में बैठकों का दौर जारी है। जिसमें दोनों पर्व को लेकर आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई जा रही है। कोई मिट्टी की मूर्ति की खोज में दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में घूम रहा है तो कोई फूल बंगला बनाने के लिए बंगाल के कारीगरों को बुला रहा है।
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विशेष संयोग में मनेगा कान्हा का जन्म
ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप पाठक ने बताया कि 25 अगस्त को ही जन्माष्टमी मनाई जाएगी, क्योंकि रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का योग इसी दिन बन रहा है। उन्होंने बताया कि इस बार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व 52 साल बाद अनूठा संयोग लेकर आ रहा है। जब माह, तिथि, वार और चंद्रमा की स्थिति वैसी ही बनी है, जैसी कृष्ण जन्म के समय थी।
पाठक ने बताया कि 25 अगस्त को सूर्योदय के साथ ही अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। अष्टमी तिथि 25 अगस्त को रात 8:13 बजे तक रहेगी। इससे पूरे समय अष्टमी तिथि का प्रभाव रहेगा। साथ ही, मध्य रात्रि भगवान के जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग रहेगा। इसलिए कृष्ण जन्माष्टमी भगावन कान्हा के जन्म के समय बनने वाले संयोगों के साथ विशेष फलदायी रहेगी। 24 अगस्त बुधवार की रात 10:13 बजे से अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ के चंद्रमा की स्थिति में हुआ था। इससे पहले ऐसा योग 1958 में बना था। 52 साल बाद ऐसा संयोग दोबारा आया है।
अमृत और सर्वार्थ योग में मनी जन्माष्टमी
वहीं, ज्योतिषाचार्य पंडित ओम प्रकाश ने बताया कि 25 अगस्त को ही श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाया जाएगा। इस बार की जन्माष्टमी अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग में आ रही है। इस दिन काफी संख्या में भक्त व्रत भी रखते हैं। इस व्रत में न तो कुछ खाना होता है और न ही कुछ पीना। इसलिए विशेष संयोगों में कठोर व्रत का पालन करने वाले भक्तों को कान्हा की असीम कृपा मिलेगी।
हर मंदिर में भक्त झुलाएंगे झूला, दुर्गा मंदिर में लगेगी 21 झांकियां
शहर के हर मंदिर में भक्त भगवान कान्हा को झूला झुलाएंगे। इस बार भी दुर्गा भवन मंदिर में जन्माष्टमी पर्व को लेकर खास तैयारियां शुरू हो गई है। बृहस्पतिवार को शाम 7 बजे कार्यक्रम शुरू होगा। जिसमें 21 झांकियां भक्तों के लिए आर्कषण का केंद्र रहेगी। मंदिर के प्रधान ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि आगरा के कारीगरों द्वारा यह सभी झांकियां तैयार की जाएंगी। वे 22 अगस्त को रोहतक में आ रहे हैं। इस बार भी झांकियों में कान्हा के नए अवतार को शामिल किया गया है। अब की बार नौका विहार, कान्हा का राधा के साथ सेल्फी लेना, कान्हा के 52 अवतार, सूरदास को कुएं से निकालते भगवान श्रीकृष्ण, हाथी को हवा में फेंकते कान्हा, गवालों के साथ माखन चोर चुराते और भगवान राम-लक्ष्मण को नाग से मुक्त कराती आदि झांकियां लगाई जाएगी।
78 संघ लाएगा इको फ्रैंडली लाल बाग के राजा
78 संघ परिवार की ओर से 8वां गणोशोत्सव मनाया जा रहा है। इस बार भी दुर्गा भवन मंदिर में पांच से 15 सितंबर तक बड़े पैमाने पर गणेशोत्सव मनाया जाएगा। इसमें दिल्ली से इको फ्रैंडली लाल बाग के राजा की 11 फीट ऊंची मूर्ति लाई जाएगी। साथ में, पांच फीट मूषक रूप में मन्नत पेटी भी विराजमान होगी। संघ के सदस्य निपिन गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में बंगाल के मूर्तिकार द्वारा इको फ्रैंडली मूर्ति बनाई जा रही है। जिसमें मिट्टी के साथ इको फ्रैंडली पेपर और इको रंग ही लगाए जा रहे हैं। इसके लिए मूर्तिकार सर्टिफिकेट भी देगा। गुप्ता ने बताया कि पहली बार गणेशोत्सव में आ रहे भक्तों के साथ पूरे पंडाल का भी करीब 1 करोड़ का बीमा कराया जा रहा है। भक्तों की सुरक्षा को देखते हुए प्रति भक्त का 50 हजार का बीमा कराया जा रहा है। वहीं, पहली बार दिल्ली के म्यूजिकल ग्रुप द्वारा महाराष्ट्रीयन स्टाइल में 11 सितंबर को बप्पा की महाआरती होगी। इस आरती में सात बड़ी ज्योतों द्वारा देवी की महाआरती की जाएगी। इसके अलावा, भक्तों को रक्तदान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, पौधरोपण आदि के लिए प्रेरित भी किया जाएगा।
हुडा कांप्लेक्स में कोलकाता से आएंगे देवा
वहीं, समर्पण यूथ क्लब की ओर से हुडा कांप्लेक्स में 10 दिवसीय गणेशोत्सव मनाया जा रहा है। क्लब के प्रधान बॉबी ने बताया कि इस बार मिट्टी की मूर्ति लाई जा रही है। जिसे विशेष तौर से कोलकाता में मूर्तिकारों द्वारा तैयार कराया जा रहा है। इस गणेशोत्सव में हर दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। जहां बच्चों के लिए डांस तो महिलाओं के लिए मेहंदी की प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी। वहीं, भजन गायक भी बुलाए जा रहे हैं।
मित्र सेवा मंडल में युवा मनाएंगे गणेशोत्सव
मित्र सेवा मंडल की ओर से महाजन पड़ाव में धूमधाम से गणेशोत्सव मनाया जाएगा। इस बार की गणेशोत्सव की कमान युवाओं और बच्चों के हाथ में होगी। इसके लिए दिल्ली से मिट्टी के ही गणेश की प्रतिमा लाई गई है। अब की बार गणेश की प्रतिमा की ऊंचाई थोड़ी कम रखी गई है, ताकि प्रशासन पिछली बार की तरह समस्या पैदा न करें।
गणेश भक्तों की अपील, विघभनहर्ता के कार्य में प्रशासन न डाले बाधा
उधर, गणेश भक्तों ने प्रशासन से अपील की है कि वे इस बार विघभनहर्ता के कार्य में कोई भी बाधा न डाले। उनका कहना है कि पीओपी मूर्तियों को लेकर कोर्ट की ओर से कोई आदेश नहीं आए हैं। फिर भी, प्रशासन द्वारा बेवजह परेशान किया गया। पिछले साल गौकर्ण धाम के तालाब में बप्पा की मूर्तियों का विसर्जन किया गया। यहां तालाब छोटा और पानी कम होने वजह से भक्तों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। पिछली बार की तरह इस बार प्रशासन कोई परेशानी खड़ी न करे। इसलिए बड़ी मशक्कत करते हुए मिट्टी की मूर्तियां बनवाई जा रही है। उनकी प्रशासन से अपील है कि जिन पंडालों में मिट्टी की मूर्तियां विराजमान है, उन्हें अस्थल बोहर की नहर में विसर्जन कार्य करने दें।
पर्यावरण और भक्तों की भावना का रखेंगे ध्यान
गणपति विसर्जन के स्थल को लेकर डीसी या ज्वाइंट कमिश्नर से अभी कोई बातचीत नहीं हुई है। इस मुद्दे पर बात करके ही कोई हल निकाला जाएगा। इससे पहले शहर में लग रहे पंडालों का निरीक्षण करेंगे कि पीओपी या मिट्टी की मूर्तियां कहां लाई जा रही है। अभी गणेश पंडालों की प्रतिनिधियों ओर से भी विसर्जन स्थल को लेकर कोई मांग नहीं आई है। पर, ऐसा रास्ता जरूर निकाला जाएगा। जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे और भक्तों की भावना को भी ठेस न पहुंचे।
- महेंद्रपाल, सीटीएम रोहतक।