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Rohtak News: सरिता ने घर में बनाए खाद्य उत्पाद, बन रहे लोगों की पसंद
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। बाजार ही नहीं बल्कि घर में बनाए गए खाद्य उत्पाद भी कभी-कभी लोगों को इतने पसंद आते हैं कि वे ही रोजगार का जरिया बन जाते हैं। ऐसा ही उदाहरण इंदिरा काॅलोनी की सरिता देवी बनी हुई हैं। बिहार के मधुबनी जिले से करीब 18 साल पहले सरिता का परिवार रोहतक में आकर रहने लगा और तभी यहां रह रहा है।
सरिता बताती है कि लॉकडाउन में जब सब घरों में ही रह रहे थे तो एक दिन उन्होंने घर पर ही खाद्य उत्पाद बनाए। उनके जानकारों ने भी खाया और खूब पसंद किया। इसके साथ ही उन्होंने इसे स्वरोजगार बनाने की सलाह भी दे दी।
इसके बाद सरिता ने भी इसे स्वरोजगार का जरिया बनाते हुए काम शुरू कर दिया। सत्तू, बेसन, मसाले, अचार, चावल आटा, ठेकुआ आदि उत्पादों को परंपरागत तरीकों से घरेलू स्तर पर तैयार कर इसे स्वरोजगार के रूप में अपनाया है।
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रोहतक में 55 हजार से अधिक संख्या में पूर्वांचल के लोग रहते हैं। इन खाद्य पदार्थों को स्थानीय लोग भी पसंद कर रहे हैं। वे इस इन उत्पादों से 10 हजार रुपये प्रति माह आमदनी कर रही हैं। वह कहती हैं कि आत्मनिर्भर बनने के लिए अपना काम शुरू किया।
12वीं पास सरिता यहां 2018 में यहां के एंजेल स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनीं और तभी इन खाद्य उत्पादों को तैयार करने के लिए दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने प्रशासन के स्तर पर आयोजित की जाने वाली प्रदर्शनियों में भी खाद्य उत्पादों के स्टॉल लगाए हैं। जिन पर आने वाले लोगों ने इनकी खूब सराहना की है।
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रोहतक। बाजार ही नहीं बल्कि घर में बनाए गए खाद्य उत्पाद भी कभी-कभी लोगों को इतने पसंद आते हैं कि वे ही रोजगार का जरिया बन जाते हैं। ऐसा ही उदाहरण इंदिरा काॅलोनी की सरिता देवी बनी हुई हैं। बिहार के मधुबनी जिले से करीब 18 साल पहले सरिता का परिवार रोहतक में आकर रहने लगा और तभी यहां रह रहा है।
सरिता बताती है कि लॉकडाउन में जब सब घरों में ही रह रहे थे तो एक दिन उन्होंने घर पर ही खाद्य उत्पाद बनाए। उनके जानकारों ने भी खाया और खूब पसंद किया। इसके साथ ही उन्होंने इसे स्वरोजगार बनाने की सलाह भी दे दी।
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इसके बाद सरिता ने भी इसे स्वरोजगार का जरिया बनाते हुए काम शुरू कर दिया। सत्तू, बेसन, मसाले, अचार, चावल आटा, ठेकुआ आदि उत्पादों को परंपरागत तरीकों से घरेलू स्तर पर तैयार कर इसे स्वरोजगार के रूप में अपनाया है।
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रोहतक में 55 हजार से अधिक संख्या में पूर्वांचल के लोग रहते हैं। इन खाद्य पदार्थों को स्थानीय लोग भी पसंद कर रहे हैं। वे इस इन उत्पादों से 10 हजार रुपये प्रति माह आमदनी कर रही हैं। वह कहती हैं कि आत्मनिर्भर बनने के लिए अपना काम शुरू किया।
12वीं पास सरिता यहां 2018 में यहां के एंजेल स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनीं और तभी इन खाद्य उत्पादों को तैयार करने के लिए दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने प्रशासन के स्तर पर आयोजित की जाने वाली प्रदर्शनियों में भी खाद्य उत्पादों के स्टॉल लगाए हैं। जिन पर आने वाले लोगों ने इनकी खूब सराहना की है।