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Rohtak News: पोलैंड में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स फाइट में चुनौती देंगे संग्राम सिंह

Fri, 05 Sep 2025 02:59 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Fri, 05 Sep 2025 02:59 AM IST
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Sangram Singh will challenge in a mixed martial arts fight in Poland
रोहतक के प्रोफेशनल रेसलर संग्राम सिंह।
संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहतक। फिट इंडिया आइकन और कॉमनवेल्थ हैवीवेट चैंपियन संग्राम सिंह मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) में वापसी के लिए तैयार हैं। रोहतक के मदीना गांव के 40 वर्षीय पहलवान संग्राम सिंह दिसंबर में पोलैंड में होने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में 83-90 किलोग्राम भारवर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगे। अभी वह मुंबई में रह रहे हैं।
दुनिया के पहले फाइटर जिन्होंने 40 साल की उम्र में एमएमए में हिस्सा लिया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एमएमए फाइट जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष पहलवान बने थे। वह एक बार फिर मुकाबले के लिए तैयार हैं। इसके लिए वह फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम व दुबई में जाकर तैयारी करेंगे।
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जॉर्जिया के तिब्लिसी में अपने एमएमए डेब्यू में संग्राम सिंह ने पाकिस्तानी फाइटर अली रजा को सिर्फ 90 सेकंड में हराकर एक नया रिकॉर्ड बनाया था। यह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में किसी भारतीय फाइटर की ओर से 93 किलोग्राम भारवर्ग में सबसे तेज जीत का रिकॉर्ड है। इस शानदार जीत ने उन्हें उन चुनिंदा फाइटर्स की श्रेणी में लाकर खड़ा किया है।
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संग्राम ने कहा कि जब मैं 40 की उम्र में जॉर्जिया में रिंग में उतरा था तो मैं सिर्फ अपने लिए नहीं लड़ रहा था। मैं अपने 20, 30 और 40 की उम्र के हर उस सपने देखने वाले को यह दिखाना चाहता था कि उनका समय अभी भी बाकी है। यह पोलैंड टूर्नामेंट मेरा दूसरा अध्याय है, न कि अंतिम।





रुमेटाइड आर्थराइटिस की बीमारी थी जो लगभग लाइलाज मानी जाती है



संग्राम सिंह ने बताया कि बचपन में एक गंभीर बीमारी थी। तीन-साढ़े तीन साल की उम्र में मेरे पैरों में ऐसा दर्द शुरू हुआ कि मैं हाथ से मुंह तक नहीं धो पाता था। कच्चा घर था, कमजोर सेहत थी, पेट में कीड़े थे। दवाइयों का भी असर नहीं होता था।
डॉक्टरों ने कहा था कि मैं ज्यादा दिन नहीं जी पाऊंगा और जी भी गया तो चल-फिर नहीं सकूंगा। रुमेटाइड आर्थराइटिस बीमारी लगभग लाइलाज मानी जाती है। डॉक्टरों ने मना किया कि इस बच्चे की मालिश मत करो, हड्डियां टूट सकती हैं। उन्होंने कहा कि मेरी मां ने हार नहीं मानी। मां दिन में 15 बार मालिश करती थीं। बिना थके, बिना डिगे उनका स्पर्श, विश्वास ही मेरी असली दवा बना। मैंने खुद से लड़ाई लड़ी, अपने शरीर से, किस्मत से और धीरे-धीरे खुद को खड़ा किया।




युवाओं के लिए संदेश दिया
संग्राम सिंह ने कहा कि यह उन युवा एथलीटों के लिए एक संदेश भी है जो अक्सर एक निश्चित उम्र तक सफलता हासिल करने का दबाव महसूस करते हैं। कहा कि मैं चाहता हूं कि जब लोग मुझे पोलैंड में फाइट करते देखें तो उन्हें सिर्फ एक खिलाड़ी न दिखे बल्कि संभावना दिखे। आप चाहे 20 के हों या 40 वर्ष के, सपनों को पूरा करने के लिए कभी देर नहीं होती।


संग्राम सिंह की उपलब्धियां
डब्लूडब्लूपी कॉमनवेल्थ चैंपियन, 2012 के (डब्लूडब्लूपी) वर्ल्ड बेस्ट प्रोफेशनल रेसलर, हरियाणा केसरी का खिताब। रांची में 2003 में राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। 2005 हंगरी में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। 2006 में दक्षिण अफ्रीका में हुई कुश्ती चैंपियनशिप और 2007 में अखिल भारतीय ओपन कुश्ती प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।
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