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अखाड़े में पहलवानों को दूध और घी मिलता देख म्हारा संग्राम भी बना रेसलर
ब्यूरो/अमर उजाला, विनीत तोमर
Updated Sun, 30 Apr 2017 02:05 AM IST
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इंटरनेशनल रेसलर संग्राम सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
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एक मासूम जो अपने पैरों पर ठीक से चल भी नहीं पाता था। उसने अखाड़े में पहलवानों को दूध और घी मिलते हुए देखा। फिर क्या था? खाने-पीने के शौकीन इस मासूम ने अखाड़े में उतरकर ललकार लगा दी कि मैं भी पहलवान बनूंगा। सभी ने मजाक उड़ाया, लेकिन कुछ वर्षों बाद यहीं बच्चा न केवल नेशनल चैंपियन बना, बल्कि दो साल पहले दक्षिण अफ्रीका में डेथ वारंट साइन कर ‘मौत के रिंग का किंग’ का खिताब भी जीता। जी हां, यहां बात हो रही है मदीना गांव में पले संग्राम सिंह की। आम इंसान से शख्सियत बने संग्राम आज भी अपने गांव की गलियां, दोस्तों के साथ मौज-मस्ती और मां की पिटाई बहुत याद करते हैं। पेश है रेसलर और अभिनेता बने संग्राम सिंह से अमर उजाला के साथ हुई विशेष बातचीत के कुछ अंश।
11वीं में कंपार्टमेंट क्लीयर करने के लिए भर दी थी दो कॉपियां
संग्राम सिंह की 10वीं की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में हुई। 11वीं में बहु अकबरपुर के स्कूल में एडमिशन लिया, यहां कंपार्टमेंट आ गई। बकौल संग्राम, उनकी लिखाई इतनी गंदी थी कि उन्हें खुद भी पता नहीं चलता था कि क्या लिख दिया। संग्राम ने कंपार्टमेंट क्लीयर करने के लिए पेपर में दो कॉपी भर दी, हालांकि इसके बाद भी पासिंग मार्क्स ही मिले। 12वीं के बाद रोहतक के जाट कॉलेज में आ गए। हर रोज वह बस से लटक कर कॉलेज में आते थे।
सीरियल देखने दूसरों के घर जाते, लौटते तो घर में पीटे जाते
संग्राम ने बताया कि गांव में सरदार जी की गोल गप्पे की दुकान थी, जो पांच पैसे में गोल गप्पे के साथ पानी फ्री देते थे। अक्सर गोल गप्पे न लेकर फ्री का पानी पीकर वहां से निकल जाते थे। घर में टीवी नहीं होने के कारण शक्तिमान, रामायण और कृष्णा सीरियल देखने के लिए गांव में किसी के भी घर पहुंच जाते थे। कई बार वहीं पर सो जाते थे, जिसके बाद घर में पिटाई होती।
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एक रुपये का पहला दंगल हारे, बाद में एक करोड़ की कुश्ती जीती
संग्राम बचपन में काफी बीमार हो गए थे, यहां तक कि उनके पैरों ने काम करना बंद कर दिया था। एक दिन वह गांव के अखाड़े में पहुंच गए, यहां पहलवानों को घी और दूध मिलता देखा। इसके बाद से उन्होंने ठान लिया कि पहलवान ही बनना है। हालांकि यह सफर बेहद कठिन रहा। अक्सर लोग मजाक उड़ाते थे कि जो ठीक से चल भी नहीं पाता वह क्या पहलवान बनेगा? हालांकि हिम्मत नहीं हारी और प्रैक्टिस शुरू कर दी। पहली कुश्ती एक रुपये की लड़ी, जिसमें हार का सामना करना पड़ा। सामने वाले पहलवान ने इतनी पिटाई की कि पूरी रात मां ने उनकी सिकाई की और डांट भी लगाई। 2003 में नेशनल चैंपियन बने। इसके बाद ढेरों चैंपियनशिप में मेडल जीते। दो साल पहले दक्षिण अफ्रीका में डेथ वारंट साइन करने वाले वह देश के पहले पहलवान बने थे, जिन्होंने इसमें एक करोड़ की कुश्ती राशि जीती थी। संग्राम सरवाइवर इंडिया शो से लेकर कई अन्य शो कर चुके हैं और कई फिल्मों में भी भूमिका निभा चुके हैं।
हर समय याद आती है मां की सीख
संग्राम का कहना है कि उनकी मां ने एक दिन सीख दी थी कि हर रोज एक ही जगह पर टिका रहेगा तो जिंदगी में क्या करेगा? कुछ व्यक्ति इतिहास का हिस्सा बनने आते हैं और कुछ इतिहास बनाने के लिए।
कभी पायल को दी थी लिफ्ट, इस वर्ष बनेगी जीवनसंगिनी
रेसलर और अभिनेता संग्राम सिंह बताते हैं कि कुछ साल पहले वह आगरा से वापस लौट रहे थे। बीच रास्ते में अभिनेत्री पायल रोहतगी की गाड़ी खराब हो गई थी। उन्होंने संग्राम से लिफ्ट ली। इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी और इस साल के आखिर तक दोनों शादी के बंधन में बंध जाएंगे।
23 लड़के और लड़कियां ले रखी हैैं गोद
संग्राम के परिवार में उनके माता-पिता, बड़े भाई-भाभी और दो छोटे बच्चे हैं। रेसलिंग और अभिनेता के साथ-साथ संग्राम समाजसेवा में भी आगे रहते हैं। इसीलिए उन्होंने 16 लड़कियां और सात लड़के गोद ले रखे हैं। इनकी पढ़ाई से लेकर खेलकूद तक का पूरा खर्च वह उठाते हैं।
संदेश : आगे बढ़ो, सफलता जरूर मिलेगी
जीवन में कोई भी काम मुश्किल नहीं होता। लक्ष्य निर्धारित करने के बाद युवा आगे बढ़े तो उसे सफलता जरूर मिलेगी। कड़ी मेहनत से किए गए काम का फल एक न एक दिन मिलेगा। इसीलिए व्यक्ति को कभी भी निराश नहीं होना चाहिए।
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11वीं में कंपार्टमेंट क्लीयर करने के लिए भर दी थी दो कॉपियां
संग्राम सिंह की 10वीं की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में हुई। 11वीं में बहु अकबरपुर के स्कूल में एडमिशन लिया, यहां कंपार्टमेंट आ गई। बकौल संग्राम, उनकी लिखाई इतनी गंदी थी कि उन्हें खुद भी पता नहीं चलता था कि क्या लिख दिया। संग्राम ने कंपार्टमेंट क्लीयर करने के लिए पेपर में दो कॉपी भर दी, हालांकि इसके बाद भी पासिंग मार्क्स ही मिले। 12वीं के बाद रोहतक के जाट कॉलेज में आ गए। हर रोज वह बस से लटक कर कॉलेज में आते थे।
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सीरियल देखने दूसरों के घर जाते, लौटते तो घर में पीटे जाते
संग्राम ने बताया कि गांव में सरदार जी की गोल गप्पे की दुकान थी, जो पांच पैसे में गोल गप्पे के साथ पानी फ्री देते थे। अक्सर गोल गप्पे न लेकर फ्री का पानी पीकर वहां से निकल जाते थे। घर में टीवी नहीं होने के कारण शक्तिमान, रामायण और कृष्णा सीरियल देखने के लिए गांव में किसी के भी घर पहुंच जाते थे। कई बार वहीं पर सो जाते थे, जिसके बाद घर में पिटाई होती।
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एक रुपये का पहला दंगल हारे, बाद में एक करोड़ की कुश्ती जीती
संग्राम बचपन में काफी बीमार हो गए थे, यहां तक कि उनके पैरों ने काम करना बंद कर दिया था। एक दिन वह गांव के अखाड़े में पहुंच गए, यहां पहलवानों को घी और दूध मिलता देखा। इसके बाद से उन्होंने ठान लिया कि पहलवान ही बनना है। हालांकि यह सफर बेहद कठिन रहा। अक्सर लोग मजाक उड़ाते थे कि जो ठीक से चल भी नहीं पाता वह क्या पहलवान बनेगा? हालांकि हिम्मत नहीं हारी और प्रैक्टिस शुरू कर दी। पहली कुश्ती एक रुपये की लड़ी, जिसमें हार का सामना करना पड़ा। सामने वाले पहलवान ने इतनी पिटाई की कि पूरी रात मां ने उनकी सिकाई की और डांट भी लगाई। 2003 में नेशनल चैंपियन बने। इसके बाद ढेरों चैंपियनशिप में मेडल जीते। दो साल पहले दक्षिण अफ्रीका में डेथ वारंट साइन करने वाले वह देश के पहले पहलवान बने थे, जिन्होंने इसमें एक करोड़ की कुश्ती राशि जीती थी। संग्राम सरवाइवर इंडिया शो से लेकर कई अन्य शो कर चुके हैं और कई फिल्मों में भी भूमिका निभा चुके हैं।
हर समय याद आती है मां की सीख
संग्राम का कहना है कि उनकी मां ने एक दिन सीख दी थी कि हर रोज एक ही जगह पर टिका रहेगा तो जिंदगी में क्या करेगा? कुछ व्यक्ति इतिहास का हिस्सा बनने आते हैं और कुछ इतिहास बनाने के लिए।
कभी पायल को दी थी लिफ्ट, इस वर्ष बनेगी जीवनसंगिनी
रेसलर और अभिनेता संग्राम सिंह बताते हैं कि कुछ साल पहले वह आगरा से वापस लौट रहे थे। बीच रास्ते में अभिनेत्री पायल रोहतगी की गाड़ी खराब हो गई थी। उन्होंने संग्राम से लिफ्ट ली। इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी और इस साल के आखिर तक दोनों शादी के बंधन में बंध जाएंगे।
23 लड़के और लड़कियां ले रखी हैैं गोद
संग्राम के परिवार में उनके माता-पिता, बड़े भाई-भाभी और दो छोटे बच्चे हैं। रेसलिंग और अभिनेता के साथ-साथ संग्राम समाजसेवा में भी आगे रहते हैं। इसीलिए उन्होंने 16 लड़कियां और सात लड़के गोद ले रखे हैं। इनकी पढ़ाई से लेकर खेलकूद तक का पूरा खर्च वह उठाते हैं।
संदेश : आगे बढ़ो, सफलता जरूर मिलेगी
जीवन में कोई भी काम मुश्किल नहीं होता। लक्ष्य निर्धारित करने के बाद युवा आगे बढ़े तो उसे सफलता जरूर मिलेगी। कड़ी मेहनत से किए गए काम का फल एक न एक दिन मिलेगा। इसीलिए व्यक्ति को कभी भी निराश नहीं होना चाहिए।