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Rohtak News: रोहतक की कोरियोग्राफर मालविका पंडित ने वहन किया राज्य गीत का खर्च
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पारस।
रोहतक। जय-जय-जय हरियाणा.. राज्य गीत पूरी तरह निशुल्क बनाया गया। इसे तैयार करने वाले कलाकारों ने किसी तरह का शुल्क या मेहनताना नहीं लिया है। रोहतक की कोरियोग्राफर मालविका पंडित ने स्टूडियो, गीत की मिक्सिंग और अन्य तकनीकी कार्य के लिए खर्च हुए 80 हजार रुपये भी खुद वहन किए हैं। कलाकारों ने गीत तैयार करने के लिए निस्वार्थ भाव से काम किया है। अमर उजाला से हुई बातचीत में कोरियोग्राफर मालविका पंडित ने यह बात साझा की।
रोहतक के मॉडल टाउन निवासी मालविका पंडित ने कहा कि राज्य गीत तैयार करने में कलाकारों ने अपनी कला का बेहतरीन प्रदर्शन किया है। कलाकारों ने अपना मेहनताना तक नहीं लिया है। सभी ने समाज व प्रदेश हित में राज्य गीत के लिए निशुल्क सेवा दी है। इसके 10 से 12 सहयोगी कलाकार भी शामिल हैं। उनका यह सहयोग हमेशा याद रहेगा। पिछले चार साल से यह गीत तैयार करने में जितनी मेहनत की है, वह अब सफल हुई। राज्य गीत न केवल अनेक बार लिखा गया, बल्कि इसका संगीत व गायन भी कई बार बदला गया है। यही नहीं, हर व्यक्ति ने अपने स्तर पर गहन शोध किया। इसके बाद ही बेहतरीन गीत तैयार कर पाए। इसमें कम से कम समय व शब्दों में अपनी बात कही गई है। यह भी हरियाणावी अंदाज व संगीत के जरिए। इसका मकसद इसे लोगों के दिलों से जोड़ना रहा।
सरकार ने आमंत्रित किए थे आवेदन
पिछले करीब चार साल से राज्य गीत तैयार करने का प्रयास चल रहा था। राज्य गीत के लिए सरकार ने आवेदन आमंत्रित किए थे। इसके लिए 400 से ज्यादा आवेदन आए थे। इन आवेदनों में बेहतरीन 10 को चुना गया। इसके बाद अलग-अलग कलाकारों ने इसे अपने तरीके से राज्य गीत तैयार किया। इनमें से बेस्ट तीन गीत चुने गए। विधानसभा में हर कसौटी पर खरा उतरने पर जय-जय-जय हरियाणा को राज्य गीत का दर्जा मिला।
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रोहतक के मॉडल टाउन निवासी मालविका पंडित ने कहा कि राज्य गीत तैयार करने में कलाकारों ने अपनी कला का बेहतरीन प्रदर्शन किया है। कलाकारों ने अपना मेहनताना तक नहीं लिया है। सभी ने समाज व प्रदेश हित में राज्य गीत के लिए निशुल्क सेवा दी है। इसके 10 से 12 सहयोगी कलाकार भी शामिल हैं। उनका यह सहयोग हमेशा याद रहेगा। पिछले चार साल से यह गीत तैयार करने में जितनी मेहनत की है, वह अब सफल हुई। राज्य गीत न केवल अनेक बार लिखा गया, बल्कि इसका संगीत व गायन भी कई बार बदला गया है। यही नहीं, हर व्यक्ति ने अपने स्तर पर गहन शोध किया। इसके बाद ही बेहतरीन गीत तैयार कर पाए। इसमें कम से कम समय व शब्दों में अपनी बात कही गई है। यह भी हरियाणावी अंदाज व संगीत के जरिए। इसका मकसद इसे लोगों के दिलों से जोड़ना रहा।
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सरकार ने आमंत्रित किए थे आवेदन
पिछले करीब चार साल से राज्य गीत तैयार करने का प्रयास चल रहा था। राज्य गीत के लिए सरकार ने आवेदन आमंत्रित किए थे। इसके लिए 400 से ज्यादा आवेदन आए थे। इन आवेदनों में बेहतरीन 10 को चुना गया। इसके बाद अलग-अलग कलाकारों ने इसे अपने तरीके से राज्य गीत तैयार किया। इनमें से बेस्ट तीन गीत चुने गए। विधानसभा में हर कसौटी पर खरा उतरने पर जय-जय-जय हरियाणा को राज्य गीत का दर्जा मिला।

पारस।
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