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भूकंप से 34 माह बाद फिर हिला रोहतक, दहशत में घरों से बाहर भागे लोग
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शुक्रवार की रात में नौ बज कर आठ मिनट के पास रोहतक में भूकंप आने से बजरंग भवन के पास एक दुकान का शीशा
- फोटो : RohtakCity
जिले में 34 माह बाद एक बार फिर शुक्रवार रात 9 बजकर 8 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। जिले से करीब 15 किलोमीटर दूर चुलियाना गांव भूकंप का मुख्य बिंदु रहा। भूकंप आते ही लोग अपने घरों से बाहर भागे। दहशत के कारण काफी समय तक लोग सड़कों पर खड़े रहे। वहीं करीब 52 मिनट बाद 10 बजकर 07 मिनट पर भूकंप का दूसरा झटका भी आया। हालांकि वह इतना महसूस नहीं हुआ। उधर, प्रशासन की ओर से किसी भी तरह के नुकसान न होने की बात कही गई है।
नौंनद निवासी पूर्व सरपंच बिजेंद्र, इस्माइला से संजय, गांधरा निवासी से लीला कस्बा निवासी डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि वे घर पर आराम कर रहे थे। अचानक चारपाई हिलने लगी तो वे भागकर खड़े हुए। भूकंप का यह झटका करीब 8 सेकंड तक रहा। लोग घरों से बाहर दौड़ पड़े और उनके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था। लोगों ने बताया कि कई वर्ष पहले भी हल्के भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं, लेकिन शुक्रवार रात आया भूकंप काफी खतरनाक महसूस हुआ। कविता, रोशनी, मोनिका ने बताया कि जब रसोई में खाना बना रहे थे तो अचानक बर्तन गिर गए। सब कुछ छोड़कर मकान से बाहर भागना ही उचित समझा। यश कुमार ने बताया कि उनका दीवार पर लगी कांच की घड़ी भूकंप के झटके में गिरकर टूट गई। इलाके में ज्यादा कोई नुकसान नहीं बताया जा रहा। देर रात तक लोगों की जुबान पर भूकंप के चर्चा रही।
अजीब संयोग : तीन साल बाद फिर से चुलियाना रहा भूकंप का केंद्र
- पहले भी शुक्रवार को और दो बार ही आया था भूकंप
जिले में भूकंप का अजीब संयोग है। करीब 34 माह बाद एक बार फिर चुलियाना भूकंप का केंद्र रहा। तीन साल पहले भी कुछ अंतराल पर दो बार और शुक्रवार के ही दिन भूकंप आया था। हालांकि जुलाई 2017 में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया था। केंद्र भी चुलियाना के आस पास था। हालांकि उस दिन पहला भूकंप का झटका सुबह 4 बजकर 26 मिनट 56 सेकेंड पर आया था। उसके बाद आफ्टरशॉक 8 बजकर 13 मिनट 15 सेकेंड पर आया था। वैसे दिल्ली एनसीआर जोन में भूकंप के सामान्य और हल्के झटके महसूस किए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार इसकी तीव्रता लगभग 4.5 रही। जिसमें दिल्ली और हरियाणा हिल गया। भूकंप के तेज झटके की वजह से लोग घरों से बाहर निकल आए।
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बड़े झटके बाद आता है छोटा झटका
मौसम एक्सपर्ट नवदीप दहिया ने बताया कि 3 साल पहले भी 5.1 तीव्रता का भूकंप आया था। उसके करीब 4 घंटे बाद ही भूकंप फिर आया। इसे आफ्टरशॉक कहते हैं। उन्होंने बताया कि आफ्टरशॉक एक छोटा भूकंप है जो मुख्य आघात के एक ही क्षेत्र में बड़े भूकंप के बाद होता है। क्योंकि विस्थापित क्रस्ट मुख्य आघात के प्रभावों को समायोजित करता है। यह अमूमन 24 घंटे के अंदर आता है। हर बार आफ्टरशॉक हो यह भी जरूरी नहीं है। जहां बड़ी बिल्डिंग मुख्य भूकंप से प्रभावित हुई हो वहां आफ्टरशॉक से भी नुकसान का अंदेशा रहता है।
इसलिए आता है भूकंप
- धरती के अंदर सात प्लेट्स हैं, जो लगातार घूम रही हैं। जहां ये प्लेट्स टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है।
- बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं।
- इस कारण नीचे पैदा हुई ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती है। इसी हलचल में भूकंप आता है।
ऐसे समझे भूकंप की तीव्रता को
तीव्रता असर
0 से 1.9 मशीन से ही पता चलता है
2 से 2.9 हल्का कंपन
3 से 3.9 भारी वाहन जैसे ट्रक नजदीक से गुजरा हो, पंखा हिल जाता है
4 से 4.9 खिड़कियां टूट सकती हैं। दीवारों पर टंगी गिर सकती हैं।
5 से 5.9 फर्नीचर हिल सकता है।
6 से 6.9 इमारतों की नींव दरक सकती है। ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है।
7 से 7.9 इमारतें गिर जाती हैं। जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं।
8 से 8.9 इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं।
9 व अधिक पूरी तबाही। कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे धरती लहराते हुए दिखेगी। समुंद्र के नजदीक हो तो सुनामी।
खतरनाक जोन में है रोहतक
भूकंप के खतरे के हिसाब से देश को पांच हिस्सों में बांटा गया है। जोन-1, जोन-2, जोन-3, जोन-4 व जोन-5। दिल्ली जोन चार में आता है और दिल्ली के नजदीक रोहतक होने के कारण खतरा ज्यादा है। सबसे कम खतरे वाला जोन 2 है और सबसे ज्यादा खतरे वाला जोन-5 है।
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नौंनद निवासी पूर्व सरपंच बिजेंद्र, इस्माइला से संजय, गांधरा निवासी से लीला कस्बा निवासी डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि वे घर पर आराम कर रहे थे। अचानक चारपाई हिलने लगी तो वे भागकर खड़े हुए। भूकंप का यह झटका करीब 8 सेकंड तक रहा। लोग घरों से बाहर दौड़ पड़े और उनके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था। लोगों ने बताया कि कई वर्ष पहले भी हल्के भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं, लेकिन शुक्रवार रात आया भूकंप काफी खतरनाक महसूस हुआ। कविता, रोशनी, मोनिका ने बताया कि जब रसोई में खाना बना रहे थे तो अचानक बर्तन गिर गए। सब कुछ छोड़कर मकान से बाहर भागना ही उचित समझा। यश कुमार ने बताया कि उनका दीवार पर लगी कांच की घड़ी भूकंप के झटके में गिरकर टूट गई। इलाके में ज्यादा कोई नुकसान नहीं बताया जा रहा। देर रात तक लोगों की जुबान पर भूकंप के चर्चा रही।
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अजीब संयोग : तीन साल बाद फिर से चुलियाना रहा भूकंप का केंद्र
- पहले भी शुक्रवार को और दो बार ही आया था भूकंप
जिले में भूकंप का अजीब संयोग है। करीब 34 माह बाद एक बार फिर चुलियाना भूकंप का केंद्र रहा। तीन साल पहले भी कुछ अंतराल पर दो बार और शुक्रवार के ही दिन भूकंप आया था। हालांकि जुलाई 2017 में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया था। केंद्र भी चुलियाना के आस पास था। हालांकि उस दिन पहला भूकंप का झटका सुबह 4 बजकर 26 मिनट 56 सेकेंड पर आया था। उसके बाद आफ्टरशॉक 8 बजकर 13 मिनट 15 सेकेंड पर आया था। वैसे दिल्ली एनसीआर जोन में भूकंप के सामान्य और हल्के झटके महसूस किए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार इसकी तीव्रता लगभग 4.5 रही। जिसमें दिल्ली और हरियाणा हिल गया। भूकंप के तेज झटके की वजह से लोग घरों से बाहर निकल आए।
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बड़े झटके बाद आता है छोटा झटका
मौसम एक्सपर्ट नवदीप दहिया ने बताया कि 3 साल पहले भी 5.1 तीव्रता का भूकंप आया था। उसके करीब 4 घंटे बाद ही भूकंप फिर आया। इसे आफ्टरशॉक कहते हैं। उन्होंने बताया कि आफ्टरशॉक एक छोटा भूकंप है जो मुख्य आघात के एक ही क्षेत्र में बड़े भूकंप के बाद होता है। क्योंकि विस्थापित क्रस्ट मुख्य आघात के प्रभावों को समायोजित करता है। यह अमूमन 24 घंटे के अंदर आता है। हर बार आफ्टरशॉक हो यह भी जरूरी नहीं है। जहां बड़ी बिल्डिंग मुख्य भूकंप से प्रभावित हुई हो वहां आफ्टरशॉक से भी नुकसान का अंदेशा रहता है।
इसलिए आता है भूकंप
- धरती के अंदर सात प्लेट्स हैं, जो लगातार घूम रही हैं। जहां ये प्लेट्स टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है।
- बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं।
- इस कारण नीचे पैदा हुई ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती है। इसी हलचल में भूकंप आता है।
ऐसे समझे भूकंप की तीव्रता को
तीव्रता असर
0 से 1.9 मशीन से ही पता चलता है
2 से 2.9 हल्का कंपन
3 से 3.9 भारी वाहन जैसे ट्रक नजदीक से गुजरा हो, पंखा हिल जाता है
4 से 4.9 खिड़कियां टूट सकती हैं। दीवारों पर टंगी गिर सकती हैं।
5 से 5.9 फर्नीचर हिल सकता है।
6 से 6.9 इमारतों की नींव दरक सकती है। ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है।
7 से 7.9 इमारतें गिर जाती हैं। जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं।
8 से 8.9 इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं।
9 व अधिक पूरी तबाही। कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे धरती लहराते हुए दिखेगी। समुंद्र के नजदीक हो तो सुनामी।
खतरनाक जोन में है रोहतक
भूकंप के खतरे के हिसाब से देश को पांच हिस्सों में बांटा गया है। जोन-1, जोन-2, जोन-3, जोन-4 व जोन-5। दिल्ली जोन चार में आता है और दिल्ली के नजदीक रोहतक होने के कारण खतरा ज्यादा है। सबसे कम खतरे वाला जोन 2 है और सबसे ज्यादा खतरे वाला जोन-5 है।

शुक्रवार की रात नौ बजे के लगभग भूकंप आने के बाद सेक्टर एक में लोग डर के बाहर निकल आएं। अमर उजाला- फोटो : RohtakCity