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रोहतक: 1965 के भारत-पाक युद्ध का गोपनीय हिस्सा सार्वजनिक, इस पुस्तक में शब्दों में उकेरी जवानों की शौर्यगाथा

Mon, 02 Oct 2023 10:00 AM IST
नवीन दलाल संजय कुमार, रोहतक (हरियाणा)
संजय कुमार, रोहतक (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Mon, 02 Oct 2023 10:00 AM IST
सार

पूर्व सैन्य अधिकारी ने बताया कि युद्ध के समय अमेरिका व रूस की ओर से सीजफायर का अंतरराष्ट्रीय दबाव था। जम्मू एंड कश्मीर में जिला पुंछ की तहसील मेंढर की पहाड़ी ओपी हिल पर पाकिस्तानी सैनिकों का सीजफायर के बाद भी कब्जा था। वह हमारे देश में करीबन दो किलोमीटर अंदर मजबूत पोस्ट बनाकर बैठे थे।

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Rohtak: Secret part of India Pakistan war of 1965 made public, bravery of soldiers depicted in words
पुस्तक बैटल ऑफ ओपी हिल इन जम्मू एंड कश्मीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. सूबे सिंह अहलावत ने अपनी पुस्तक बैटल ऑफ ओपी हिल इन जम्मू एंड कश्मीर में वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध का गोपनीय हिस्सा सार्वजनिक किया है। सने युद्ध के दौरान हुए सीजफायर के बाद दुश्मन के साथ हुई खूनी जंग की दास्तान खोली है। इस युद्ध में वह स्वयं कमांडो प्लाटून कमांडर थे। सिख व डोगरा रेजिमेंट के अधिकारियों व जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर दुश्मनों को मार गिराया ओर कई को पीठ दिखाकर भागने पर मजबूर कर दिया।

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सिख व डोगरा रेजिमेंट के अधिकारियों व जवानों ने जान पर खेल कर पाक दुश्मनों को मार भगाया
पूर्व सैन्य अधिकारी ने बताया कि युद्ध के समय अमेरिका व रूस की ओर से सीजफायर का अंतरराष्ट्रीय दबाव था। जम्मू एंड कश्मीर में जिला पुंछ की तहसील मेंढर की पहाड़ी ओपी हिल पर पाकिस्तानी सैनिकों का सीजफायर के बाद भी कब्जा था। वह हमारे देश में करीबन दो किलोमीटर अंदर मजबूत पोस्ट बनाकर बैठे थे। यह दुश्मन का भारी मोर्चा था और इससे भारी नुकसान हो सकता था क्योंकि दुश्मन देश के अंदर तक आ सकता था।
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पोस्ट ऊंचाई पर होने की वजह से वह अधिक नुकसान पहुंचा रहा था। इसे मुक्त कराने के लिए पहले एक बटालियन भेजी गई, इसमें 700 ऑफिसर व सैनिक थे। उस समय पाकिस्तानी सैनिकों के पास हमारी जानकारी थी और उनके हमले में हमारे दो अधिकारी व 18 जवान शहीद हो गए। टीम ओपी हिल नहीं छुड़ा पाई। इसके बाद हमारी पूरी ब्रिगेड ने दुश्मनों पर हमला बोला, इसमें तकरीबन चार हजार जवान व अधिकारी शामिल थे।
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फाइव सिख एलआई, टू डोगरा व सेवन सिख रेजिमेंट ने एक साथ हमला किया। इसमें हमारे कई जवान व अधिकारी मारे गए और कई गंभीर घायल हुए। इसमें कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कुछ पीठ दिखाकर भाग गए। उन्होंने जंग के मैदान को पुस्तक में नक्शे के साथ दिखाया गया है। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. सूबे सिंह अहलावत ने बताया कि वह आज भी अपने जांबाज साथियों को भुला नहीं पाए हैं। यह उनकी चौथी किताब है। वह तीन बैचलर, सात मास्टर डिग्री व तीन डिप्लोमा सभी अलग-अलग विषयों में कर चुके हैं। पूर्व सैन्य अधिकारी 1964 में सेवन सिख रेजिमेंट में कमीशन हुए थे।


डी-क्लासीफाइड होने के बाद जानकारी हुई सार्वजनिक
नियमत: सेना की गोपनीय जानकारी लीक करने का किसी को अधिकार नहीं है। यह जानकारी सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. सूबे सिंह ने सेना से डी-क्लासीफाइड करने के बाद किया है। उन्होंने बताया कि घटना के 50 साल पूरे होने के बाद इसे डीक्लासीफाइड करने के बाद ही सार्वजनिक किया है। देश को पता होना चाहिए कि सेना कैसे हमें अपनी जान जोखिम में डाल कर सुरक्षा प्रदान करती है।

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