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Rohtak: पहले होता है काम, फिर मांगे जाते हैं टेंडर, पेयजल, सीवर या घोटालों का जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग!
Fri, 18 Nov 2022 07:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह
संजय कुमार, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
संजय कुमार, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Fri, 18 Nov 2022 07:01 AM IST
सार
ईआईसी बोले कि चीफ इंजीनियर जांच के लिए रोहतक आएंगे। मॉडल टाउन बूस्टर पर घासफूस उगी है इसे साफ करने के लिए 48 हजार का टेंडर मांगा गया है।
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घास-फूस की सफाई का 48 हजार रुपये तक का टेंडर ।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
किसी भी सरकारी विभाग में पहले कार्य तय होता है, फिर उसकी डीएनआईटी बनती है और उसे जेई, एसडीई व कार्यकारी अभियंता क्रमवार मंजूरी देते हैं। इसके बाद टेंडर के आवेदन किए जाते हैं। जो सबसे कम कीमत डालता है टेंडर उसके नाम अलॉट होता है। लेकिन रोहतक जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में ऐसा नहीं है।
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यहां पहले काम कराया जाता है, फिर डीएनआईटी बनाई जाती है और बाद में टेंडर निकाले जाते हैं। काम पहले हो चुका होता है, इसलिए गुपचुप तरीके से अंडर टेबल टेंडर चहेते ठेकेदारों को अलॉट किए जाते हैं। इस संबंध में इंजीनियर इन चीफ पंचकूला असीम खन्ना ने कहा कि वह चीफ इंजीनियर को जांच के लिए रोहतक भेज रहे हैं।
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विभाग में गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ जब उपमंडल लिपिक की ओर से कार्यकारी अभियंता को पत्र लिखा गया। पत्र में लिखा है कि जनहित के कार्य को लेकर डीएनआईटी (वर्क फाइल ऑर्डर) मंडल कार्यालय में पास होने के लिए भेजी गई थी। इसके लिए टेंडर लगाया जाना है। उस पर इन कार्यों को पूरा कर चुके ठेकेदार व कनिष्ठ अभियंता दबाव बना रहे हैं कि इसके टेंडर अंडर टेबल अलॉट किए जाएं।
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यह अलॉटमेंट उन्हीं को होनी चाहिए, जिन्होंने इस कार्य को पूरा किया है। ऐसा करने में वह असमर्थ है और वह सभी पास हुई डीएनआईटी व टेंडर उपमंडल अभियंता को सुपुर्द कर रहा है। यही नहीं लिपिक ने यहां तक लिखा है कि यदि भविष्य में इस तरह के मामले की यदि कोई जांच होती है तो उसकी इसमें कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
गौरतलब है कि पेयजल व सीवर के साथ-साथ जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग घोटालों का विभाग हो गया है। यहां की अव्यवस्थाओं की शिकायत अब तक जनता व ठेकेदार ही कर रहे थे, लेकिन अब यहां टेंडरों में हो रही गड़बड़ी की शिकायत यहां के छोटे कर्मचारी भी करने लगे हैं।
टुकड़ों में टेंडर लगाने का है रिवाज
विभाग में एक कार्य पर बड़ा टेंडर निकालने की जगह उसे टुकड़ों में निकाला जाता है। इससे बड़े ठेकेदार दावेदारी नहीं करते और स्थानीय ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर बिल बना दिए जाते हैं। इस तरह विभाग सीधा-सीधा सरकार व जनता की पूंजी को चूना लगाता है।
केस एक: फिटकरी के लिए सात टेंडर क्यों
विभाग फिटकरी खरीदने के लिए सात टेंडर ओपन करता है और हर टेंडर की कीमत 50 हजार से कम रखता है। इस तरह इसकी कीमत एक लाख की सीमा पार नहीं करती और अधिकारी ऑनलाइन टेंडर ओपन करने से बच जाते हैं। जबकि वह तीन लाख से अधिक की कीमत का ऑर्डर होता है। फिटकरी की कीमत भी टेंडर में 30 रुपये किलो दी जाती है, जबकि यह 10 रुपये प्रति किलो तक उपलब्ध है।
केस दो: बूस्टिंग स्टेशनों की सफाई के लिए भी अलग-अलग टेंडर
विभाग बूस्टिंग स्टेशन के टैंकों पर उगी घास-फूस की सफाई का 48 हजार रुपये तक का टेंडर ओपन करता है। यह टेंडर भी अलग-अलग बूस्टिंग स्टेशन का अलग-अलग होता है। यदि इसे एक साथ ओपन किया जाए तो बड़े ठेकेदार इसमें आगे आते हैं और काम सार्वजनिक होता है। यहां पर भी विभाग छोटे-छोटे टेंडरों के माध्यम से यह काम कराता है।
केस तीन: वेतन को लेकर भी रहता है विवाद
विभाग में ठेके पर लगे कर्मचारियों का वेतन ठेकेदार के खाते में आता है, लेकिन इसे देते विभाग के अधिकारी ही हैं। ठेकेदार से सिर्फ लेबर का बिल बनवाया जाता है। यही वजह है कि यहां कार्य करने वाले अधिकांश लेबर को न तो पूरा वेतन मिलता है और न ही ईएसआई व पीएफ अकाउंट है। इसमें भी विभाग पूरी मैन पावर का एक साथ टेंडर ओपन नहीं करता।
इस मामले पर ऐसे मिले जिम्मेदारों के जवाब
मैने कार्यकारी अभियंता को पत्र लिखा है। इस संबंध में अधिक जानकारी एसडीओ, जेई या कार्यकारी अभियंता ही बता सकते हैं। -हरीश सिंह, लिपिक
इस संबंध में मैं अधिक नहीं बता सकता, इस संबंध में एसडीई ही बता सकते हैं। -देवेंद्र, कनिष्ठ अभियंता
मैं मीटिंग में व्यस्त हूं, बाद में बात करता हूं। -राजेश कुमार, उपमंडल अभियंता
मेरे पास जो पत्र आया है, उस संबंध में लिपिक, जेई व एसडीई से बात करके ही कुछ बता सकता हूं। -फूल सिंह, कार्यकारी अभियंता
ऐसा नहीं होना चाहिए। चीफ इंजीनियर को रोहतक भेज रहा हूं। वह इस मामले को देखकर जानकारी दे पाएंगे। -असीम खन्ना, इंजीनियर इन चीफ, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, पंचकूला
चंडीगढ़ से विजिलेंस टीम भी कर रही है जांच
गौरतलब है कि टेंडर में गड़बड़ी मामले पर चंडीगढ़ से विजिलेंस की टीम रोहतक आकर जांच कर चुकी है। इसमें अधीक्षण अभियंता विजिलेंस विक्रम माथुर सोमवार व मंगलवार को जांच करके जा चुके हैं। इसकी जांच रिपोर्ट पर खुलासा होना बाकी है।