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जैमर का झटका, शिक्षा बोर्ड को 1.20 करोड़ का फटका
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 24 May 2016 02:21 AM IST
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जैमर
- फोटो : file photo
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हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से आयोजित अध्यापक पात्रता परीक्षा (एचटेट) के लिए परीक्षा केंद्रों में लगाए गए जैमर में करीब एक करोड़ 20 लाख रुपये का घोटाला होने की बात सामने आ रही है। इसका खुलासा हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में लगाई गई एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) से मिली जानकारी से हुआ है। दावा यह भी किया जा रहा है कि यदि परीक्षाओं के दौरान हुए बोर्ड के सभी खर्चों की पड़ताल की जाए तो और भी कई मामले सामने आ सकते हैं।
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार शिक्षा बोर्ड की ओर से वर्ष-2015 में आयोजित अध्यापक पात्रता परीक्षा में चार लाख, 16 हजार 474 विद्यार्थी उपस्थित हुए थे। परीक्षा के आयोजन के लिए प्रदेश भर में 635 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। एचटेट परीक्षा के दौरान केंद्रों के पास रेडियो फ्रीक्वेंसी रोकने के लिए जैमर लगाए गए थे। जिस फर्म से जैमर लगाने के लिए अनुबंध किया गया था, उस फर्म ने प्रति विद्यार्थी और प्रति परीक्षा केंद्र के आधार पर रेट दिए थे। फर्म ने 66 रुपये प्रति परीक्षार्थी या 24,500 रुपये प्रति परीक्षा केंद्र के रेट दिए थे। लेकिन बोर्ड की ओर से प्रति परीक्षार्थी के आधार पर अनुबंध किया गया। अगर प्रति परीक्षा केंद्र के आधार पर अनुबंध किया जाता तो बोर्ड को 635 परीक्षा केंद्रों के लिए एक करोड़, 55 लाख, 57 हजार 500 रुपये का भुगतान करना पड़ता, जबकि प्रति परीक्षार्थी के आधार पर यह राशि 2 करोड़, 74 लाख, 87 हजार 284 रुपये बनती है। इस हिसाब से बोर्ड को करीब एक करोड़ 20 लाख रुपये का फटका लग गया। इसके अलावा परीक्षा के दौरान फिंगरप्रिंट का भी अनुबंध किया गया था। जैमर लगाने में हुए घोटाले से फिंगर प्रिंट के अनुबंध में भी घोटाला होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
अवैध फर्म के साथ अनुबंध
जैमर लगाने के कार्य में घोटाले की बू तो अनुबंध की शुरूआत से ही शुरू हो जाती है। केंद्र सरकार की ज्वाइंट सेक्रेटरी आरती भटनागर की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं कि बोर्ड से संबंधित परीक्षाओं में जैमर लगाने के अनुबंध के लिए मैसर्स ईसीआईएल और मैसर्स बीईएल को वैध किया जाता है। जबकि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने जैमर लगाने के लिए दिल्ली की फर्म इनोवेटीव्यू के साथ जैमर लगाने का अनुबंध किया। साफ है कि मामले में लापरवाही की गई है।
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अधिकारियों तक पहुंच सकती है जांच की आंच
मामले की गहनता से जांच कराई जाए तो बोर्ड के कई अधिकारियों के नाम लपेटे में आ सकते हैं। जानकार बताते हैं कि ऐसे मामले बिना अधिकारियों की सहमति के सिरे नहीं चढ़ते हैं। कौन-कौन घोटाले में शामिल है, यह तो जांच के बाद साफ हो पाएगा।
एक करोड़ 20 लाख रुपये बड़ी रकम है। इतनी ज्यादा धनराशि को गलत तरीके से प्रयोग किया जाना बड़ी लापरवाही है। मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. जंगबीर, चेयरमैन, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड
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आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार शिक्षा बोर्ड की ओर से वर्ष-2015 में आयोजित अध्यापक पात्रता परीक्षा में चार लाख, 16 हजार 474 विद्यार्थी उपस्थित हुए थे। परीक्षा के आयोजन के लिए प्रदेश भर में 635 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। एचटेट परीक्षा के दौरान केंद्रों के पास रेडियो फ्रीक्वेंसी रोकने के लिए जैमर लगाए गए थे। जिस फर्म से जैमर लगाने के लिए अनुबंध किया गया था, उस फर्म ने प्रति विद्यार्थी और प्रति परीक्षा केंद्र के आधार पर रेट दिए थे। फर्म ने 66 रुपये प्रति परीक्षार्थी या 24,500 रुपये प्रति परीक्षा केंद्र के रेट दिए थे। लेकिन बोर्ड की ओर से प्रति परीक्षार्थी के आधार पर अनुबंध किया गया। अगर प्रति परीक्षा केंद्र के आधार पर अनुबंध किया जाता तो बोर्ड को 635 परीक्षा केंद्रों के लिए एक करोड़, 55 लाख, 57 हजार 500 रुपये का भुगतान करना पड़ता, जबकि प्रति परीक्षार्थी के आधार पर यह राशि 2 करोड़, 74 लाख, 87 हजार 284 रुपये बनती है। इस हिसाब से बोर्ड को करीब एक करोड़ 20 लाख रुपये का फटका लग गया। इसके अलावा परीक्षा के दौरान फिंगरप्रिंट का भी अनुबंध किया गया था। जैमर लगाने में हुए घोटाले से फिंगर प्रिंट के अनुबंध में भी घोटाला होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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अवैध फर्म के साथ अनुबंध
जैमर लगाने के कार्य में घोटाले की बू तो अनुबंध की शुरूआत से ही शुरू हो जाती है। केंद्र सरकार की ज्वाइंट सेक्रेटरी आरती भटनागर की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं कि बोर्ड से संबंधित परीक्षाओं में जैमर लगाने के अनुबंध के लिए मैसर्स ईसीआईएल और मैसर्स बीईएल को वैध किया जाता है। जबकि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने जैमर लगाने के लिए दिल्ली की फर्म इनोवेटीव्यू के साथ जैमर लगाने का अनुबंध किया। साफ है कि मामले में लापरवाही की गई है।
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अधिकारियों तक पहुंच सकती है जांच की आंच
मामले की गहनता से जांच कराई जाए तो बोर्ड के कई अधिकारियों के नाम लपेटे में आ सकते हैं। जानकार बताते हैं कि ऐसे मामले बिना अधिकारियों की सहमति के सिरे नहीं चढ़ते हैं। कौन-कौन घोटाले में शामिल है, यह तो जांच के बाद साफ हो पाएगा।
एक करोड़ 20 लाख रुपये बड़ी रकम है। इतनी ज्यादा धनराशि को गलत तरीके से प्रयोग किया जाना बड़ी लापरवाही है। मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. जंगबीर, चेयरमैन, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड