फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   rohtak, haryana, documents, job, fraud, nagar nigam, government job

सरकार के नौकरियों व तबादलों में पारदर्शिता की पोल खोल रही है रोहतक नगर निगम में भर्तियां

Fri, 24 Jun 2016 02:32 AM IST
अंकित चौहान /अमर उजाला, रोहतक
अंकित चौहान /अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 24 Jun 2016 02:32 AM IST
विज्ञापन
rohtak, haryana, documents, job, fraud, nagar nigam, government job
मुख्यमंत्री, विधायक और सीएम ओएसडी की सिफारिश पर रोहतक नगर निगम में मिलती है नौकरी - फोटो : amar ujala
प्रदेश में नौकरियों में भ्रष्टाचार का मुद्दा बनाकर सत्ता में आई प्रदेश सरकार ही नौकरियों में पारदर्शिता नहीं बरत रही है। रोहतक नगर निगम में हुई भर्तियों में मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री के ओएसडी, सीएम ऑफिस और विधायक आदि की सिफारिश आई। इन्हीं के लोगों को भर्ती भी किया गया। अब ये कर्मचारी दबंगई से नौकरी कर रहे हैं। निगम में 67 पदों की भर्ती में 64 लोगों को सिफारिश पर नौकरी दी गई।
विज्ञापन


 नगर निगम रोहतक में जुलाई 2015 से आउट सोर्सिंग पर भर्तियां शुरू हुईं जो मार्च 2016 तक की गई। यह 67 भर्तियां किसी एक पद के लिए नहीं हुई, बल्कि इनमें क्लर्क, डीईओ, बेलदार, चपरासी, माली, ड्राईवर शामिल हैं। इन सभी को भर्ती करते हुए इनकी काबलियत नहीं देखी गई, बल्कि यह देखा गया कि किसके आवेदन के लिए किस नेता या अधिकारी ने सिफारिश की। वह नेता किस पार्टी से ताल्लुक रखता है। उसके ही आधार पर नौकरी दी गई है और वह आराम से नौकरी कर रहे हैं। क्योंकि उनकी एमएलए, सीएम ऑफिस, सीएम के ओएसडी, मेयर की ओर से सिफारिश आई है। निगम में केवल नेता ही नहीं, बल्कि निगम के एटीपी ने भी भर्तियों में अपनी सिफारिश खूब चलाई। हालात यह है कि पिछले दिनों हुई ड्राईवरों की भर्ती में एक भी बिना सिफारिश के भर्ती नहीं किया गया। यह आरोप कोई आम आदमी नहीं लगा रहा है, बल्कि निगम में भर्ती करने के साथ ही सिफारिश करने वाले का नाम भी लिख दिया गया। उससे ही यह पूरा खुलासा हुआ है कि सीएम ऑफिस तक भर्तियों के खेल में सिफारिश की जाती है।
विज्ञापन


इस तरह होनी चाहिए भर्ती

आउट सोर्सिंग पर होने वाली भर्तियों के लिए सबसे पहले विज्ञापन जारी करके आवेदन मांगे जाते हैं। फिर एक नियमित तारीख पर उनको इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। जिसके लिए एक बोर्ड का गठन होता है। वह बोर्ड ही इंटरव्यू के आधार पर तय करता है कि कौन उस नौकरी के योग्य है और कौन नहीं? लेकिन यहां योग्यता नहीं, बल्कि यह देखा गया कि किसकी सिफारिश बड़ी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


किसकी सिफारिश पर कितनी भर्ती
एमएलए-22
सीएम कार्यालय-1
सीएम- 1
खुल्लर-2
मेयर-3
एटीपी-8
नोट: बाकी कर्मी भी निगम अधिकारी या पार्षद की सिफारिश पर भर्ती हुए।

मैने किसी कर्मी को भर्ती नहीं कराया है। यह हो सकता है कि किसी को भर्ती करके मेरा नाम लिख दिया हो। लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने अपने समय में भर्तियों में खूब खेल किया। कांग्रेस सरकार के समय व इस समय की भर्तियों की पूरी लिस्ट जारी हो और उसमें देखा जाए कि किसको किसने भर्ती कराया है। उससे साफ हो जाएगा कि किसने कितने कर्मियों को भर्ती कराया है। मनीष ग्रोवर, विधायक भाजपा
मैने केवल एक भर्ती कराई है जो मेरा स्टेनो है। उसके अलावा कोई भर्ती नहीं कराई। अगर मेरे नाम पर किसी अन्य को भर्ती कराने की बात कही जा रही है तो वह गलत है। निगम में विधायक व अधिकारियों की मिलीभगत से सभी भर्तियां होती है। वहां हमारी कोई सुनने तक को तैयार नहीं होता। रेनू डाबला, मेयर नगर निगम


आउट सोर्सिंग पर होनी वाली भर्तियों के लिए विज्ञापन जारी होना चाहिए। उनकी भर्ती मेरिट के आधार पर होनी चाहिए। यदि किसी की सिफारिश पर भर्ती की जा रही है तो यह योग्य लोगों के साथ धोखा है। इस तरह की भर्ती गैरकानूनी है और सिफारिश पर की गई भर्तियों को कैंसिल किया जाना चाहिए। बीबी बत्तरा, पूर्व विधायक कांग्रेस

(नोट: भर्ती संबंधी दस्तावेज पर नेता, ओएसडी और अन्य की सिफारिश की रिमार्क की कॉपी अमर उजाला के पास)
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed