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गांव जितना बड़ा डिफाल्टर, उतनी ही कम मिलेगी बिजली
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 03 May 2016 01:27 AM IST
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बिजली संकट
- फोटो : Demo pic
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बिजली की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों को गर्मी में बड़ा झटका लगने वाला है। बिजली समस्या दूर होने की जगह उल्टा कटौती बढ़ाई जा सकती है। बिजली निगम के अधिकारियों ने साफ फरमान जारी कर दिया है कि गांव जितना बड़ा डिफाल्टर है, वहां उतनी ही ज्यादा बिजली कटौती की जाए। जिस गांव पर बिजली निगम का जितना बकाया होगा, वहां उतनी ही कम बिजली आएगी। अधिकारियों का मानना है कि गर्मी में बिजली नहीं मिलने के बाद ही ग्रामीण बिल जमा कर सकते हैं और घरों के बाहर मीटर लगवा सकते हैं।
इस समय गांवों में 12 घंटे की बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है। इसमें दिन में सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक की आपूर्ति होती है। जबकि शाम को सात बजे से सुबह पांच बजे तक बिजली दी जाती है। इसमें भी कई बार रात को 2 से 3 घंटे तक की कटौती कर दी जाती है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की मांग है कि गर्मी को देखते हुए आपूर्ति को बढ़ाया जाए। रोजाना पावर हाउस पर हंगामा हो रहा है। लेकिन डिफाल्टरों को देखते हुए अधिकारी मौजूदा आपूर्ति में भी 4 से 6 घंटे और कटौती शुरू करने के मूड में हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जिले में लाइनलॉस व बिजली चोरी नहीं रुक रही है।
हालात ये हैं कि लाइनलॉस 57 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच गया है। जिसको कम करने के लिए बिजली निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से फरमान जारी कर दिया गया है कि गांव जितना बड़ा डिफाल्टर है, उसे उतनी ही कम बिजली दी जाए। क्योंकि वहां ज्यादा बिजली देने के बावजूद बिल नहीं मिलता है और उससे राजस्व में बड़ा नुकसान हो रहा है। इस तरह उन गांवों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है, जो 10 करोड़ रुपये से ज्यादा के बकायेदार हैं। इन गांवों में उन उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा समस्या होगी जो नियमित बिल भरते हैं। अब डिफाल्टरों के चक्कर में उनको भी कटौती झेलनी पड़ेगी। लेकिन इस गर्मी में बिजली नहीं मिलने पर लोग कितना बिल भरते हैं, यह आने वाले समय में पता लगेगा।
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सीएम के गांव पर सबसे ज्यादा बकाया
बनियानी -70 करोड़
टिटौली- 58 करोड़
बहुअकबरपुर- 19 करोड़
निंदाना- 18 करोड़
खरेंटी- 17.5 करोड़
सुनारिया- 15 करोड़
फरमाणा- 12 करोड़
खरखड़ा- 10 करोड़
कलिंगा- 4 करोड़
नोट: ये केवल चंद गांव हैं। इनके अलावा भी कई गांवों पर करोड़ों बकाया हैं।
शहर की बढ़ रही परेशानी
लाइनलॉस और चोरी रोकने में नाकाम बिजली निगम ने अपना पूरा बिल भरने वाले उपभोक्ताओं को भी परेशानी में डाल दिया है। क्योंकि जिले में लाइनलॉस 57 प्रतिशत है और उसमें कमी करने के लिए शहर में अघोषित कट शुरू कर दिए गए हैं। इससे भले ही घरों में बिजली की यूनिट नहीं खर्च होती हो, लेकिन बिजली चोरी में भी गिरावट आने की बात कही जा रही है। लाइनलॉस भी कम होगा। इस तरह पूरा बिल भरने के बावजूद शहर के उपभोक्ताओं को रोजाना 2 से 5 घंटे तक की बिजली कटौती से जूझना पड़ रहा है।
3500 लाख यूनिट से 5500 लाख तक पहुंचा खर्च
अधिकारियों के अनुसार जहां फरवरी में पूरे जिले में केवल 3500 लाख यूनिट का खर्च होता था। वहीं, अप्रैल की शुरुआत में यह बढ़कर 4500 लाख यूनिट तक हो गया था। अब यह 5500 लाख यूनिट तक पहुंच गया है।
रोजाना फुंक रहे केबल व कंडेक्टर
लोड बढ़ने के कारण रोजाना केबल और कंडेक्टर जलने लगे हैं। हालात यह है कि पिछले एक महीने के अंदर ही 20 से ज्यादा जगह पर केबल जलने से आपूर्ति बाधित हुई है। 30 से ज्यादा जगहों पर कंडेक्टर जल गए हैं और उनको ठीक करने में एक से तीन घंटे तक का समय लगता है। दिन में कंडेक्टर जलने से ज्यादा परेशानी होती है, क्योंकि रात में चिंगारी निकलने पर दिखाई दे जाती है और दिन में उसके दिखाई नहीं देने से सभी कंडेक्टर चेक करने पड़ते है।
जिले में बिजली लाइनलॉस व चोरी की समस्या बहुत अधिक है। गांवों में हालात बहुत खराब हैं और कई गांवों के लोग बिजली बिल ही नहीं भरते हैं। अगर लोग अपना पूरा बिल हर महीने भरना शुरू कर देते हैं तो उससे निगम व उपभोक्ताओं सभी का फायदा होता है।
धर्मबीर छिकारा, एक्सईएन।
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इस समय गांवों में 12 घंटे की बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है। इसमें दिन में सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक की आपूर्ति होती है। जबकि शाम को सात बजे से सुबह पांच बजे तक बिजली दी जाती है। इसमें भी कई बार रात को 2 से 3 घंटे तक की कटौती कर दी जाती है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की मांग है कि गर्मी को देखते हुए आपूर्ति को बढ़ाया जाए। रोजाना पावर हाउस पर हंगामा हो रहा है। लेकिन डिफाल्टरों को देखते हुए अधिकारी मौजूदा आपूर्ति में भी 4 से 6 घंटे और कटौती शुरू करने के मूड में हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जिले में लाइनलॉस व बिजली चोरी नहीं रुक रही है।
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हालात ये हैं कि लाइनलॉस 57 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच गया है। जिसको कम करने के लिए बिजली निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से फरमान जारी कर दिया गया है कि गांव जितना बड़ा डिफाल्टर है, उसे उतनी ही कम बिजली दी जाए। क्योंकि वहां ज्यादा बिजली देने के बावजूद बिल नहीं मिलता है और उससे राजस्व में बड़ा नुकसान हो रहा है। इस तरह उन गांवों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है, जो 10 करोड़ रुपये से ज्यादा के बकायेदार हैं। इन गांवों में उन उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा समस्या होगी जो नियमित बिल भरते हैं। अब डिफाल्टरों के चक्कर में उनको भी कटौती झेलनी पड़ेगी। लेकिन इस गर्मी में बिजली नहीं मिलने पर लोग कितना बिल भरते हैं, यह आने वाले समय में पता लगेगा।
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सीएम के गांव पर सबसे ज्यादा बकाया
बनियानी -70 करोड़
टिटौली- 58 करोड़
बहुअकबरपुर- 19 करोड़
निंदाना- 18 करोड़
खरेंटी- 17.5 करोड़
सुनारिया- 15 करोड़
फरमाणा- 12 करोड़
खरखड़ा- 10 करोड़
कलिंगा- 4 करोड़
नोट: ये केवल चंद गांव हैं। इनके अलावा भी कई गांवों पर करोड़ों बकाया हैं।
शहर की बढ़ रही परेशानी
लाइनलॉस और चोरी रोकने में नाकाम बिजली निगम ने अपना पूरा बिल भरने वाले उपभोक्ताओं को भी परेशानी में डाल दिया है। क्योंकि जिले में लाइनलॉस 57 प्रतिशत है और उसमें कमी करने के लिए शहर में अघोषित कट शुरू कर दिए गए हैं। इससे भले ही घरों में बिजली की यूनिट नहीं खर्च होती हो, लेकिन बिजली चोरी में भी गिरावट आने की बात कही जा रही है। लाइनलॉस भी कम होगा। इस तरह पूरा बिल भरने के बावजूद शहर के उपभोक्ताओं को रोजाना 2 से 5 घंटे तक की बिजली कटौती से जूझना पड़ रहा है।
3500 लाख यूनिट से 5500 लाख तक पहुंचा खर्च
अधिकारियों के अनुसार जहां फरवरी में पूरे जिले में केवल 3500 लाख यूनिट का खर्च होता था। वहीं, अप्रैल की शुरुआत में यह बढ़कर 4500 लाख यूनिट तक हो गया था। अब यह 5500 लाख यूनिट तक पहुंच गया है।
रोजाना फुंक रहे केबल व कंडेक्टर
लोड बढ़ने के कारण रोजाना केबल और कंडेक्टर जलने लगे हैं। हालात यह है कि पिछले एक महीने के अंदर ही 20 से ज्यादा जगह पर केबल जलने से आपूर्ति बाधित हुई है। 30 से ज्यादा जगहों पर कंडेक्टर जल गए हैं और उनको ठीक करने में एक से तीन घंटे तक का समय लगता है। दिन में कंडेक्टर जलने से ज्यादा परेशानी होती है, क्योंकि रात में चिंगारी निकलने पर दिखाई दे जाती है और दिन में उसके दिखाई नहीं देने से सभी कंडेक्टर चेक करने पड़ते है।
जिले में बिजली लाइनलॉस व चोरी की समस्या बहुत अधिक है। गांवों में हालात बहुत खराब हैं और कई गांवों के लोग बिजली बिल ही नहीं भरते हैं। अगर लोग अपना पूरा बिल हर महीने भरना शुरू कर देते हैं तो उससे निगम व उपभोक्ताओं सभी का फायदा होता है।
धर्मबीर छिकारा, एक्सईएन।