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रोहतक: देहरादून के पीजी संचालक पर 5 हजार रुपये जुर्माना, एक माह में ब्याज सहित लौटानी होगी फीस

Sat, 23 Sep 2023 12:54 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sat, 23 Sep 2023 12:54 AM IST
सार

जिला उपभोक्ता आयोग का फैसला आया है। डी पार्क निवासी छात्र ने 2019 में देहरादून में एलएलबी करने के लिए दाखिला लिया था। पीजी संचालक को दूसरे सेमेस्टर के लिए 15 हजार रुपये एडवांस दिए थे, बाद में पीजी संचालक ने छात्रावास आगे चलाने से मना कर दिया।

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Rohtak District Consumer Commission: 5 thousand rupees fine on PG operator of Dehradun
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरियाणा में रोहतक जिला उपभोक्ता आयोग ने उत्तराखंड के देहरादून शहर के एक पीजी संचालक पर पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया है। साथ ही आदेश दिया है कि रोहतक के छात्र से एडवांस में ली गई 15 हजार रुपये की राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाई जाए। इसके लिए आयोग ने एक माह का समय दिया है।

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डी पार्क निवासी शैलेंद्र चौधरी ने 2019 में अपने बेटे लक्षित चौधरी का दाखिला यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) देहरादून में बीबीए एलएलबी (ऑनर्स) के लिए कोर्स के लिए दिलवाया था। साथ ही देहरादून स्थित रणजीत पुरम, हरि विहार-द्वितीय के एक पीजी हॉस्टल में कमरा लिया।
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बताया गया कि पीजी में सभी बुनियादी जरूरतें उपलब्ध हैं। इसके लिए प्रति सेमेस्टर 60 हजार की राशि ली गई। तय हुआ कि इस राशि का भुगतान किस्तों में किया जा सकता है। प्रथम सेमेस्टर पूरा होने के बाद अगले सेमस्टर के लिए 25 प्रतिशत राशि एडवांस मांगी गई।
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दिसंबर 2022 में 15 हजार रुपये पीजी फीस दे दी गई, लेकिन जनवरी 2023 में पीजी संचालक ने बिना किसी पूर्व सूचना के हॉस्टल आगे चलाने से मना कर दिया। इसके लिए वित्तीय परेशानी को कारण बताया। उससे जब एडवांस दिए गए 15 हजार रुपये मांगे गए तो उसने 31 जनवरी 2023 तक राशि देने का भरोसा दिया, लेकिन राशि नहीं दी।


फोरम ने पीजी संचालक को डाक से नोटिस भेजे, लेकिन उसे रिसीव नहीं किया गया। इसके बाद व्हाट्सअप से नोटिस भेजा, लेकिन फोरम में कोई नहीं आया। अब आयोग के चेयरमैन नागेन्द्र सिंह कादियान ने फैसला लेते हुए पीजी संचालक को 15 हजा रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने व 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर देने का फैसला सुनाया है।

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