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Rohtak News: सुई-धागे से जरूरतमंद महिलाओं को बनाया स्वरोजगार, रीटा धीमान बनीं नई मिसाल
Wed, 29 Oct 2025 11:53 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 29 Oct 2025 11:53 PM IST
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29जेएनडी18: रीटा धीमान।
जींद। नरवाना रोड पर विश्वकर्मा कॉलोनी निवासी रीटा धीमान शहर में जरूरतमंद महिलाओं के लिए काम कर रही है। उन्होंने जिलेभर में लगभग 500 महिलाओं को रोजगार देकर उनके परिवार का सहारा बनी है। उनके मन में समाज सेवा का यह काम पढ़ाई के दौरान ही आया था। इसकी बदौलत आज जिले में उनकी अलग पहचान है।
रीटा धीमान की शादी वर्ष 2006 में हुई थी। इसके बाद उन्होंने स्नातक की बाद में आईटीआई में सिलाई व कटाई के कोर्स के लिए दाखिला लिया। यह कोर्स 2012 में पूरा हुआ। इस दौरान उनको आईटीआई में व समाज में ऐसी महिलाएं मिली जिनके घर पर कोई कमाने वाला नहीं थी।
उन्होंने उनकी सहायता के लिए ड्रीम अलाई वूमेन एंड चाइल्ड फाउंडेशन का गठन किया। इसमें महिलाओं की सहायता के लिए सिलाई सेंटर शुरू किया। इसमें तीन महीने महिलाओं को प्रशिक्षण दिया।
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इसके बाद उन्होंने शहर में अलग-अलग स्थानों पर सिलाई सेंटर शुरू किए। अब तक उन्होंने 30 सिलाई सेंटर शुरू किए हैं। इनमें महिलाओं को निशुल्क सिलाई सिखा रही है। वर्ष 2012 में पहला सिलाई सेंटर शुरू किया था।
उन्होंने अब तक 500 सिलाई मशीन भी भेंट की हैं ताकि जरूरतमंद महिलाएं अपना घर चला सकें। इसके अलावा आंखों की जांच शिविर लगाकर 35 से 70 वर्ष की आयु के लोगों को चश्में भी वितरित किए।
मुख्यमंत्री से भी हो चुकीं हैं सम्मानित
आठ मार्च को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने फाउंडेशन को सामाजिक कार्यकर्ता अवॉर्ड से सम्मानित किया। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा से भी फाउंडेशन को 26 जनवरी को अपने कार्यों को लेकर सम्मानित किया।
कोरोना काल में भी मास्क बनकर किए वितरित
कोरोना काल में संस्था ने अपने इन सिलाई सेंटरों पर कपड़े के मास्क बनवाए और शहर के वार्ड व गांवाें में वितरित करवाए ताकि इस बीमारी से बचाव में उनके फाउंडेशन का सहयोग भी हो सके। इसके अलावा सेनिटाइजर का भी वितरण किया।
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रीटा धीमान की शादी वर्ष 2006 में हुई थी। इसके बाद उन्होंने स्नातक की बाद में आईटीआई में सिलाई व कटाई के कोर्स के लिए दाखिला लिया। यह कोर्स 2012 में पूरा हुआ। इस दौरान उनको आईटीआई में व समाज में ऐसी महिलाएं मिली जिनके घर पर कोई कमाने वाला नहीं थी।
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उन्होंने उनकी सहायता के लिए ड्रीम अलाई वूमेन एंड चाइल्ड फाउंडेशन का गठन किया। इसमें महिलाओं की सहायता के लिए सिलाई सेंटर शुरू किया। इसमें तीन महीने महिलाओं को प्रशिक्षण दिया।
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इसके बाद उन्होंने शहर में अलग-अलग स्थानों पर सिलाई सेंटर शुरू किए। अब तक उन्होंने 30 सिलाई सेंटर शुरू किए हैं। इनमें महिलाओं को निशुल्क सिलाई सिखा रही है। वर्ष 2012 में पहला सिलाई सेंटर शुरू किया था।
उन्होंने अब तक 500 सिलाई मशीन भी भेंट की हैं ताकि जरूरतमंद महिलाएं अपना घर चला सकें। इसके अलावा आंखों की जांच शिविर लगाकर 35 से 70 वर्ष की आयु के लोगों को चश्में भी वितरित किए।
मुख्यमंत्री से भी हो चुकीं हैं सम्मानित
आठ मार्च को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने फाउंडेशन को सामाजिक कार्यकर्ता अवॉर्ड से सम्मानित किया। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा से भी फाउंडेशन को 26 जनवरी को अपने कार्यों को लेकर सम्मानित किया।
कोरोना काल में भी मास्क बनकर किए वितरित
कोरोना काल में संस्था ने अपने इन सिलाई सेंटरों पर कपड़े के मास्क बनवाए और शहर के वार्ड व गांवाें में वितरित करवाए ताकि इस बीमारी से बचाव में उनके फाउंडेशन का सहयोग भी हो सके। इसके अलावा सेनिटाइजर का भी वितरण किया।