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Rohtak News: बीमा कंपनी को दावा खारिज करना पड़ा महंगा, 89,544 रुपये 9 प्रतिशत के साथ चुकाने होंगे
Mon, 06 Jul 2026 12:45 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Mon, 06 Jul 2026 12:45 AM IST
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रोहतक। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष नगेंद्र सिंह कादियान की कोर्ट ने बीमा कंपनी को झटका दिया है। बीमा कंपनी ने बीमाधारक का दावा यह कहते हुए खारिज किया था कि उनकी चोटें दुर्घटना से पहले की है।
शिकायतकर्ता सांपला निवासी बिजेंद्र ने आयोग को बताया कि उन्होंने साल 2019 में परिवार के लिए हेल्थ ऑप्टिमा बीमा पॉलिसी ली थी। 4 जनवरी 2019 को उसके बेटे देव कुमार की राजस्थान में सड़क दुर्घटना हो गई।
पहले सरकारी अस्पताल और बाद में नई दिल्ली के इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर में उपचार कराया गया। इलाज पर करीब 89,544 रुपये खर्च हुए। बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि घायल शराब के नशे में वाहन चला रहा था और उसकी चोटें पहले से मौजूद थी।
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सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी अपने इन दोनों आरोपों के समर्थन में कोई ठोस डॉक्टरी सबूत या विशेषज्ञ की राय पेश नहीं कर सकी। एमआरआई रिपोर्ट में भी कहीं यह नहीं लिखा था कि चोटें पुरानी हैं। वहीं शराब पीकर वाहन चलाने के आरोप के समर्थन में न तो ब्लड अल्कोहल रिपोर्ट, न एमएलआर और न ही कोई विश्वसनीय दस्तावेज प्रस्तुत किया गया।
आयोग ने मंगलवार को बीमा कंपनी को 88,444 रुपये की दावा राशि पर 19 अगस्त 2020 से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने, 5,000 रुपये मानसिक प्रताड़ना और 5,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 30 दिन के भीतर भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
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शिकायतकर्ता सांपला निवासी बिजेंद्र ने आयोग को बताया कि उन्होंने साल 2019 में परिवार के लिए हेल्थ ऑप्टिमा बीमा पॉलिसी ली थी। 4 जनवरी 2019 को उसके बेटे देव कुमार की राजस्थान में सड़क दुर्घटना हो गई।
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पहले सरकारी अस्पताल और बाद में नई दिल्ली के इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर में उपचार कराया गया। इलाज पर करीब 89,544 रुपये खर्च हुए। बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि घायल शराब के नशे में वाहन चला रहा था और उसकी चोटें पहले से मौजूद थी।
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सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी अपने इन दोनों आरोपों के समर्थन में कोई ठोस डॉक्टरी सबूत या विशेषज्ञ की राय पेश नहीं कर सकी। एमआरआई रिपोर्ट में भी कहीं यह नहीं लिखा था कि चोटें पुरानी हैं। वहीं शराब पीकर वाहन चलाने के आरोप के समर्थन में न तो ब्लड अल्कोहल रिपोर्ट, न एमएलआर और न ही कोई विश्वसनीय दस्तावेज प्रस्तुत किया गया।
आयोग ने मंगलवार को बीमा कंपनी को 88,444 रुपये की दावा राशि पर 19 अगस्त 2020 से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने, 5,000 रुपये मानसिक प्रताड़ना और 5,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 30 दिन के भीतर भुगतान करने के आदेश दिए हैं।