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Rohtak News: रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण का हुआ वध
Sun, 13 Oct 2024 02:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 13 Oct 2024 02:21 AM IST
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फोटो: रामलीलारेवाड़ी। रामलीला में राम और रावण का चल रहा युद्ध। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। रेलवे काॅलोनी में श्रीराम मंदिर रेलवे ड्रामेटिक क्लब की ओर से चल रही रामलीला में शनिवार को रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण का वध किया गया। यह प्रसंग देख उत्साहित दर्शकों ने जय श्रीराम का उद्घोष किया।
रामलीला के मंचन में रावण सहायता के लिए कुंभकर्ण के पास जाता है और उसे नींद से उठवाता है। कुंभकर्ण को जब पता चलता है कि रावण ने सीता का हरण किया है तो उसने इसे अनुचित बताया। रावण कुंभकर्ण को समझा कर युद्ध भूमि में भेजता है। युद्ध में राम के हाथों कुंभकर्ण मारा जाता है। रावण मेघनाद को फिर युद्ध भूमि में भेजता है। मेघनाद का वध लक्ष्मण ने किया। मेघनाद की पत्नी सुलोचना श्रीराम के दल में आती है और अपने पति का सिर मांगती है ताकि सती हो सके। इसकी अनुमति प्रभु श्रीराम दे देते हैं और सुलोचना के अनुरोध पर युद्ध रोकने का भी ऐलान करते हैं।
रावण सीता के पास आता है और पूछता है कि क्या विचार है। रावण स्वीकार है या नहीं। सीता हर बार की तरह ना ही करती हैं। सीता को डराने के लिए वह प्रयास करता है। वहीं रावण ने अहीरावण को राम व लक्ष्मण को हर लाने को कहता है। अहीरावण राम व लक्ष्मण को राम दल से हर लाता है। जब हनुमान श्रीराम व लक्ष्मण को खोजने पाताल लोक जाते हैं तो उनकी मुलाकात मकरध्वज से होती है जो अपने आपको हनुमान का पुत्र बताता है। फिर वह जन्म की कहानी सुनाता है कि किस तरह हनुमान जी के पसीने को एक मछली पी लेती है और उसी से मकरध्वज का जन्म होता है।
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रास्ता रोकने पर हनुमान से मकरध्वज का युद्ध होता है और हनुमान जी उसको पेड़ से बांध देते हैं। पाताल नगरी में हनुमान जी का युद्ध अहीरावण से होता है। जब अहीरावण को पता चलता है कि यह हनुमान हैं तो समझ जाता है कि अब प्राण नहीं बचेंगे, क्योंकि उसको वर मिला हुआ था कि केवल हनुमान जी से ही वह मारा जाएगा। युद्ध में हनुमान जी के हाथों अहीरावण यम लोक पहुंच जाता है और राम लक्ष्मण को बचाकर लाते हैं। अंत में रावण राम से युद्ध के लिए जाता है। भयंकर युद्ध चलता है। अंत में श्रीराम ने रावण का वध दिया।
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रेवाड़ी। रेलवे काॅलोनी में श्रीराम मंदिर रेलवे ड्रामेटिक क्लब की ओर से चल रही रामलीला में शनिवार को रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण का वध किया गया। यह प्रसंग देख उत्साहित दर्शकों ने जय श्रीराम का उद्घोष किया।
रामलीला के मंचन में रावण सहायता के लिए कुंभकर्ण के पास जाता है और उसे नींद से उठवाता है। कुंभकर्ण को जब पता चलता है कि रावण ने सीता का हरण किया है तो उसने इसे अनुचित बताया। रावण कुंभकर्ण को समझा कर युद्ध भूमि में भेजता है। युद्ध में राम के हाथों कुंभकर्ण मारा जाता है। रावण मेघनाद को फिर युद्ध भूमि में भेजता है। मेघनाद का वध लक्ष्मण ने किया। मेघनाद की पत्नी सुलोचना श्रीराम के दल में आती है और अपने पति का सिर मांगती है ताकि सती हो सके। इसकी अनुमति प्रभु श्रीराम दे देते हैं और सुलोचना के अनुरोध पर युद्ध रोकने का भी ऐलान करते हैं।
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रावण सीता के पास आता है और पूछता है कि क्या विचार है। रावण स्वीकार है या नहीं। सीता हर बार की तरह ना ही करती हैं। सीता को डराने के लिए वह प्रयास करता है। वहीं रावण ने अहीरावण को राम व लक्ष्मण को हर लाने को कहता है। अहीरावण राम व लक्ष्मण को राम दल से हर लाता है। जब हनुमान श्रीराम व लक्ष्मण को खोजने पाताल लोक जाते हैं तो उनकी मुलाकात मकरध्वज से होती है जो अपने आपको हनुमान का पुत्र बताता है। फिर वह जन्म की कहानी सुनाता है कि किस तरह हनुमान जी के पसीने को एक मछली पी लेती है और उसी से मकरध्वज का जन्म होता है।
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रास्ता रोकने पर हनुमान से मकरध्वज का युद्ध होता है और हनुमान जी उसको पेड़ से बांध देते हैं। पाताल नगरी में हनुमान जी का युद्ध अहीरावण से होता है। जब अहीरावण को पता चलता है कि यह हनुमान हैं तो समझ जाता है कि अब प्राण नहीं बचेंगे, क्योंकि उसको वर मिला हुआ था कि केवल हनुमान जी से ही वह मारा जाएगा। युद्ध में हनुमान जी के हाथों अहीरावण यम लोक पहुंच जाता है और राम लक्ष्मण को बचाकर लाते हैं। अंत में रावण राम से युद्ध के लिए जाता है। भयंकर युद्ध चलता है। अंत में श्रीराम ने रावण का वध दिया।