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महिला का शरीर उसका मंदिर है, किसी ‘महमूद गजनी’ को उसे लूटने का अधिकार नहीं

Wed, 23 Dec 2015 02:12 AM IST
rape matter judge said
rape matter judge said Updated Wed, 23 Dec 2015 02:12 AM IST
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महिला का शरीर उसका मंदिर है। किसी ‘महमूद गजनी’ को उसे लूटने का अधिकार हरगिज नहीं है।\
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कोर्ट यह संदेश सभी को पूरे शोर के साथ देती है। नेपाली युवती के साथ हुए पैशाचिक और भयंकर अपराध रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस की श्रेणी में बिल्कुल फि ट बैठता है।

क्योंकि जब पीड़िता लगभग मर चुकी थी तब भी सभी दोषी उसे देखकर अपने शब्दों से क्रूर कृत्य का आनंद ले रहे थे। गैंगरेप और दरिंदगी से हत्या के मामले में सात दोषियों को सजा-ए-मौत के 256 पेज के ऐतिहासिक फैसले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंहल ने यह टिप्पणी की है। उन्होंने फैसले के माध्यम से दोषियों की क्रूरता और सभ्यता के गिरते स्तर का भी जिक्र किया।
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खेतों में छूटा शरीर भी था मंदिर
गांव बहुअकबरपुर के खेत में नहर के पास टूटी रूह अपने अस्थायी घर ‘शरीर’ को छोड़कर चली गई। जो भी यहां से गुजरा उसी की रूह कांप गई कि वो कौन थी। सवाल उठे कहां से आई थी और इतनी भयानक मौत उसे कैसे मिली। उस बेचारी रूह का विलाप कहता हुआ सुनाई देता है कि छुटा हुआ शरीर उसके लिए मंदिर था। भले ही वह विशाल संसार का वह छोटा सा अंश था। पीड़िता की नैतिकता उसके दिमाग में थी। उसका होना दूसरों की सोच पर भी निर्भर करता था। बदकिस्मती वाले दिन भगवान भी उसके साथ नहीं था, जब वह अपने घर की चौखट से बाहर आई थी। फिर इंसानी भेड़ियों के चंगुल में आ गई। उन दरिंदों ने उसके साथ दुष्कर्म और अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए। इसके बावजूद उनकी वासना शांत नहीं हुई। फिर उन्होंने अपना राक्षस रुप दिखाकर घिनौना कृत्य किया। इस बर्बरता ने न सिर्फ  उसके मंदिर को नष्ट कर दिया बल्कि उसकी निर्दोष आत्मा में भी छेद कर दिया। जाड़ों की रात में उसका शरीर दुर्दशा झेलता रहा और इस तरह वह हमेशा के लिए शांत हो गई।
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क्रू रता से देश भी हुआ बदनाम  
यह हमारी धरती है। यह ऐतिहासिकता, विविधता और समृद्ध संस्कृति के लिए जानी जाती है। इस बर्बरता ने हमारे देश को बदनाम किया है। भारतवासी दूसरों की बेटियों को भी अपना समझते हैं। पीड़िता के साथ हुई घटना बहुत गंभीर है। क्योंकि वह विदेशी धरती नेपाल की बेटी थी।

कृत्य को देखकर आज दिमाग में हिंदी की कुछ लाइनें आ रही हैं-
मरघट में तो जली है केवल मानवता
फूं की है, नूंची है, बेकसूर अस्मिता
और राख हुई है, अभिमानी सभ्यता
सभ्यता की गिरावट का ज्लवंत उदारण है-
यह प्राचीन सभ्यता के पतन का ज्लवंत उदारण है। एक बेटी को इतने भयंकर तरीके से दुनिया से रुखसत होना पड़ा। दोषियों ने उसे खेतों में लावारिस छोड़ दिया। फिर कुत्ते उसके शरीर की दावत करते रहे। यह सोचकर अंतरात्मा झकझोर उठती है। देखा जाए तो जानवरों का साम्राज्य भी ऐसे कृत्यों से दूर है। अब सवाल उठता है कि क्या उसका नाम भी उसकी पहचान से अलग कर देना चाहिए। फिर दिमाग में यही जवाब आता है कि ऐसा नहीं होना चाहिए। उसके नाम के जिक्र से भविष्य पर कोई कलंक नहीं लगेगा। क्योंकि वह दुनिया में नहीं है। हमारी रीतियों के हिसाब से वह हमारी धरती की भी बेटी है। उसकी मौत भले ही हो गई, लेकिन बेटी को उसके असली नाम सरिता उर्फ मीना के नाम से ही याद किया जाता है। इसी तरह से उसे सच्ची श्रद्धांजलि मिलेगी। आज महिलाओं पर सबसे ज्यादा अत्याचार पुरुषों की प्रतिष्ठा की वजह से होते हैं। इस केस में भी अपराधियों ने समाज की सामूहिक चेतना को झकझोर दिया है।  
(जैसा कि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंहल ने अपने फैसले में लिखा )
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