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35 एमएम झमाझम ‘वार’, व्यवस्था ‘बेकार’
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 01 Sep 2016 02:20 AM IST
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बारिश ने अधिकारियों और करोड़ों के विकास के खर्च की खोली पोल
- फोटो : amar ujala
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शहर में बुधवार सुबह 35 एमएम बारिश राहत के साथ आफत बनकर बरसी। तेज बारिश से शहर पानी-पानी हो गया। शहर की हर सड़क, गली, मोहल्ले और कॉलोनी में पानी जमा हो गया। ड्रेनेज सिस्टम जवाब दे गया। लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। करीब एक घंटे की बारिश ने अफसरों के पानी निकासी के दावों की पोल खोल दी। अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर पिछले दिनों पानी निकासी के लिए खर्च हुए करोड़ों रुपये कहां लगाए गए हैैं?
शहर में बुधवार सुबह नौ बजे तक 35 एमएम बारिश दर्ज की गई। इस बारिश से हर जगह पानी ही पानी दिखाई दिया। स्कूल, कॉलेज, पार्क, दिल्ली रोड, सोनीपत रोड, शीला बाईपास, देव कॉलोनी, मॉडल टाउन, सेक्टर-3, सेक्टर-2, सेक्टर-1, किला मोहल्ला, पाड़ा मोहल्ला, शांत मई चौक, गोहाना रोड, भिवानी स्टैंड, एकता कॉलोनी और राजेंद्र नगर आदि जगह पर पानी जमा हो गया। लोग बारिश बंद होने के बाद अपने घरों से बाहर जरूर निकले, लेकिन उनको वापस जाना पड़ा, क्योंकि सड़कों पर कई-कई फीट पानी जमा था। इससे सड़कों पर कई जगह जाम भी लगा रहा। पावर हाउस चौक के अलावा मेडिकल मोड़, अशोका चौक, सोनीपत रोड, नया बस अड्डा रोड पर दोपहर तक जाम की स्थिति बनी रही। यहां पानी भरा होने के कारण कई बार वाहन बंद हो रहे थे।
निगम ने तीन करोड़ खर्च किए, 70 कर्मचारी लगाए
बारिश के दौरान शहर में जलभराव होने से रोकने के लिए नगर निगम ने जुलाई के शुरुआत में सफाई अभियान चलाया था। इसके लिए निगम में 70 सफाई कर्मियों की कुछ समय के लिए भर्ती हुई और उस पर तीन करोड़ रुपया भी खर्च हुआ। सभी नालों की सफाई कराई गई तो सभी वार्डों में विशेष सफाई अभियान चला। सबसे बड़ी बात यह है कि अधिकारियों ने रोजाना इसका निरीक्षण भी किया, लेकिन जिस तरह से बारिश में पूरा शहर पानी-पानी हो गया है। उससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर तीन करोड़ रुपये खर्च कहां किए गए हैं?
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सेक्टर-3 में सात करोड़ लगाकर भी हालात बदतर
सेक्टर-3 में बारिश के कारण सबसे ज्यादा हालात खराब दिखाई दिए। यहां बुधवार सुबह को जितना पानी भरा था, उतना ही पानी देर शाम तक रहा और लोग घरों में कैद होकर रह गए। सेक्टर-3 में रहने वाले उम्मेद सिंह ने बताया कि बूस्टिंग स्टेशन की कभी सफाई तक नहीं की जाती है, चलाया तक नहीं जाता है। बारिश के पानी की निकासी के लिए पूर्व की सरकार में सात करोड़ रुपये का बजट था और उससे पाइप लाइन भी डाली गई थी। लेकिन वे पाइप ऐसे डाल दिए गए जो ब्लाक हो गए। कर्मचारी भी काम नहीं करते हैं। इस कारण सेक्टर केवल नाम के रह गए, सुविधाएं गांव जैसी मिल रही हैं।
तिलक नगर, बनियानी और धामड़ में घरों में घुसा पानी
लोगों के लिए बड़ी आफत तब आ गई, जब पानी उनके घरों में घुस गया। तिलक नगर, बनियानी और धामड़ में लोगों के घरों में पानी घुस गया। तिलक नगर की सभी गलियों में स्थिति खराब रही और एक दर्जन से ज्यादा घरों में पानी घुस गया। बारिश बंद होने के बाद लोगों ने काफी मशक्कत के बाद पानी निकाला। बनियानी की दलित बस्ती में रहने वाले सभी के घरों में पानी भर गया। वहां बसपा के रोहतक विधानसभा प्रभारी डॉ. अशोक कुमार ने दौरा भी किया।
फसलों के लिए बेहतर है बारिश, बीमारी बढ़ने का डर
कृषि उपनिदेशक डॉ. मदनमोहन ने बताया कि बुधवार सुबह को 35 मिमी बारिश हुई है। यह फसलों के लिए काफी अच्छी है, क्योंकि धान और गन्ने में पानी रुक भी जाता है तो उससे कोई नुकसान नहीं होगी। काटन और बाजरा में पानी रुकना नहीं चाहिए। उनमें पानी रुकने से गलन शुरू हो जाती है। इसके अलावा चिकित्सकों का मानना है कि जिस तरह से बारिश हो रही है और जलभराव हो गया है, उससे बीमारी फैलने का डर है। इसलिए जल निकासी बहुत जरूरी है।
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शहर में बुधवार सुबह नौ बजे तक 35 एमएम बारिश दर्ज की गई। इस बारिश से हर जगह पानी ही पानी दिखाई दिया। स्कूल, कॉलेज, पार्क, दिल्ली रोड, सोनीपत रोड, शीला बाईपास, देव कॉलोनी, मॉडल टाउन, सेक्टर-3, सेक्टर-2, सेक्टर-1, किला मोहल्ला, पाड़ा मोहल्ला, शांत मई चौक, गोहाना रोड, भिवानी स्टैंड, एकता कॉलोनी और राजेंद्र नगर आदि जगह पर पानी जमा हो गया। लोग बारिश बंद होने के बाद अपने घरों से बाहर जरूर निकले, लेकिन उनको वापस जाना पड़ा, क्योंकि सड़कों पर कई-कई फीट पानी जमा था। इससे सड़कों पर कई जगह जाम भी लगा रहा। पावर हाउस चौक के अलावा मेडिकल मोड़, अशोका चौक, सोनीपत रोड, नया बस अड्डा रोड पर दोपहर तक जाम की स्थिति बनी रही। यहां पानी भरा होने के कारण कई बार वाहन बंद हो रहे थे।
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निगम ने तीन करोड़ खर्च किए, 70 कर्मचारी लगाए
बारिश के दौरान शहर में जलभराव होने से रोकने के लिए नगर निगम ने जुलाई के शुरुआत में सफाई अभियान चलाया था। इसके लिए निगम में 70 सफाई कर्मियों की कुछ समय के लिए भर्ती हुई और उस पर तीन करोड़ रुपया भी खर्च हुआ। सभी नालों की सफाई कराई गई तो सभी वार्डों में विशेष सफाई अभियान चला। सबसे बड़ी बात यह है कि अधिकारियों ने रोजाना इसका निरीक्षण भी किया, लेकिन जिस तरह से बारिश में पूरा शहर पानी-पानी हो गया है। उससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर तीन करोड़ रुपये खर्च कहां किए गए हैं?
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सेक्टर-3 में सात करोड़ लगाकर भी हालात बदतर
सेक्टर-3 में बारिश के कारण सबसे ज्यादा हालात खराब दिखाई दिए। यहां बुधवार सुबह को जितना पानी भरा था, उतना ही पानी देर शाम तक रहा और लोग घरों में कैद होकर रह गए। सेक्टर-3 में रहने वाले उम्मेद सिंह ने बताया कि बूस्टिंग स्टेशन की कभी सफाई तक नहीं की जाती है, चलाया तक नहीं जाता है। बारिश के पानी की निकासी के लिए पूर्व की सरकार में सात करोड़ रुपये का बजट था और उससे पाइप लाइन भी डाली गई थी। लेकिन वे पाइप ऐसे डाल दिए गए जो ब्लाक हो गए। कर्मचारी भी काम नहीं करते हैं। इस कारण सेक्टर केवल नाम के रह गए, सुविधाएं गांव जैसी मिल रही हैं।
तिलक नगर, बनियानी और धामड़ में घरों में घुसा पानी
लोगों के लिए बड़ी आफत तब आ गई, जब पानी उनके घरों में घुस गया। तिलक नगर, बनियानी और धामड़ में लोगों के घरों में पानी घुस गया। तिलक नगर की सभी गलियों में स्थिति खराब रही और एक दर्जन से ज्यादा घरों में पानी घुस गया। बारिश बंद होने के बाद लोगों ने काफी मशक्कत के बाद पानी निकाला। बनियानी की दलित बस्ती में रहने वाले सभी के घरों में पानी भर गया। वहां बसपा के रोहतक विधानसभा प्रभारी डॉ. अशोक कुमार ने दौरा भी किया।
फसलों के लिए बेहतर है बारिश, बीमारी बढ़ने का डर
कृषि उपनिदेशक डॉ. मदनमोहन ने बताया कि बुधवार सुबह को 35 मिमी बारिश हुई है। यह फसलों के लिए काफी अच्छी है, क्योंकि धान और गन्ने में पानी रुक भी जाता है तो उससे कोई नुकसान नहीं होगी। काटन और बाजरा में पानी रुकना नहीं चाहिए। उनमें पानी रुकने से गलन शुरू हो जाती है। इसके अलावा चिकित्सकों का मानना है कि जिस तरह से बारिश हो रही है और जलभराव हो गया है, उससे बीमारी फैलने का डर है। इसलिए जल निकासी बहुत जरूरी है।