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कोरोना संक्रमण से सुरक्षित है गर्भस्थ शिशु
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कोरोना से प्रसूता का गर्भस्थ शिशु सुरक्षित है। संक्रमण के दौरान नवजात के कोरोना संक्रमित होने की संभावना न के बराबर है। यह हम नहीं, प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस के आंकड़े बोल रहे हैं। कोरोना काल में पीजीआई के महिला रोग एवं प्रसूति विभाग की ओर से किए गए शोध में कुछ यही निकलकर सामने आया है। शोध में 250 प्रसूताओं को शामिल किया गया। इनमें से 248 शिशु स्वस्थ पैदा हुए, जबकि दो पर संक्रमण का असर दिखा।
दरअसल, कोराना की पहली लहर के साथ मार्च 2020 में ही यह शोध शुरू हुआ था। इसमें उन सभी गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया, जो मार्च 2020 से जून 2021 के बीच पीजीआई में प्रसूति के लिए आई। कोरोना की दोनों लहरों में इन महिलाओं को प्रसूति के लिए पीजीआई के महिला रोग व प्रसूति विभाग में दाखिल किया गया। इस समयावधि में करीब 250 संक्रमित महिलाओं की प्रसूति हुई। इनमें 50 प्रतिशत प्रसूति अप्रैल व मई 2021 के दौरान हुई। यह कोरोना की दूसरी लहर थी। इस दौरान देश भर में महामारी कहर बरपा रही थी। इनमें से अनेक प्रसूति ऑपरेशन (सिजेरियन) से भी हुई। प्रसूति के बाद जब नवजात की जांच की गई तो कोई भी बच्चा कोरोना संक्रमित नहीं पाया गया।
गर्भवती महिलाओं की कराई गई आरटीपीसीआर जांच
स्त्री रोग विभाग में आने के बाद गर्भवती महिलाओं की पहले आरटीपीसीआर जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट आने तक उन्हें 24 घंटे के लिए आइसोलेशन में रखा गया। वह संक्रमित होती तो उसे तुरंत गर्भवती महिलाओं के लिए बनाए गए कोविड वार्ड में भेज दिया जाता। वहीं उसकी डिलिवरी कराई गई। डिलिवरी के तुरंत बाद नवजात की कोरोना जांच कराई गई। रिपोर्ट निगेटिव आने पर उसे नीकू में भर्ती किया जाता।
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कोरोना संक्रमित महिलाओं की प्रसूति के केसों में से कई सिजेरियन डिलिवरी कराना चुनौतीपूर्ण रहा। कोरोना की पहली लहर में गर्भवती महिलाओं और नवजात पर महामारी के प्रभाव की कोई जानकारी नहीं थी। चिकित्सकों व नर्सों ने इस चुनौती को स्वीकार किया व कोविड संक्रमित गर्भवती महिलाओं की सिजेरियन डिलिवरी करवाई और प्रदेश में सबसे अधिक सिजेरियन डिलिवरी करवाने वाला संस्थान पीजीआई बना। इस शोध में करीब 250 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया था।
- डॉ. पुष्पा दहिया, सीनियर प्रोफेसर, गायनी विभाग एवं चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमएस
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दरअसल, कोराना की पहली लहर के साथ मार्च 2020 में ही यह शोध शुरू हुआ था। इसमें उन सभी गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया, जो मार्च 2020 से जून 2021 के बीच पीजीआई में प्रसूति के लिए आई। कोरोना की दोनों लहरों में इन महिलाओं को प्रसूति के लिए पीजीआई के महिला रोग व प्रसूति विभाग में दाखिल किया गया। इस समयावधि में करीब 250 संक्रमित महिलाओं की प्रसूति हुई। इनमें 50 प्रतिशत प्रसूति अप्रैल व मई 2021 के दौरान हुई। यह कोरोना की दूसरी लहर थी। इस दौरान देश भर में महामारी कहर बरपा रही थी। इनमें से अनेक प्रसूति ऑपरेशन (सिजेरियन) से भी हुई। प्रसूति के बाद जब नवजात की जांच की गई तो कोई भी बच्चा कोरोना संक्रमित नहीं पाया गया।
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गर्भवती महिलाओं की कराई गई आरटीपीसीआर जांच
स्त्री रोग विभाग में आने के बाद गर्भवती महिलाओं की पहले आरटीपीसीआर जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट आने तक उन्हें 24 घंटे के लिए आइसोलेशन में रखा गया। वह संक्रमित होती तो उसे तुरंत गर्भवती महिलाओं के लिए बनाए गए कोविड वार्ड में भेज दिया जाता। वहीं उसकी डिलिवरी कराई गई। डिलिवरी के तुरंत बाद नवजात की कोरोना जांच कराई गई। रिपोर्ट निगेटिव आने पर उसे नीकू में भर्ती किया जाता।
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कोरोना संक्रमित महिलाओं की प्रसूति के केसों में से कई सिजेरियन डिलिवरी कराना चुनौतीपूर्ण रहा। कोरोना की पहली लहर में गर्भवती महिलाओं और नवजात पर महामारी के प्रभाव की कोई जानकारी नहीं थी। चिकित्सकों व नर्सों ने इस चुनौती को स्वीकार किया व कोविड संक्रमित गर्भवती महिलाओं की सिजेरियन डिलिवरी करवाई और प्रदेश में सबसे अधिक सिजेरियन डिलिवरी करवाने वाला संस्थान पीजीआई बना। इस शोध में करीब 250 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया था।
- डॉ. पुष्पा दहिया, सीनियर प्रोफेसर, गायनी विभाग एवं चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमएस