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पुलिस पर टीकरी बॉर्डर पर पहुंचने वाले किसानों को परेशान करने का आरोप
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बहादुरगढ़। कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर किसान साढ़े तीन माह से टीकरी बॉर्डर पर डटे हुए हैं। विभिन्न प्रदेशों से भी किसानों के समर्थन में संगठनों के नेता पहुंच रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन नरवाना जींद के प्रधान जोगेंद्र जैन ने हरियाणा पुलिस पर आरोप लगाया है कि एक दिन पहले भिवानी से बहादुरगढ़ आंदोलन में किसान आ रहे थे। उन्हें केएमपी के नजदीक पुलिस द्वारा रोका गया और उनके पहचान पत्र मांगे। उन्होंने कहा कि ऐसा कर सरकार उनके आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। मगर आंदोलन कमजोर होने के बजाय लगातार मजबूत हो रहा है।
नैन ने कहा कि केएमपी के नजदीक भिवानी के किसान आंदोलन में आ रहे थे, जिनको स्थानीय पुलिस ने रोककर उनके किसान होने के पहचान पत्र मांगे। उन्होंने कहा कि पुलिस किसानों को किसी भी तरह से परेशान न करें, किसानों को आंदोलन में आने से न रोके। उन्होंने बहादुरगढ़ प्रशासन पर भी आरोप लगाया और कहा कि दो दिन पहले मंगलवार को रात के समय आंधी और तेज बरसात आई थी। उसके बाद से किसानों के पड़ाव की बिजली सप्लाई बंद है। उन्होंने एसडीएम बहादुरगढ़ से अपील है कि किसानों के पड़ाव की बिजली ठीक करवाई जाए, ताकि उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।
वहीं हरियाणा किसान मंच सिरसा के प्रधान प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि किसानों को आंदोलन में डटे करीब साढ़े तीन माह हो चुके हैं। दिल्ली के सभी बॉर्डरों पर लगातार किसानों की संख्या बढ़ रही है। सरकार इस आंदोलन को कमजोर करने के नए-नए हथकंडे अपना रही है। उन्होंने कहा कि अब गर्मी का मौसम आ चुका है। गर्मी और बारिश से बचाव किसान लगातार तंबू बना रहे हैं। उन्होंने किसानों से कहा कि अब फसल कटाई का समय आ गया है, किसान को अपने खेतों में फसल को समय पर काटना होगा।
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उधर, संयुक्त किसान मोर्चा की लीगल कमेटी के सदस्य वकील ने टीकरी बॉर्डर पर किसानों को बताया कि मोर्चा के वकीलों ने 26 जनवरी को दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 151 किसानों में से 126 किसानों की जमानत करवाई गई है। उन्होंने कहा कि अब सरकार किसानों को पुलिस के द्वारा नोटिस भिजवा रही है, यह नोटिस किसी भी किसान को नहीं लेना है और न ही उसका कोई जवाब देने के लिए किसी थाना में जाना है। मामले में किसान संयुक्त किसान मोर्चा के वकीलों की कमेटी से बातचीत कर सकता है।
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नैन ने कहा कि केएमपी के नजदीक भिवानी के किसान आंदोलन में आ रहे थे, जिनको स्थानीय पुलिस ने रोककर उनके किसान होने के पहचान पत्र मांगे। उन्होंने कहा कि पुलिस किसानों को किसी भी तरह से परेशान न करें, किसानों को आंदोलन में आने से न रोके। उन्होंने बहादुरगढ़ प्रशासन पर भी आरोप लगाया और कहा कि दो दिन पहले मंगलवार को रात के समय आंधी और तेज बरसात आई थी। उसके बाद से किसानों के पड़ाव की बिजली सप्लाई बंद है। उन्होंने एसडीएम बहादुरगढ़ से अपील है कि किसानों के पड़ाव की बिजली ठीक करवाई जाए, ताकि उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।
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वहीं हरियाणा किसान मंच सिरसा के प्रधान प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि किसानों को आंदोलन में डटे करीब साढ़े तीन माह हो चुके हैं। दिल्ली के सभी बॉर्डरों पर लगातार किसानों की संख्या बढ़ रही है। सरकार इस आंदोलन को कमजोर करने के नए-नए हथकंडे अपना रही है। उन्होंने कहा कि अब गर्मी का मौसम आ चुका है। गर्मी और बारिश से बचाव किसान लगातार तंबू बना रहे हैं। उन्होंने किसानों से कहा कि अब फसल कटाई का समय आ गया है, किसान को अपने खेतों में फसल को समय पर काटना होगा।
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उधर, संयुक्त किसान मोर्चा की लीगल कमेटी के सदस्य वकील ने टीकरी बॉर्डर पर किसानों को बताया कि मोर्चा के वकीलों ने 26 जनवरी को दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 151 किसानों में से 126 किसानों की जमानत करवाई गई है। उन्होंने कहा कि अब सरकार किसानों को पुलिस के द्वारा नोटिस भिजवा रही है, यह नोटिस किसी भी किसान को नहीं लेना है और न ही उसका कोई जवाब देने के लिए किसी थाना में जाना है। मामले में किसान संयुक्त किसान मोर्चा के वकीलों की कमेटी से बातचीत कर सकता है।