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प्लाट लेकर घर नहीं बनवाए, अब देना पड़ेगा ज्यादा डेवलपमेंट चार्ज
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 08 Oct 2016 01:25 AM IST
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दोनों प्रापर्टी आईडी और नक्शे अलग-अलग नाम से जारी किये गये
- फोटो : demo pic
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सरकार के डेवलपमेंट चार्ज बढ़ाए जाने से शहर के करीब 32 हजार प्लाट धारकों को झटका लगा है। इन्होंने प्लाट खरीदकर उस पर निर्माण नहीं कराया है। अब यदि इस प्लाट पर निर्माण करेंगे तो बढ़ा हुआ डेवलपमेंट चार्ज देना होगा। खाली प्लाट का आंकड़ा नगर निगम के रिकार्ड में दर्ज है। किसी भी जगह निर्माण कार्य किया जाता है तो निगम को तुरंत पता चल जाएगा।
यही नहीं, यदि किसी ने पहले बनाए मकान या किसी निर्माण में थोड़ी भी बढ़ोतरी करनी चाही तो उसे पुराने और नये डेवलपमेंट चार्ज के अंतर का भुगतान करना होगा।
सरकार ने नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका क्षेत्र में निर्माण करने पर डेवलपमेंट चार्ज बढ़ा दिया है। इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ता दिख रहा है, जिन्होंने प्लाट पहले खरीद लिया और अभी तक निर्माण नहीं किया है। अब उनको निर्माण करने के लिए पहले के मुकाबले कई गुणा ज्यादा डेवलपमेंट चार्ज देना होगा। सरकार की ओर से जारी आदेश तुरंत लागू कर दिया गया है। अब नक्शे के लिए आवेदन करने वालों के लिए यह नियम लागू होगा।
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नगर निगम ने पिछले साल एक सर्वे कराया था। इसके अनुसार नगर निगम क्षेत्र में 32 हजार प्लाट धारक ऐसे हैं जिन्होंने निर्माण कार्य नहीं कराया है। अब वह निर्माण कार्य करते हैं तो बढ़ा डेवलपमेंट चार्ज देना होगा। यही नहीं, किसी ने पुराने मकान को दोबारा बनाने का प्लान बनाया है तो उस पर भी अतिरिक्त भार पड़ेगा। ऐसे सैकड़ों आवेदन नगर निगम कार्यालय में आए हैं, जिन्होंने नक्शा पास कराने की फाइल लगाई है।
इस तरह बढ़ाया डेवलपमेंट चार्ज
शहरी स्थानीय निकाय के प्रमुख सचिव आनंद मोहन शरण की ओर से जारी पत्र में बढ़े डेवलपमेंट चार्ज की लिस्ट दी गई है। पहले जहां रिहायशी जगहों पर 120 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से डेवलपमेंट चार्ज लिया जाता था, वहीं अब 1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से चार्ज लिया जाएगा। इसे भले ही वर्ग गज से वर्ग मीटर में कर दिया गया है, लेकिन इससे लंबाई और चौड़ाई में खास अंतर नहीं आया है। एक गज में 9 वर्ग फीट होता है और 10.76 वर्ग फीट में एक वर्ग मीटर होता है। इसलिए कोई भी निर्माण कार्य करने से भार सात गुना तक पड़ना तय है। वहीं, कामर्शियल के लिए डेवलपमेंट चार्ज जहां पहले एक हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर होते थे, उसे दोगुना करके दो हजार रुपये कर दिया गया है।
एक ईंट भी लगाई तो पूरे मकान का देना होगा बढ़ा चार्ज
नये नियम ने उन मकान मालिकों को भी झटका दिया है, जिन्होंने अपना मकान बनाया है, लेकिन उसमें और निर्माण कराना चाहते हैं। वह भले ही कुछ हिस्से में निर्माण करें, लेकिन उनको दोबारा से पूरे मकान का डेवलपमेंट चार्ज देना होगा। मसलन, किसी का 200 गज का प्लाट है और उसने 150 गज में निर्माण कार्य किया है। बाकी 50 गज में निर्माण कार्य करना चाहता है तो उसको नक्शा पास कराने के लिए पूरे 200 गज का नए के हिसाब से डेवलपमेंट चार्ज देना होगा। उनका जितना डेवलपमेंट चार्ज जमा है, उसे उसमें से कम कर दिया जाएगा।
नगर निगम के बिल्डिंग इंस्पेक्टर जितेंद्र ने बताया कि किसी को अब नक्शा पास कराना है तो उसे सरकार के नियमों के हिसाब से नया डेवलपमेंट चार्ज देना होगा। इसके अलावा कोई पहले बने मकान में अन्य निर्माण करना चाहता है तो उसे पहले जमा कराए गए डेवलपमेंट चार्ज व अब नए डेवलपमेंट चार्ज के बीच का अंतर विभाग में जमा कराना होगा। तभी उन्हें निर्माण की अनुमति दी जाएगी।
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यही नहीं, यदि किसी ने पहले बनाए मकान या किसी निर्माण में थोड़ी भी बढ़ोतरी करनी चाही तो उसे पुराने और नये डेवलपमेंट चार्ज के अंतर का भुगतान करना होगा।
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सरकार ने नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका क्षेत्र में निर्माण करने पर डेवलपमेंट चार्ज बढ़ा दिया है। इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ता दिख रहा है, जिन्होंने प्लाट पहले खरीद लिया और अभी तक निर्माण नहीं किया है। अब उनको निर्माण करने के लिए पहले के मुकाबले कई गुणा ज्यादा डेवलपमेंट चार्ज देना होगा। सरकार की ओर से जारी आदेश तुरंत लागू कर दिया गया है। अब नक्शे के लिए आवेदन करने वालों के लिए यह नियम लागू होगा।
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नगर निगम ने पिछले साल एक सर्वे कराया था। इसके अनुसार नगर निगम क्षेत्र में 32 हजार प्लाट धारक ऐसे हैं जिन्होंने निर्माण कार्य नहीं कराया है। अब वह निर्माण कार्य करते हैं तो बढ़ा डेवलपमेंट चार्ज देना होगा। यही नहीं, किसी ने पुराने मकान को दोबारा बनाने का प्लान बनाया है तो उस पर भी अतिरिक्त भार पड़ेगा। ऐसे सैकड़ों आवेदन नगर निगम कार्यालय में आए हैं, जिन्होंने नक्शा पास कराने की फाइल लगाई है।
इस तरह बढ़ाया डेवलपमेंट चार्ज
शहरी स्थानीय निकाय के प्रमुख सचिव आनंद मोहन शरण की ओर से जारी पत्र में बढ़े डेवलपमेंट चार्ज की लिस्ट दी गई है। पहले जहां रिहायशी जगहों पर 120 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से डेवलपमेंट चार्ज लिया जाता था, वहीं अब 1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से चार्ज लिया जाएगा। इसे भले ही वर्ग गज से वर्ग मीटर में कर दिया गया है, लेकिन इससे लंबाई और चौड़ाई में खास अंतर नहीं आया है। एक गज में 9 वर्ग फीट होता है और 10.76 वर्ग फीट में एक वर्ग मीटर होता है। इसलिए कोई भी निर्माण कार्य करने से भार सात गुना तक पड़ना तय है। वहीं, कामर्शियल के लिए डेवलपमेंट चार्ज जहां पहले एक हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर होते थे, उसे दोगुना करके दो हजार रुपये कर दिया गया है।
एक ईंट भी लगाई तो पूरे मकान का देना होगा बढ़ा चार्ज
नये नियम ने उन मकान मालिकों को भी झटका दिया है, जिन्होंने अपना मकान बनाया है, लेकिन उसमें और निर्माण कराना चाहते हैं। वह भले ही कुछ हिस्से में निर्माण करें, लेकिन उनको दोबारा से पूरे मकान का डेवलपमेंट चार्ज देना होगा। मसलन, किसी का 200 गज का प्लाट है और उसने 150 गज में निर्माण कार्य किया है। बाकी 50 गज में निर्माण कार्य करना चाहता है तो उसको नक्शा पास कराने के लिए पूरे 200 गज का नए के हिसाब से डेवलपमेंट चार्ज देना होगा। उनका जितना डेवलपमेंट चार्ज जमा है, उसे उसमें से कम कर दिया जाएगा।
नगर निगम के बिल्डिंग इंस्पेक्टर जितेंद्र ने बताया कि किसी को अब नक्शा पास कराना है तो उसे सरकार के नियमों के हिसाब से नया डेवलपमेंट चार्ज देना होगा। इसके अलावा कोई पहले बने मकान में अन्य निर्माण करना चाहता है तो उसे पहले जमा कराए गए डेवलपमेंट चार्ज व अब नए डेवलपमेंट चार्ज के बीच का अंतर विभाग में जमा कराना होगा। तभी उन्हें निर्माण की अनुमति दी जाएगी।