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Rohtak News: पर्यावरण के साथ हमें भी बीमार बना रहा प्लास्टिक स्ट्रॉ
Wed, 03 Jan 2024 12:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 03 Jan 2024 12:57 AM IST
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सिमरन आनंद
रोहतक। हम अपने स्वाद व सेहत की आड़ में पर्यावरण के साथ खुद को भी बीमार बना रहे हैं। रोजाना जूस, कोल्ड ड्रिंक व अन्य पेय पदार्थों के साथ बड़ी संख्या में प्लास्टिक कचरा बना रहे हैं। स्ट्रॉ के रूप में फैल रहा यह कचरा भले सामान्य नजर आए, मगर इसके परिणाम भयावह हैं। प्लास्टिक प्रदूषण फैलाने के साथ हमारे शरीर में जाकर हानिकारक रोगों का कारण बनता जा रहा है।
ऐसे में पर्यावरण को साफ सुथरा व प्रदूषण मुक्त बनाने की जरूरत है। यह कहना है एमडीयू के पर्यावरण विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. राजेश धनखड़ का। नेशनल ड्रिंकिंग स्ट्रॉ डे पर विभागाध्यक्ष से हुई खास बातचीत में उन्होंने यह चिंता जाहिर की।
प्रोफेसर ने बताया कि प्लास्टिक स्ट्रॉ को प्रयोग खतरनाक है। प्लास्टिक का स्ट्रॉ खुद से मिट्टी में नहीं घुलता है। इस कारण वह कूड़े के रूप में रहकर पर्यावरण को प्रदूषित करता है। जबकि पेपर स्ट्रॉ आसानी से मिट्टी में घुल जाता है या रिसाइकल होकर दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार होता है। अधिकतर बच्चे स्ट्रॉ का इस्तेमाल पसंद करते हैं। जबकि असल में यह प्लास्टिक कचरे का हिस्सा है। यह न गलता है न सड़ता है।
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बॉक्स
प्लास्टिक स्ट्रॉ का स्वास्थ्य पर असर
प्लास्टिक स्ट्रॉ का एक बार इस्तेमाल करने से स्वास्थ्य पर सीधा असर नहीं पड़ता है। मगर लंबे समय तक रोजाना प्लास्टिक स्ट्रॉ का इस्तेमाल करने से शरीर में हॉर्मोन व्यवधान व संभावित अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने की संभावना रहती है। 2020 में जारी हुई अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण जर्नल के शोधकर्ताओं के अनुसार प्लेसेंटा शिशु के विकास में सहायता करने और बाहरी वातावरण के साथ इंटरफेस के रूप में कार्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संभावित हानिकारक प्लास्टिक कणों की उपस्थिति, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
बॉक्स
वर्तमान समय में कैंसर का एक मुख्य कारण यह भी है कि पानी के जरिए प्लास्टिक माइक्रोप्लास्टिक के रूप में भोजन व हमारे शरीर तक पहुंच रहा है। पेपर स्ट्रॉ के इस्तेमाल से पर्यावरण के बचाव के साथ अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा सकता है।
-जसमेर हुड्डा, संस्थापक, सुनो नहरों की पुकार मिशन।
वर्जन
प्लास्टिक स्ट्रॉ पर्यावरण के साथ स्वास्थ्य पर असर डालता है। प्लास्टिक स्ट्रॉ का लगातार इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। होटल व दुकानों पर अब पेपर स्ट्रॉ का इस्तेमाल होने लगा है, मगर अभी भी प्लास्टिक स्ट्रॉ जूस व कोल्ड ड्रिंक की दुकानों पर ज्यादा मिलते हैं।
-डॉ. नरेंद्र रोहिल्ला, आरएमओ, सिविल अस्पताल
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रोहतक। हम अपने स्वाद व सेहत की आड़ में पर्यावरण के साथ खुद को भी बीमार बना रहे हैं। रोजाना जूस, कोल्ड ड्रिंक व अन्य पेय पदार्थों के साथ बड़ी संख्या में प्लास्टिक कचरा बना रहे हैं। स्ट्रॉ के रूप में फैल रहा यह कचरा भले सामान्य नजर आए, मगर इसके परिणाम भयावह हैं। प्लास्टिक प्रदूषण फैलाने के साथ हमारे शरीर में जाकर हानिकारक रोगों का कारण बनता जा रहा है।
ऐसे में पर्यावरण को साफ सुथरा व प्रदूषण मुक्त बनाने की जरूरत है। यह कहना है एमडीयू के पर्यावरण विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. राजेश धनखड़ का। नेशनल ड्रिंकिंग स्ट्रॉ डे पर विभागाध्यक्ष से हुई खास बातचीत में उन्होंने यह चिंता जाहिर की।
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प्रोफेसर ने बताया कि प्लास्टिक स्ट्रॉ को प्रयोग खतरनाक है। प्लास्टिक का स्ट्रॉ खुद से मिट्टी में नहीं घुलता है। इस कारण वह कूड़े के रूप में रहकर पर्यावरण को प्रदूषित करता है। जबकि पेपर स्ट्रॉ आसानी से मिट्टी में घुल जाता है या रिसाइकल होकर दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार होता है। अधिकतर बच्चे स्ट्रॉ का इस्तेमाल पसंद करते हैं। जबकि असल में यह प्लास्टिक कचरे का हिस्सा है। यह न गलता है न सड़ता है।
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प्लास्टिक स्ट्रॉ का स्वास्थ्य पर असर
प्लास्टिक स्ट्रॉ का एक बार इस्तेमाल करने से स्वास्थ्य पर सीधा असर नहीं पड़ता है। मगर लंबे समय तक रोजाना प्लास्टिक स्ट्रॉ का इस्तेमाल करने से शरीर में हॉर्मोन व्यवधान व संभावित अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने की संभावना रहती है। 2020 में जारी हुई अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण जर्नल के शोधकर्ताओं के अनुसार प्लेसेंटा शिशु के विकास में सहायता करने और बाहरी वातावरण के साथ इंटरफेस के रूप में कार्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संभावित हानिकारक प्लास्टिक कणों की उपस्थिति, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
बॉक्स
वर्तमान समय में कैंसर का एक मुख्य कारण यह भी है कि पानी के जरिए प्लास्टिक माइक्रोप्लास्टिक के रूप में भोजन व हमारे शरीर तक पहुंच रहा है। पेपर स्ट्रॉ के इस्तेमाल से पर्यावरण के बचाव के साथ अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा सकता है।
-जसमेर हुड्डा, संस्थापक, सुनो नहरों की पुकार मिशन।
वर्जन
प्लास्टिक स्ट्रॉ पर्यावरण के साथ स्वास्थ्य पर असर डालता है। प्लास्टिक स्ट्रॉ का लगातार इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। होटल व दुकानों पर अब पेपर स्ट्रॉ का इस्तेमाल होने लगा है, मगर अभी भी प्लास्टिक स्ट्रॉ जूस व कोल्ड ड्रिंक की दुकानों पर ज्यादा मिलते हैं।
-डॉ. नरेंद्र रोहिल्ला, आरएमओ, सिविल अस्पताल