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Rohtak News: पीजीआई के वार्ड तीन में 34 दिन में दूसरी बार गिरा छत से प्लास्टर
Wed, 23 Jul 2025 02:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 23 Jul 2025 02:14 AM IST
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पीजीआई रोहतक के वार्ड 3 के ड्यूटी रूम में नमी के कारण फूला हुआ छत का प्लास्टर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। पीजीआई के वार्ड नंबर 3 में मंगलवार सुबह करीब 6 बजे डॉक्टरों के ड्यूटी रूम की छत का प्लास्टर गिर गया। हादसे के समय रूम से सटे केबिन में एक महिला डॉक्टर मौजूद थीं। तेज आवाज के साथ छत के प्लास्टर का बड़ा हिस्सा गिरने से कमरे में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि मलबा डॉक्टर से कुछ दूरी पर गिरा और वह चोटिल होने से बच गई। इसी वार्ड में 34 दिन के अंदर दूसरी बार प्लास्टर गिरने की घटना हुई है।
वार्ड नंबर 3 में 80 मरीज भर्ती हैं और ड्यूटी रूम में हादसे के बाद डॉक्टरों और स्टाफ के बीच चिंता का माहौल है। हादसे के बाद डॉक्टरों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा, अगर कोई उस समय छत के ठीक नीचे होता तो उसकी जान को खतरा हो सकता था।
सिर्फ ड्यूटी रूम में ही नहीं बल्कि पूरे वार्ड की छत के प्लास्टर में नमी है। जगह-जगह से प्लास्टर फूला हुआ है और कभी भी गिर सकता है। इसके बावजूद पीजीआई प्रशासन की ओर से उचित कदम नहीं उठाया गया है।
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18 जून को हुए हादसे में मरीज को आए थे आठ टांके
यह कोई पहली घटना नहीं है। 18 जून को भी इसी वार्ड में एक मरीज के ऊपर प्लास्टर गिरा था। उसके सिर में गंभीर चोट आई थी और आठ टांके लगाने पड़े थे। मरीज टीबी का इलाज करवा रहा था। हादसे के बाद उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराना पड़ा था। उस घटना के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
भवन की हालत बेहद जर्जर, लगातार हो रहे हादसे
पीजीआई की इमारतें जर्जर हालत में पहुंच चुकी हैं। ड्यूटी रूम हो, वार्ड या छात्रावास, हर जगह से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। इन हादसों ने न केवल मरीजों बल्कि डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बार-बार हो रहे इन हादसों से पीजीआई प्रशासन और सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली दोनों की लापरवाही उजागर हो रही है।
नर्सिंग कॉलेज छात्रावास में भी गिरा था प्लास्टर, छात्राएं हुई थीं घायल
16 जुलाई 2023 को पीजीआई के नर्सिंग कॉलेज के छात्रावास में भी इसी तरह की घटना सामने आई थी। छात्राएं जब खाना खा रही थीं, तब छत का प्लास्टर गिर गया था। हादसे में तीन छात्राएं घायल हो गईं और दो के सिर पर टांके लगाने पड़े थे। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि घटना के एक घंटे बाद भी प्रशासन का कोई प्रतिनिधि छात्रावास नहीं पहुंचा था। साथ रहने वाली छात्राओं ने ही घायलों को स्कूटी पर ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया था।
अब तक कोई ठोस कदम नहीं, मरीजों व स्टाफ की जान जोखिम में
लगातार हो रहीं घटनाओं के बावजूद अब तक पीजीआई प्रशासन ने इन वार्डों और भवनों की मरम्मत या पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस योजना नहीं बनाई है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो किसी दिन जानलेवा हादसा हो सकता है।
अभी यह मामला हमारे संज्ञान में नहीं आया है। इसकी पूरी जानकारी ली जा रही है। आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पहले जो हादसा हुआ था, उसमें पीडब्ल्यूडी को मरम्मत के लिए निर्देश दिए जा चुके हैं।
- डाॅ. एसके सिंघल, निदेशक, पीजीआई।
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रोहतक। पीजीआई के वार्ड नंबर 3 में मंगलवार सुबह करीब 6 बजे डॉक्टरों के ड्यूटी रूम की छत का प्लास्टर गिर गया। हादसे के समय रूम से सटे केबिन में एक महिला डॉक्टर मौजूद थीं। तेज आवाज के साथ छत के प्लास्टर का बड़ा हिस्सा गिरने से कमरे में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि मलबा डॉक्टर से कुछ दूरी पर गिरा और वह चोटिल होने से बच गई। इसी वार्ड में 34 दिन के अंदर दूसरी बार प्लास्टर गिरने की घटना हुई है।
वार्ड नंबर 3 में 80 मरीज भर्ती हैं और ड्यूटी रूम में हादसे के बाद डॉक्टरों और स्टाफ के बीच चिंता का माहौल है। हादसे के बाद डॉक्टरों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा, अगर कोई उस समय छत के ठीक नीचे होता तो उसकी जान को खतरा हो सकता था।
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सिर्फ ड्यूटी रूम में ही नहीं बल्कि पूरे वार्ड की छत के प्लास्टर में नमी है। जगह-जगह से प्लास्टर फूला हुआ है और कभी भी गिर सकता है। इसके बावजूद पीजीआई प्रशासन की ओर से उचित कदम नहीं उठाया गया है।
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18 जून को हुए हादसे में मरीज को आए थे आठ टांके
यह कोई पहली घटना नहीं है। 18 जून को भी इसी वार्ड में एक मरीज के ऊपर प्लास्टर गिरा था। उसके सिर में गंभीर चोट आई थी और आठ टांके लगाने पड़े थे। मरीज टीबी का इलाज करवा रहा था। हादसे के बाद उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराना पड़ा था। उस घटना के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
भवन की हालत बेहद जर्जर, लगातार हो रहे हादसे
पीजीआई की इमारतें जर्जर हालत में पहुंच चुकी हैं। ड्यूटी रूम हो, वार्ड या छात्रावास, हर जगह से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। इन हादसों ने न केवल मरीजों बल्कि डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बार-बार हो रहे इन हादसों से पीजीआई प्रशासन और सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली दोनों की लापरवाही उजागर हो रही है।
नर्सिंग कॉलेज छात्रावास में भी गिरा था प्लास्टर, छात्राएं हुई थीं घायल
16 जुलाई 2023 को पीजीआई के नर्सिंग कॉलेज के छात्रावास में भी इसी तरह की घटना सामने आई थी। छात्राएं जब खाना खा रही थीं, तब छत का प्लास्टर गिर गया था। हादसे में तीन छात्राएं घायल हो गईं और दो के सिर पर टांके लगाने पड़े थे। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि घटना के एक घंटे बाद भी प्रशासन का कोई प्रतिनिधि छात्रावास नहीं पहुंचा था। साथ रहने वाली छात्राओं ने ही घायलों को स्कूटी पर ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया था।
अब तक कोई ठोस कदम नहीं, मरीजों व स्टाफ की जान जोखिम में
लगातार हो रहीं घटनाओं के बावजूद अब तक पीजीआई प्रशासन ने इन वार्डों और भवनों की मरम्मत या पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस योजना नहीं बनाई है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो किसी दिन जानलेवा हादसा हो सकता है।
अभी यह मामला हमारे संज्ञान में नहीं आया है। इसकी पूरी जानकारी ली जा रही है। आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पहले जो हादसा हुआ था, उसमें पीडब्ल्यूडी को मरम्मत के लिए निर्देश दिए जा चुके हैं।
- डाॅ. एसके सिंघल, निदेशक, पीजीआई।

पीजीआई रोहतक के वार्ड 3 के ड्यूटी रूम में नमी के कारण फूला हुआ छत का प्लास्टर। संवाद

पीजीआई रोहतक के वार्ड 3 के ड्यूटी रूम में नमी के कारण फूला हुआ छत का प्लास्टर। संवाद