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पीजीआईएमएस ः रैगिंग मामले में चार एमबीबीएस छात्रों पर गाज गिरना तय
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 09 Oct 2016 02:04 AM IST
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पीजीअाइ राेहतक
- फोटो : file photo
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पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) में रैगिंग के मामले में चार एमबीबीएस छात्रों पर गाज गिरना तय हो गया है। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कुलपति प्रो. ओपी कालरा को सौंप दी है। अब कुलपति को आरोपियों की सजा और जुर्माना तय करना है।
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार आरोपी छात्रों पर 25 हजार से एक लाख रुपये तक जुर्माना किया जा सकता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर हास्टल, कालेज और कक्षाओं से भी छात्रों को बाहर किया जा सकता है। सबसे अहम आरोपियों के घरवालों से संस्थान एफिडेविट लेगा कि यदि वह फिर किसी आरोप में पाया गया तो उसे हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। साथ ही छात्रों को डिग्री पूरी करने के दौरान उनके चरित्र प्रमाण पत्र पर उन पर लगे आरोपों और सजा का जिक्र होगा। चारों छात्रों की जांच फाइल डीन और डायरेक्टर के माध्यम से कुलपति के पास पहुंच गई है।
अधिकारियों पर भी हो सकती है कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट, यूजीसी और एमसीआई के नियमों की यदि बात करें तो कुलपति संस्थान के अधिकारियों पर भी कार्रवाई कर सकते हैं। क्योंकि, इस मामले में सख्त हिदायत है कि रैगिंग करने वालों के साथ संस्थान के अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई होगी। देखना यह है कि कुलपति छात्रों के साथ जिम्मेदार अधिकारियों को भी सजा देते हैं या बचा लेते हैं।
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यह था मामला
एमबीबीएस के चार सीनियर छात्रों ने अपने 11 नये जूनियर साथियों के साथ 28 सितंबर की रात दो घंटे रैगिंग की। जब इसकी भनक एंटी रैगिंग कमेटी को लगी तो जांच शुरू की गई। मामले में सर्वप्रथम गाज हास्टल के गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मचारी पर गिरी थी। अधिकारियों से मिलने पहुंचे चारों छात्रों के परिजनों को जांच अधिकारियों ने हकीकत बयान कर दी। जांच अधिकारियों ने कहा कि यदि रैगिंग सहने वाले उनके बच्चे होते तो क्या उनको छोड़ दिया जाता।
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मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार आरोपी छात्रों पर 25 हजार से एक लाख रुपये तक जुर्माना किया जा सकता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर हास्टल, कालेज और कक्षाओं से भी छात्रों को बाहर किया जा सकता है। सबसे अहम आरोपियों के घरवालों से संस्थान एफिडेविट लेगा कि यदि वह फिर किसी आरोप में पाया गया तो उसे हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। साथ ही छात्रों को डिग्री पूरी करने के दौरान उनके चरित्र प्रमाण पत्र पर उन पर लगे आरोपों और सजा का जिक्र होगा। चारों छात्रों की जांच फाइल डीन और डायरेक्टर के माध्यम से कुलपति के पास पहुंच गई है।
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अधिकारियों पर भी हो सकती है कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट, यूजीसी और एमसीआई के नियमों की यदि बात करें तो कुलपति संस्थान के अधिकारियों पर भी कार्रवाई कर सकते हैं। क्योंकि, इस मामले में सख्त हिदायत है कि रैगिंग करने वालों के साथ संस्थान के अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई होगी। देखना यह है कि कुलपति छात्रों के साथ जिम्मेदार अधिकारियों को भी सजा देते हैं या बचा लेते हैं।
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यह था मामला
एमबीबीएस के चार सीनियर छात्रों ने अपने 11 नये जूनियर साथियों के साथ 28 सितंबर की रात दो घंटे रैगिंग की। जब इसकी भनक एंटी रैगिंग कमेटी को लगी तो जांच शुरू की गई। मामले में सर्वप्रथम गाज हास्टल के गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मचारी पर गिरी थी। अधिकारियों से मिलने पहुंचे चारों छात्रों के परिजनों को जांच अधिकारियों ने हकीकत बयान कर दी। जांच अधिकारियों ने कहा कि यदि रैगिंग सहने वाले उनके बच्चे होते तो क्या उनको छोड़ दिया जाता।