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रोहतक: पीजीआईएमएस ने ब्लैक फंगस के किए 24 से अधिक ऑपरेशन, दो की तैयारी गुरुवार को

माई सिटी रिपोर्टर, रोहतक Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 12 May 2021 11:06 PM IST

सार

पीजीआईएमएस में ईएनटी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रमन वडेरा ने बताया कि सभी मरीज 50 से अधिक आयु वाले हैं, एक-दो केस ही हैं जोकि कम आयु के हैं। सितंबर 2020 से पीजीआईएमस में ब्लैक फंगस के केस आने शुरू हुए थे।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

कोरोना संक्रमणकाल में शुगर, कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों के अलावा कोरोना मरीजों के लिए ब्लैक फंगस समस्या बना है। पीजीआईएमएस पहली लहर के आठ माह में 21 व दूसरी लहर के 15 दिनों में छह मरीजों का उपचार कर रहा है। दो मरीजों का ऑपरेशन आज होना है, जबकि एक मरीज आईसीयू में पहले ही दम तोड़ चुका है।
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पीजीआईएमएस में ईएनटी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रमन वडेरा ने बताया कि सभी मरीज 50 से अधिक आयु वाले हैं, एक-दो केस ही हैं जोकि कम आयु के हैं। सितंबर 2020 से पीजीआईएमस में ब्लैक फंगस के केस आने शुरू हुए थे। 21 अप्रैल 2021 तक हमारे पास 21 केस आए और सभी के ऑपरेशन कर उन्हें बचा लिया गया। एक मरीज की ऑपरेशन के तीन माह बाद मौत हुई थी, लेकिन उसका इस बीमारी से कोई लेना-देना नहीं था। अब सामने आ रहा है कि कोरोना की दूसरी लहर के पिछले 15 दिनों में छह केस एक साथ आ गए हैं। एक मरीज गंभीर हालत में आईसीयू में आया था, जहां उसने दम तोड़ दिया। अभी हम दो मरीजों की वीरवार सुबह सर्जरी करने जा रहे हैं। यह बीमारी डायबिटिक मरीजों के अलावा कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों को हो रही है।


बीमारी की पहचान
- नाक बंद रहना
- नाक में पपड़ी का जमना
- छींक आना, गाल में सुन्न पन महसूस होना
- अधिक देर होने पर आंख बाहर आने जैसा प्रतीत होना
- दिखाई कम देना

रखें ध्यान
- शुगर के वे मरीज जिनको कोरोना हो गया है और स्टेरॉयड लिया हो
- सामान्य कोरोना मरीज पांच-छह दिन में अपने आप ठीक हो जाते हैं, जो लंबे बीमार चल रहे हैं
- जिन मरीजों को स्टेरॉयड देना पड़ता है और शुगर से पीड़ित हैं
- ब्लैक फंगस नाक, आंख व ब्रेन को घातक नुकसान पहुंचाती है

पीजीआईएमएस में पीसीसीएम विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी ने बताया कि कोरोना का उपचार कर रहे डॉक्टरों को ध्यान देना होगा कि वह मरीज को कितना स्टेरॉयड दे रहे हैं। अनियंत्रित शुगर, कम रोग प्रतिरोधक क्षमता व स्टेरॉयड का अधिक प्रयोग ब्लैक फंगस का कारण बन सकता है। इससे ग्रस्त व्यक्ति का ऑपरेशन कर आंखों व जबड़े को निकालने तक की नौबत आ जाती है। दिमाग में ब्लैक फंगस जाने के कारण मरीज की मौत हो सकती है। 

डॉ. चौधरी ने बताया कि कई डॉक्टर अत्यधिक स्टेरॉयड का प्रयोग कर रहे हैं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और ब्लैक फंगस का अटैक होने की संभावना बढ़ जाती है। कोरोना होने के पांच दिन बाद ही मरीज को जरूरत के हिसाब निश्चित मात्रा में स्टेरॉयड देना चाहिए। ब्लैक फंगस म्यूकरमाइकोसिस है जोकि दूरबीन से देखा जाता है। इसमें काले सैल बनते हैं जोकि शरीर के नाक, जबड़ा, आंख से सीधा दिमाग पर हमला करते हैं। इसमें शुरूआत में एंटी फंगल दवा देनी पड़ती है।

हमारे पास ब्लैक फंगस के केस सामान्य दिनों में भी आते हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण में इनकी संख्या पहले की तुलना में बढ़ी है। हमारे पास अनुभवी डॉक्टर हैं, जोकि मरीजों का उपचार करते हैं। जरूरत है बीमारी की समय पर पहचान हो, इसलिए समस्या होने पर अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। - डॉ. एचके अग्रवाल, कुलसचिव एवं सीनियर फिजिशियन, पीजीआईएमएस

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