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Rohtak News: स्मोकर्स के पास बैठने वालों को कैंसर होने की संभावना ज्यादा
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रोहतक। स्मोकिंग करने वाले या नहीं करने वाले दोनों को लंग कैंसर का खतरा है। जो स्मोकिंग कर रहा है वह तो बीमारी का शिकार है ही जो नहीं करता और स्मोकिंग करने वाले के पास बैठा है तो उसे भी इसका खतरा है। वर्तमान स्थिति ऐसी है कि युवा वर्ग इसकी चपेट में हैं। यह जानकारी पीजीआईएमएस के पीसीसीएम विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी ने दी। वह पलमोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की ओर से आयोजित इंडियन सोसाइटी फॉर स्टडी ऑफ लंग कैंसर की 14वीं वार्षिक कांफ्रेंस का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने बताया कि धूम्रपान स्वयं के लिए घातक है, इसका धुआं संपर्क में आने वाले के लिए भी उतना ही घातक है। इसलिए स्मोकिंग करने वालों के साथ उनके आसपास रहने वाले पैसिव स्मोकिंग करते हैं। ऐसे लोगों के फेफड़े प्रदूषण, धुएं या धूम्रपान के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। जिन बच्चों के माता-पिता धूम्रपान करते हैं, उनके बच्चे अधिक प्रभावित होते हैं। पैसिव स्मोकिंग करने वाले लंग्स कैंसर से लेकर हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियां की चपेट में जल्दी आते हैं। पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ से आए डॉक्टर नवनीत सिंह ने बताया कि युवाओं में कैंसर की शिकायतें चिंताजनक है। खास उन युवाओं को कैंसर होना जो स्मोकिंग नहीं करते। यह रिसर्च नहीं है हकीकत है। वे लोग जो स्मोकिंग करने वालों के पास ज्यादा बैठते हैं, उन्हें भी कैंसर होने की संभावना ज्यादा है।
कॉन्फ्रेंस आयोजक पीसीसीएम विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन ने बताया कि कई बार चिकित्सक मरीज को खांसी होने पर एक्स-रे की जांच से ही टीबी की दवाइयां शुरू कर देते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि वह टीबी नहीं लंग कैंसर है। चिकित्सकों को सीटी स्कैन आदि संपूर्ण जांच के बाद ही दवा शुरू करनी चाहिए। कुलसचिव डॉ. एचके अग्रवाल ने कहा कि दो दिवसीय कांफ्रेंस से उम्मीद है कि इससे लंग कैंसर के प्रति ज्ञान वर्धन होगा। निदेशक डॉ. एसएस लोहचब ने कहा कि लंग कैंसर पर अधिक रिसर्च करनी चाहिए। संस्थान में डॉक्टर पवन लंग कैंसर के मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इसके इलाज में प्रयोग होने वाली नवीनतम मशीनों को उपलब्ध करवाया जाएगा। वहीं एलपीएस बोसार्ड के एमडी राजेश जैन ने कहा कि विभाग को स्क्रीनिंग कैंप चलाने चाहिए।
किसी बीमारी को यदि जड़ से खत्म करना है तो उसका सही समय पर पता लगाकर सटीक इलाज करना है। बीमारी बढ़ने पर जानलेवा साबित हो सकती है। लंग कैंसर का हम शुरुआत में पता लगाकर रोक सकते हैं। हमें लंग कैंसर के लक्षणों का पता होना चाहिए ताकि चिकित्सक के पास पहुंचकर उसका संपूर्ण इलाज करवा सकें। कांफ्रेंस से पीजी डॉक्टरों को लाभ मिलेगा।
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- डॉ. अनिता सक्सेना, कुलपति, पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय
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कॉन्फ्रेंस आयोजक पीसीसीएम विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन ने बताया कि कई बार चिकित्सक मरीज को खांसी होने पर एक्स-रे की जांच से ही टीबी की दवाइयां शुरू कर देते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि वह टीबी नहीं लंग कैंसर है। चिकित्सकों को सीटी स्कैन आदि संपूर्ण जांच के बाद ही दवा शुरू करनी चाहिए। कुलसचिव डॉ. एचके अग्रवाल ने कहा कि दो दिवसीय कांफ्रेंस से उम्मीद है कि इससे लंग कैंसर के प्रति ज्ञान वर्धन होगा। निदेशक डॉ. एसएस लोहचब ने कहा कि लंग कैंसर पर अधिक रिसर्च करनी चाहिए। संस्थान में डॉक्टर पवन लंग कैंसर के मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इसके इलाज में प्रयोग होने वाली नवीनतम मशीनों को उपलब्ध करवाया जाएगा। वहीं एलपीएस बोसार्ड के एमडी राजेश जैन ने कहा कि विभाग को स्क्रीनिंग कैंप चलाने चाहिए।
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किसी बीमारी को यदि जड़ से खत्म करना है तो उसका सही समय पर पता लगाकर सटीक इलाज करना है। बीमारी बढ़ने पर जानलेवा साबित हो सकती है। लंग कैंसर का हम शुरुआत में पता लगाकर रोक सकते हैं। हमें लंग कैंसर के लक्षणों का पता होना चाहिए ताकि चिकित्सक के पास पहुंचकर उसका संपूर्ण इलाज करवा सकें। कांफ्रेंस से पीजी डॉक्टरों को लाभ मिलेगा।
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- डॉ. अनिता सक्सेना, कुलपति, पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय