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कोरोना से जंग जीत चुके मरीजों को करना चाहिए प्लाज्मा डोनेट : डॉ. ध्रुव

Sun, 28 Jun 2020 12:57 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2020 12:57 AM IST
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Patients who have won the battle with Corona should do plasma donate: Dr. Dhruv
Patients who have won the battle with Corona should do plasma donate: Dr. Dhruv - फोटो : RohtakCity
जो व्यक्ति कोरोना जैसी महामारी को मात देकर ठीक हो चुका है, उसे पता होता है कि वह किस दौर से गुजरा है। ऐसे में ठीक हुए व्यक्ति को प्लाज्मा दान करके दूसरे व्यक्ति के बहुमूल्य जीवन को बचाना चाहिए। क्योंकि कोरोना एक ऐसी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति तीन दिन में भी ठीक हो सकता है और 30 दिन भी लग सकते हैं। इससे मरीज की मृत्यु तक हो सकती है। ऐसे में गंभीर मरीजों को जीवनदान देने में प्लाज्मा थैरेपी की एक उम्मीद है।
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यह बात प्रदेश के प्रमुख कोविड नोडल अधिकारी डॉ. ध्रुव चौधरी ने कही। डॉ. चौधरी ने बताया कि कोरोना के गंभीर मरीजों को प्लाज्मा थैरेपी के माध्यम से सामान्य स्थिति में लाने के लिए प्रयास किया जा सकता है। इसके लिए प्लाज्मा वही व्यक्ति दान कर सकता है जो कोरोना से ठीक हो चुका है। जो व्यक्ति कोरोना से ठीक हो चुका है और उसे ठीक हुए चार सप्ताह से अधिक का समय हो चुका है, वह अपना प्लाज्मा दान कर सकता है। प्लाज्मा के माध्यम से गंभीर अवस्था में जा रहे कोरोना पॉजिटिव मरीज को सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास किया जा सकता है। लोगों में रक्तदान, नेत्रदान के प्रति जागरूकता है, लेकिन अब समय आ गया है कि कोरोना से जंग जीत चुके मरीज प्लाज्मा दान करें। इस अवसर पर कोविड 19 के कन्वीनर डॉ. वीके कत्याल, ब्लड बैंक विभागाध्यक्ष डॉ. गजेंद्र, डॉ. मंजूनाथ, डॉ. पवन, अशोक, प्रवीण, राजेश आदि उपस्थित रहे।
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प्लाज्मा डोनेट करने वाले को नहीं होता कोई नुकसान
इस तकनीक में प्लाज्मा दान करने वाले व्यक्ति के शरीर से जो खून लिया जाता है वह मशीन के माध्यम से वापिस उसके शरीर में भेज दिया जाता है। इसमें दानकर्ता को कोई नुकसान नहीं होता। बल्कि उक्त व्यक्ति के शरीर में एक नई स्फूर्ति आती है। इसके अलावा वह मानसिक रूप से स्वयं गर्व महसूस करता है कि उसने किसी का जीवन बचाने में अहम योगदान दिया है।
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दीक्षांत अरोड़ा बने कोरोना वॉरियर
डॉ. ध्रुव चौधरी ने बताया कि शनिवार को चावला कॉलोनी के दीक्षांत अरोड़ा ने अपना प्लाज्मा पीजीआईएमएस आकर दान किया है। दीक्षांत का यह कदम कोरोना से जंग जीत चुके मरीजों के लिए प्रेरणा बनेगा। सभी ने कोरोना वॉरियर का ताली बजाकर स्वागत किया और उसके इस कार्य की सराहना की। इस मौके पर वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से डॉ. वीके कत्याल, डॉ. मंजूनाथ, डॉ. सुधीर अत्री, डॉ. प्रशांत, डॉ. पवन, डॉ. दीपक जैन, डॉ. संदीप गोयल आदि ने ताली बजाकर दीक्षांत का आभार व्यक्त किया।

डॉक्टरों ने मुझे बचाया, मेरी वजह से कोई बचता है तो मुझे खुशी होगी : दीक्षांत
दीक्षांत अरोड़ा ने बताया कि वह दिल्ली में नौकरी करता था और मई में वह स्वयं कोरोना पॉजिटिव हो गया। पीजीआईएमएस के डॉक्टरों की वजह से उसे नया जीवनदान मिला है और आज उसकी वजह से किसी को नया जीवनदान मिलेगा। प्लाज्मा डोनेट करने के लिए उसके माता-पिता ने उसे प्रेरित किया। अब प्लाज्मा डोनेट कर उसे काफी अच्छा महसूस हो रहा है। वह कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों से अपील करता है कि वह पीजीआईएमएस के ब्लड बैंक में आकर अपना प्लाज्मा दान करें। क्योंकि कोरोना से ठीक हो चुका मरीज ही समझता है कि वह स्वयं और उसका परिवार किस दौर से गुजरा है। हम सभी को एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आना चाहिए।
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