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आरडीए की हड़ताल से मरीज हुए बेहाल, आज 3 घंटे रहेगी हड़ताल

Tue, 22 Nov 2022 04:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 22 Nov 2022 04:30 AM IST
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Patients suffering due to RDA strike, strike will continue for 3 hours today
डॉ कक्ष के बाहर पोस्टर लेकर एमबीबीएस विद्यार्थी और डॉक्टर के इंतजार में बैठे मरीज और परिजन। अमर उ
रोहतक। बॉन्ड पॉलिसी के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे एमबीबीएस विद्यार्थियों के समर्थन में आई आरडीए ने सोमवार को दो घंटे पेन डाउन हड़ताल की। इस दौरान चिकित्सकों ने ओपीडी में मरीजों की जांच नहीं की। नतीजतन ओपीडी में मरीजों की भीड़ दोपहर बाद तक कतारबद्ध नजर आई।
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यही नहीं, मंगलवार को ओपीडी में मरीजों को और ज्यादा परेशानी उठानी पड़ सकती है। इसकी वजह सोमवार को डीएमईआर (डायरेक्ट्रेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) व अन्य अधिकारियों से मिलने मुख्यालय गए विद्यार्थियों के प्रतिनिधिमंडल के हाथ खाली लौटना बताया जा रहा है। मुख्यालय से राहत नहीं मिलने के चलते आरडीए अपनी हड़ताल बढ़ाकर सुबह 11 से दो बजे तक करने का फैसला लिया है। इधर, शाम को नागरिक मंच व अन्य संगठनों ने डी-पार्क से मेडिकल की ओर जाने वाली सड़क पर मानव शृंखला बनाकर बॉन्ड पॉलिसी के प्रति रोष प्रकट किया। इसमें प्रदर्शनकारी विद्यार्थी भी शामिल रहे।
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सोमवार सुबह करीब 10 बजे एमबीबीएस विद्यार्थी ओपीडी पहुंचे। हाथों में पोस्टर थामे विद्यार्थियों ने बॉन्ड पॉलिसी रद्द करो, 40 लाख रुपये कहां से देंगे, नौकरी सुनिश्चित करे सरकार, नारे लगाते हुए अपना विरोध प्रकट किया। यहीं आरडीए सदस्यों ने भी उनके समर्थन में मरीजों की जांच बंद कर दी। आरडीए की इस दो घंटे हड़ताल के चलते ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ती चली गई। हड़ताल समाप्त होने तक हर विभाग व डॉक्टर के कमरे के बाहर बड़ी संख्या में मरीज इलाज के इंतजार में बैठे रहे। कार्ड बनवाने, नंबर लगवाने व पर्ची बनवाने वाले काउंटरों पर भी लोगों की लंबी कतार नजर आई।
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ओपीडी में दोपहर दो बजे के बाद तक मरीजों की भीड़ बनी रही। दोपहर 12 बजे तक सूने रहे जांच व दवा खिड़की दोपहर बाद तक लोगों की भीड़ से अटी रही। इस कारण उन्हें इलाज व जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। इस दौरान प्रदर्शनकारी विद्यार्थी लोगों के बीच जाकर उन्हें बॉन्ड पॉलिसी व उसके नुकसान से अवगत कराया। विद्यार्थियों ने ओपीडी में नुक्कड़ नाटक के जरिये लोगों तक अपना संदेश पहुंचाने का प्रयास किया। इसे दर्शकों ने काफी सराहा।
आज तीन घंटे रहेगी हड़ताल
आरडीए ने सोमवार शाम को अपनी हड़ताल सुबह 11 से दोपहर दो बजे तक करने का फैसला लिया है। मंगलवार को तीन घंटे की हड़ताल के दौरान मरीजों को स्वास्थ्य लाभ नहीं दिया जाएगा। ऐसे में गंभीर मरीजों की मुश्किलें बढ़ना तय है। यही नहीं, सोमवार को बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में डॉक्टरों ने प्रदेश भर में पक्ष व विपक्ष के सांसदों व विधायकों को मांग पत्र सौंपे हैं।
मानव शृंखला बनाकर जताया रोष
सोमवार शाम को नागरिक मंच व अन्य सामाजिक संगठनों ने शहर की सड़कों पर मानव शृंखला बनाकर बॉन्ड पॉलिसी का विरोध किया। इसमें एमबीबीएस विद्यार्थियों ने भी हिस्सा लिया। नागरिक मंच के अलावा अखिल भारतीय महिला समिति, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, हिम्मत संस्था, किसान सभा समेत अनेक संगठन शामिल रहे।
मरीज बोले-हड़ताल खत्म होने का कर रहे इंतजार
पत्नी कैलाश कैंसर पीड़ित है। पैर के ऊपर के हिस्से की त्वचा बीमारी के कारण बुरी तरह झुलस गई है। पीजीआई में दिखाने आए तो हड़ताल का पता लगा। डॉक्टर ने कीमो करने का भी समय दिया था। अब हड़ताल समाप्त होने पर ही राहत की उम्मीद है।
- जयपाल सिंह, कलानौर
मेरी भाभी सोना बीमार है। उन्हें खांसी की दिक्कत है। इलाज के लिए सुबह साढ़े नौ बजे ओपीडी पहुंच गए थे। कार्ड बनने के बाद डॉक्टर को दिखाने का समय आया तो हड़ताल हो गई। अब वापस जा रहे हैं। हड़ताल खत्म होने पर दोबारा आएंगे।
- रवि, भगवतीपुर
मेरे पति नरेंद्र के सिर में चोट आई है। कुछ दिन पहले वह सुबह खड़े-खड़े अचानक गिर गए थे। आराम नहीं मिलने पर डॉक्टर को दिखाने आए थे। यहां हड़ताल चल रही है। इसलिए बैठकर इंतजार कर रहे हैं। हड़ताल के बाद डॉक्टर को दिखाएंगे।
- पूनम, रोहतक
मां शकुंतला को दिखाने ओपीडी लाया हूं। इनके पूरे शरीर पर सूजन आई हुई है। हम सुबह आठ बजे घर से चले थे। यहां कार्ड बनने के बाद डॉक्टर के पास आए तो हड़ताल हो गई। डॉक्टर ने हड़ताल समाप्त होने पर मरीज देखने की बात कही है।

- मोहित, बेरी
वर्जन-
एमबीबीएस विद्यार्थियों का 24 सदस्यों का दल सोमवार को मुख्यालय गया था। इसमें प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थी शामिल हैं। यहां डीएमईआर व अन्य अधिकारियों से मुलाकात में समाधान पर सहमति बनने की उम्मीद थी। दोपहर बाद 10 सदस्यीय दल की हुई मुलाकात व बातचीत बेनतीजा रही। इसके चलते हड़ताल की समय अवधि बढ़ाकर तीन घंटे की गई है। अब भी सरकार ने सुनवाई नहीं की तो ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी। इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। सरकार विद्यार्थियों की बात सुन नहीं रही है। हमें यह कदम मजबूरन उठाना पड़ रहा है।
- डॉ. अंकित गुलिया, अध्यक्ष, आरडीए।
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