स्वतंत्रता सेनानी किसी एक वर्ग के नहीं होते, पूरे राष्ट्र की धरोहर होते हैं। पंडित श्रीराम शर्मा ने तो आजादी की लड़ाई में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। युवाओं को उनके दिखाए रास्ते पर चलना चाहिए। उक्त बातें सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने पंडित श्रीराम शर्मा की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। इससे पहले उन्होंने पंडित श्रीराम शर्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
सांसद ने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा एक स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-सात इतिहासकार और साहित्यकार भी थे। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों पर कई पुस्तकें लिखीं। हरियाणा सरकार ने 1976 में उन्हें साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया था। पंडित शर्मा ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लंबा संघर्ष किया, अपना पूरा जीवन आजादी को समर्पित कर दिया। महात्मा गांधी के आह्वान पर आजादी की लड़ाई में कूदे पंडित श्रीराम शर्मा ने असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा, व्यक्तिगत सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में भागीदारी की थी। वह करीब 10 वर्षों तक विभिन्न जेलों में थे। असहयोग आंदोलन के दौरान झज्जर के टाउन हॉल में ध्वज फहराने के बाद बाल गंगाधर तिलक का चित्र लगाने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। वह महान विभूति थे, उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। युवाओं को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। इस अवसर पर मेयर मनमोहन गोयल, भाजपा जिलाध्यक्ष अजय बंसल, अशोक दीक्षित, रमेश अत्री, राम अवतार शर्मा, बुधराम शर्मा, चंद्रशेखर बंसल, जयभगवान जांगड़ा, रमेश हरियाणा, रणधीर भारद्वाज, चंद्रभान अत्री, मोनू अत्री, सतीश पहरावर, डॉ. सुदेश दीक्षित, रमेश शर्मा, प्रवीण सहगल आदि मौजूद रहे।