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Rohtak News: कपास का विकल्प नहीं बन सकी धान की फसल

Sun, 21 Jul 2024 02:45 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jul 2024 02:45 AM IST
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Paddy crop could not become an alternative to cotton
महम। क्षेत्र में कभी कपास की धाक थी। किसानों की बल्ले-बल्ले करने वाले सफेद सोने पर जब से गुलाबी सुंडी का प्रकोप बढ़ा है तभी से इससे मुंह मोड़ लिया। विकल्प के रूप में धान की फसल को चुना था। अभी तक इस क्षेत्र में बारिश नहीं हो सकी। भीषण गर्मी धान की फसल सूख गई है। किसानों ने कहा कि सूखा घोषित कर सरकार को मुआवजा देना चाहिए।
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किसान भोपा, राजू नंबरदार, रामनिवास, नुपा आदि का कहना है कि यहां भूमिगत जल खारा होने के कारण खेती सिर्फ नहर के पानी और बारिश पर निर्भर है। किसी तरह सिंचाई कर धान की फसल लगाई गई थी। लेबर सहित खाद और पौध पर 16 हजार रुपये प्रति एकड़ का खर्च आ चुका है। अभी तक बारिश नहीं होने से फसल सूख गई है।
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किसानों का कहना है कि पहले यहां पर कपास की खूब खेती होती थी। पिछले कुछ साल से गुलाबी सुंडी का प्रकोप बढ़ गया है। इससे पैदावार नहीं हो पाती है। हर साल मानसून की बारिश सात जुलाई तक आ जाती थी। इससे पहले भी प्री मानसून की बारिश हो जाती थी। पर्याप्त न होने से भूमिगत जलस्तर नीचे चला गया है। इससे ट्यूबवेल भी जवाब दे गए हैं। अब बारिश हो भी जाए तो खास फायदा नहीं है। क्योंकि खरीफ की फसल का समय बीतता जा रहा है।
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